अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَحُسُّونَهُمْ: तुम उन्हें (दुश्मनों को) मार रहे थे, यानी पूरी तरह से सफाया कर रहे थे।
- فَشِلْتُمْ: तुम कमज़ोर पड़ गए और हिम्मत हार बैठे।
- تَنَازَعْتُمْ: तुमने आपस में मतभेद किया और झगड़ा किया।
- عَصَيْتُمْ: तुमने नाफ़रमानी की (रसूल ﷺ के आदेश की)।
- لِيَبْتَلِيَكُمْ: ताकि वह तुम्हारी परीक्षा ले।
- عَفَا عَنكُمْ: उसने तुम्हें माफ़ कर दिया।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने वादे को सच कर दिखाया। उसने तुम्हें उस वक़्त फ़तह अता की, जब उहुद के मैदान में तुम दुश्मनों को अपनी ताक़त से मार रहे थे—यह सब उसी की इजाज़त और मदद से था। लेकिन जब तुमने कमज़ोरी दिखाई, पहाड़ी पर तैनात तीरंदाज़ों ने अपनी जगह छोड़ दी और आपस में मतभेद पैदा कर लिया—कि रहें या ग़नीमत (माल-ए-ग़नीमत) इकट्ठा करने जाएँ—और रसूलुल्लाह ﷺ के आदेश की नाफ़रमानी की, जबकि अल्लाह ने तुम्हें वह चीज़ दिखा दी थी जो तुम चाहते थे यानी फ़तह और ग़नीमत, तो यह नाफ़रमानी तुमसे उसके बाद हुई।
तुममें से कुछ लोग दुनिया (ग़नीमत) चाहते थे, और कुछ आख़िरत (अल्लाह का सवाब) चाहते थे। फिर अल्लाह ने तुम्हें दुश्मनों के सामने पलटा दिया (यानी शिकस्त दी), ताकि तुम्हारी परीक्षा ले—कौन सब्र करने वाला है और कौन अपने नफ़्स की پیروی करता है।
और फिर अल्लाह ने तुम्हें माफ़ कर दिया, क्योंकि उसने तुम्हें हलाक नहीं किया, बल्कि तुम्हारी ग़लती के बावजूद तुम पर रहम किया। बेशक अल्लाह मोमिनों पर बड़ा फज़ल (कृपा) करने वाला है।
दावत और नसीहत:
यह वाक़िया हमारे लिए एक बड़ी सबक़ है! अल्लाह का वादा सच्चा है, लेकिन उसकी मदद तब आती है जब हम उसके हुक्म और उसके रसूल ﷺ की इताअत (आज्ञाकारिता) पर डटे रहें। जब हम दुनिया की चीज़ों (माल, शोहरत, आराम) की तरफ़ भागते हैं और अल्लाह के हुक्म को भूल जाते हैं, तो नुक़सान उठाना पड़ता है।
लेकिन अल्लाह कितना मेहरबान है! वह हमारी ग़लतियों के बाद भी माफ़ करता है, बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें। यही अल्लाह का फज़ल है—वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें माफ़ करने का मौक़ा देता है।
हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत को अपनी ज़िंदगी का नुस्ख़ा बनाएँ, दुनिया की मोहब्बत को आख़िरत पर कभी हावी न होने दें, और जब कोई ग़लती हो जाए तो फौरन अल्लाह से माफ़ी माँगें। अल्लाह तआला माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है।
📜 आयत 150-154 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 152
सूरा आल-इमरान आयत 152 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक खुदा ने (जंगे औहद में भी) अपना (फतेह का)…सूरा आयत 152/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 150–154. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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