अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَرِحِينَ: खुश होने वाले, आनंदित होने वाले।
- آتَاهُمُ اللهُ مِن فَضْلِهِ: अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह और कृपा से जो कुछ दिया।
- يَسْتَبْشِرُونَ: खुशखबरी सुनकर प्रसन्न होते हैं, शुभ समाचार से आनंदित होते हैं।
- لَمْ يَلْحَقُوا بِهِم: जो अभी उनसे नहीं मिले, यानी जो अभी दुनिया में ज़िंदा हैं और उनके पीछे बाकी हैं।
- مِنْ خَلْفِهِمْ: उनके पीछे, उनके बाद आने वाले।
- أَلَّا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ: उन्हें कोई भय नहीं होगा और न ही वे दुखी होंगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन महान शहीदों के बारे में बताती है जो अल्लाह की राह में शहीद हुए और अपने रब के पास जीवित हैं, अपनी रोज़ी पा रहे हैं। अल्लाह तआला ने उन पर अपनी विशेष कृपा और अनुग्रह बरसाया है, और उन्हें ऐसा सम्मान और आनंद प्रदान किया है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। वे उस महान देन से खुश और आनंदित हैं जो अल्लाह ने उन्हें अपने फज़ल (अनुग्रह) से अता की है — यानी शहादत का मुकाम, जन्नत के दरजे, अल्लाह की रज़ा और उसकी रहमतें।
इसके साथ ही, वे अपने उन भाइयों के लिए भी खुशखबरी और शुभ समाचार की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो अभी दुनिया में पीछे रह गए हैं और अभी उनसे नहीं मिले। वे जानते हैं कि यदि ये भाई भी अल्लाह की राह में शहीद हो जाएँगे, तो उन्हें भी वही सम्मान और आनंद मिलेगा जो उन्हें मिला है। इसलिए वे उनके लिए खुश हैं और उनके आने का इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें पूरा यक़ीन है कि उन भाइयों पर भी कोई भय नहीं होगा और न ही वे किसी बात पर दुखी होंगे — न आख़िरत के मामलों में उन्हें डर होगा और न ही दुनिया के खोए हुए सुखों पर उन्हें कोई अफ़सोस या ग़म होगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में जिहाद और कुर्बानी का इनाम कितना बड़ा है। शहीदों की आत्माएँ अल्लाह के पास जीवित हैं और वे अपने पीछे आने वालों के लिए दुआ करते हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है कि हम अल्लाह की राह में कुर्बानी देने से कभी पीछे न हटें, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। जो लोग अल्लाह की राह में अपनी जान देते हैं, वे वास्तव में हारते नहीं, बल्कि सबसे बड़ी जीत पाते हैं — अल्लाह की रज़ा, जन्नत और उसकी हमेशा की खुशियाँ। यह हमें यह भी सिखाता है कि मौत का डर मु'मिन को अल्लाह की राह से नहीं रोकना चाहिए, क्योंकि मु'मिन की मौत भी उसके लिए खुशी और इज़्ज़त का ज़रिया बनती है।
📜 आयत 168-172 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 170
सूरा आल-इमरान आयत 170 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया…सूरा आयत 170/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 168–172. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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