आल-इमरान · 171/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
۞ يَسْتَبْشِرُونَ بِنِعْمَةٍ مِّنَ اللَّهِ وَفَضْلٍ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُؤْمِنِينَ ۝١٧١
Yastabshiroona bini`matim minal laahi wa fad linw wa annal laaha laa yudee`u ajral mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा नेअमत और उसके फ़ज़ल (व करम) और इस बात की ख़ुशख़बरी पाकर कि ख़ुदा मोमिनीन के सवाब को बरबाद नहीं करता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَبْشِرُونَ: वे खुशियाँ मनाते हैं, आनंदित होते हैं।
  • نِعْمَةٍ: वह नेमत जो उन्हें मिली है।
  • فَضْلٍ: अतिरिक्त अनुग्रह और बढ़ा हुआ प्रतिफल।
  • لَا يُضِيعُ: बर्बाद नहीं करता, अकारण नहीं जाने देता।
  • أَجْرَ الْمُؤْمِنِينَ: ईमानवालों का प्रतिफल।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये शहीद (जो अल्लाह की राह में शहीद हुए) उस महान नेमत पर खुशियाँ मना रहे हैं जो अल्लाह ने उन्हें दी है, और उस अतिरिक्त कृपा (फ़ज़्ल) पर भी जो उनके इंतज़ार में है। वे इस बात पर भी आनंदित हैं कि अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों का प्रतिफल कभी बर्बाद नहीं करता। उन्होंने जो भी नेक काम किए, जो कुर्बानियाँ दीं, अल्लाह उन्हें पूरा-पूरा बदला देगा और अपने फ़ज़्ल से उसमें और इज़ाफ़ा भी करेगा। यह खुशी सिर्फ़ मिले हुए इनाम पर नहीं है, बल्कि इस बात पर भी है कि अल्लाह का वादा सच्चा है और वह किसी मोमिन की मेहनत को रद्द नहीं करता। यह उनके लिए सबसे बड़ी तसल्ली और सुकून की बात है कि उनकी मेहनत और ईमान अकारण नहीं जाएगा।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की नेमत पर खुशी जायज़ है: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की दी हुई नेमतों और उसके फ़ज़्ल पर खुश होना और उसका एहसान जताना एक अच्छा काम है, बशर्ते कि यह खुशी अल्लाह की तरफ़ हो, न कि दुनिया के माल पर घमंड की।
  2. अल्लाह का इन्साफ़ और फ़ज़्ल: अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ इन्साफ़ करता है — वह उनके अच्छे कामों को ज़ाया नहीं करता। यह बात मोमिन के दिल को सुकून देती है कि उसकी कोई भलाई अल्लाह के यहाँ बेकार नहीं जाती।
  3. ईमान की क़द्र: यह आयत ईमान की अहमियत बताती है — ईमान ही वह चीज़ है जिसकी बिना पर अल्लाह इनाम देता है। इसलिए इंसान को अपने ईमान को मज़बूत करना चाहिए और उस पर साबित-क़दम रहना चाहिए।
  4. आख़िरत की उम्मीद: यह आयत मोमिन को आख़िरत की तरफ़ रग़बत देती है — असली खुशी और कामयाबी वहाँ है, जहाँ अल्लाह अपने बंदों को उनकी मेहनत का पूरा बदला देगा। यह उम्मीद इंसान को दुनिया की मुश्किलों में सब्र और अमल पर क़ायम रखती है।
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📜 आयत 169-173 — आल-इमरान

169وَلَا تَحْسَبَنَّ الَّذِينَ قُتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ أَمْوَاتًا ۚ بَلْ أَحْيَاءٌ عِندَ رَبِّهِمْ يُرْزَقُونَ
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह की) रोज़ी पाते हैं
170فَرِحِينَ بِمَا آتَاهُمُ اللَّهُ مِن فَضْلِهِ وَيَسْتَبْشِرُونَ بِالَّذِينَ لَمْ يَلْحَقُوا بِهِم مِّنْ خَلْفِهِمْ أَلَّا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत ये (ख्याल करके) ख़ुशियॉ मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी क़िस्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे
171۞ يَسْتَبْشِرُونَ بِنِعْمَةٍ مِّنَ اللَّهِ وَفَضْلٍ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُؤْمِنِينَ
ख़ुदा नेअमत और उसके फ़ज़ल (व करम) और इस बात की ख़ुशख़बरी पाकर कि ख़ुदा मोमिनीन के सवाब को बरबाद नहीं करता
172الَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِلَّهِ وَالرَّسُولِ مِن بَعْدِ مَا أَصَابَهُمُ الْقَرْحُ ۚ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا مِنْهُمْ وَاتَّقَوْا أَجْرٌ عَظِيمٌ
निहाल हो रहे हैं (जंगे ओहद में) जिन लोगों ने जख्म खाने के बाद भी ख़ुदा और रसूल का कहना माना उनमें से जिन लोगों ने नेकी और परहेज़गारी की (सब के लिये नहीं सिर्फ) उनके लिये बड़ा सवाब है
173الَّذِينَ قَالَ لَهُمُ النَّاسُ إِنَّ النَّاسَ قَدْ جَمَعُوا لَكُمْ فَاخْشَوْهُمْ فَزَادَهُمْ إِيمَانًا وَقَالُوا حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ
यह वह हैं कि जब उनसे लोगों ने आकर कहना शुरू किया कि (दुशमन) लोगों ने तुम्हारे (मुक़ाबले के) वास्ते (बड़ा लश्कर) जमा किया है पस उनसे डरते (तो बजाए ख़ौफ़ के) उनका ईमान और ज्यादा हो गया और कहने लगे (होगा भी) ख़ुदा हमारे वास्ते काफ़ी है
आल-इमरानकुरान सूची
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171आयत

अनुवाद — आल-इमरान 171

सूरा आल-इमरान आयत 171 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा नेअमत और उसके फ़ज़ल (व करम) और इस बात…

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Tuesday, August 18, 2026

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