आल-इमरान · 8/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ ۝٨
Rabbanaa laa tuzigh quloobanaa ba`da iz hadaitanaa wa hab lanaa mil ladunka rahmah; innaka antal Wahhaab
📖 हिंदी अर्थ
(और दुआ करते हैं) ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا تُزِغْ – हमारे दिलों को मत झुकाओ, मत भटकाओ।
  • قُلُوبَنَا – हमारे दिल।
  • هَدَيْتَنَا – तूने हमें मार्गदर्शन दिया, हिदायत दी।
  • مِن لَّدُنكَ – अपनी ओर से, अपने पास से।
  • الْوَهَّابُ – बहुत अधिक देने वाला, बिना किसी सवाल के उपहार देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन रासिख़ीन (गहरे इल्म वाले) लोगों की दुआ है, जिनका ज़िक्र पिछली आयत में किया गया था। ये लोग अल्लाह से दुआ करते हैं: "ऐ हमारे रब! जब तूने हमें हिदायत दी और सीधा रास्ता दिखाया, तो हमारे दिलों को इस हिदायत के बाद मत भटकाना। हमारे दिलों को सच्चाई और ईमान पर स्थिर रख, और हमें उन लोगों की तरह न बना जो हक़ से मुंह मोड़ लेते हैं या उसमें संदेह करने लगते हैं।"

फिर वे कहते हैं: "और हमें अपनी ओर से रहमत अता फ़रमा — यानी ऐसी रहमत जो हमारे दिलों को तेरी तरफ़ मज़बूत कर दे, हमें गुमराही से बचाए और हमें अमल की तौफ़ीक़ दे। बेशक तू ही सबसे बड़ा देने वाला है, तू जिसे चाहता है बिना किसी हिसाब के देता है।"

इस दुआ में दो बड़ी चीज़ें माँगी गई हैं: पहली — दिल की स्थिरता और हिदायत पर क़ायम रहना; दूसरी — अल्लाह की ख़ास रहमत जो इंसान को हर बुराई से बचाए। यह दुआ सिखाती है कि हिदायत पा लेने के बाद भी इंसान को डर रहना चाहिए कि कहीं उसका दिल न भटक जाए, इसलिए उसे हमेशा अल्लाह से साबित क़दमी की दुआ करनी चाहिए।


फ़ायदे (सबक़):

  1. हिदायत अल्लाह की देन है — जिसे अल्लाह हिदायत दे, उसे कोई गुमराह नहीं कर सकता, और जिसे वह गुमराह करे, उसे कोई हिदायत नहीं दे सकता। इसलिए हमें हर वक़्त अल्लाह से हिदायत की दुआ करनी चाहिए।
  2. दिल की स्थिरता की दुआ — यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान पर क़ायम रहना बहुत बड़ी नेमत है, और हमें इसे हासिल करने के लिए अल्लाह से लगातार दुआ करनी चाहिए।
  3. अल्लाह की रहमत की ज़रूरत — इंसान अपने अमल से जन्नत नहीं पा सकता, बल्कि अल्लाह की रहमत ही उसे बचाती है। इसलिए हमें अल्लाह से रहमत की दुआ करनी चाहिए।
  4. अल्लाह का नाम "वह्हाब" — यह हमें बताता है कि अल्लाह बहुत देने वाला है, वह बिना किसी शर्त के अपने बंदों को देता है। इससे हमें उम्मीद रखनी चाहिए और उससे माँगते रहना चाहिए।
  5. इल्म वालों की पहचान — जो लोग सच्चे इल्म वाले हैं, वे अल्लाह से दिल की स्थिरता और रहमत की दुआ करते हैं, और अपने इल्म पर घमंड नहीं करते।
🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — आल-इमरान

6هُوَ الَّذِي يُصَوِّرُكُمْ فِي الْأَرْحَامِ كَيْفَ يَشَاءُ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
वही तो वह ख़ुदा है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं
7هُوَ الَّذِي أَنزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ آيَاتٌ مُّحْكَمَاتٌ هُنَّ أُمُّ الْكِتَابِ وَأُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌ ۖ فَأَمَّا الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمْ زَيْغٌ فَيَتَّبِعُونَ مَا تَشَابَهَ مِنْهُ ابْتِغَاءَ الْفِتْنَةِ وَابْتِغَاءَ تَأْوِيلِهِ ۗ وَمَا يَعْلَمُ تَأْوِيلَهُ إِلَّا اللَّهُ ۗ وَالرَّاسِخُونَ فِي الْعِلْمِ يَقُولُونَ آمَنَّا بِهِ كُلٌّ مِّنْ عِندِ رَبِّنَا ۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُو الْأَلْبَابِ
वही (हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (ए रसूल) वही (वह ख़ुदा) है जिसने तुमपर किताब नाज़िल की उसमें की बाज़ आयतें तो मोहकम (बहुत सरीह) हैं वही (अमल करने के लिए) असल (व बुनियाद) किताब है और कुछ (आयतें) मुतशाबेह (मिलती जुलती) (गोल गोल जिसके मायने में से पहलू निकल सकते हैं) पस जिन लोगों के दिलों में कज़ी है वह उन्हीं आयतों के पीछे पड़े रहते हैं जो मुतशाबेह हैं ताकि फ़साद बरपा करें और इस ख्याल से कि उन्हें मतलब पर ढाले लें हालाँकि ख़ुदा और उन लोगों के सिवा जो इल्म से बड़े पाए पर फ़ायज़ हैं उनका असली मतलब कोई नहीं जानता वह लोग (ये भी) कहते हैं कि हम उस पर ईमान लाए (यह) सब (मोहकम हो या मुतशाबेह) हमारे परवरदिगार की तरफ़ से है और अक्ल वाले ही समझते हैं
8رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ
(और दुआ करते हैं) ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है
9رَبَّنَا إِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُخْلِفُ الْمِيعَادَ
ऐ हमारे परवरदिगार बेशक तू एक न एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा (तो हम पर नज़रे इनायत रहे) बेशक ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ़ नहीं करता
10إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ وَقُودُ النَّارِ
बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया इख्तेयार किया उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से न उनके माल ही कुछ बचाएंगे, न उनकी औलाद (कुछ काम आएगी) और यही लोग जहन्नुम के ईधन होंगे
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
8आयत

अनुवाद — आल-इमरान 8

सूरा आल-इमरान आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और दुआ करते हैं) ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल…

सूरा आयत 8/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए