अल-अहज़ाब · 23/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ رِجَالٌ صَدَقُوا مَا عَاهَدُوا اللَّهَ عَلَيْهِ ۖ فَمِنْهُم مَّن قَضَىٰ نَحْبَهُ وَمِنْهُم مَّن يَنتَظِرُ ۖ وَمَا بَدَّلُوا تَبْدِيلًا ۝٢٣
Minal mu`mineena rijaalun sadaqoo maa `aahadul laaha `alaihi faminhum man qadaa nahbahoo wa minhum mai yantaziru wa maa baddaloo tabdeelaa
📖 हिंदी अर्थ
ईमानदारों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं कि खुदा से उन्होंने (जॉनिसारी का) जो एहद किया था उसे पूरा कर दिखाया ग़रज़ उनमें से बाज़ वह हैं जो (मर कर) अपना वक्त पूरा कर गए और उनमें से बाज़ (हुक्मे खुदा के) मुन्तज़िर बैठे हैं और उन लोगों ने (अपनी बात) ज़रा भी नहीं बदली
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَضَىٰ نَحْبَهُ: अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली, अर्थात अपनी मृत्यु या शहादत तक उस पर दृढ़ रहे। "نحب" का अर्थ है नज़्र (प्रतिज्ञा) या मृत्यु।
  • يَنتَظِرُ: प्रतीक्षा कर रहा है, अर्थात शहादत या विजय की प्रतीक्षा में है।
  • مَا بَدَّلُوا تَبْدِيلًا: उन्होंने अपने वचन या प्रतिज्ञा में कोई परिवर्तन नहीं किया, न ही उसे तोड़ा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मोमिनों (सच्चे ईमानवालों) के उस गुण का वर्णन करती है जो उन्हें मुनाफ़िक़ों (कपटियों) से अलग करता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ईमानवालों में कुछ ऐसे सच्चे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह से किए गए अपने वचन को सच्चा कर दिखाया। उन्होंने अल्लाह से प्रतिज्ञा की थी कि वे जिहाद में दृढ़ रहेंगे, कठिनाइयों पर सब्र करेंगे और अपने दीन पर क़ायम रहेंगे।

इनमें से कुछ लोग अपनी प्रतिज्ञा पर तब तक दृढ़ रहे जब तक कि उन्होंने शहादत प्राप्त नहीं कर ली — यानी वे अल्लाह के रास्ते में शहीद हो गए या अपनी स्वाभाविक मृत्यु तक सच्चाई और वफ़ादारी पर क़ायम रहे। और कुछ लोग अभी भी उसी प्रतिज्ञा पर दृढ़ हैं और शहादत या विजय — इन दोनों में से किसी एक अच्छे अंजाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने अपने वचन को बिल्कुल नहीं बदला, न उसे तोड़ा, न उसमें कोई कमी की — जैसा कि मुनाफ़िक़ों ने किया जो मुश्किल समय आते ही अपने वचन से मुकर गए।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अमल और सच्चाई से होता है। जो लोग अल्लाह से वचन लेते हैं, उन्हें उसे पूरा करना चाहिए — चाहे जान ही क्यों न देनी पड़े। यही वफ़ादारी और सच्चाई मोमिन की पहचान है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के रास्ते में दृढ़ता और वचन की पूर्ति का कितना ऊँचा मुक़ाम है। जो लोग अपने ईमान पर सच्चे रहते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। शहादत की मौत कितनी प्यारी है — यह वह मौत है जो नबीयों और सिद्दीक़ों का साथ देती है। हमें भी चाहिए कि अपने ईमान और अल्लाह से किए गए वचनों पर दृढ़ रहें, क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें सच्चे मोमिनों में शामिल करे और हमें अपने वचन पर क़ायम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — अल-अहज़ाब

21لَّقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ لِّمَن كَانَ يَرْجُو اللَّهَ وَالْيَوْمَ الْآخِرَ وَذَكَرَ اللَّهَ كَثِيرًا
(मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते तो खुद रसूल अल्लाह का (ख़न्दक़ में बैठना) एक अच्छा नमूना था (मगर हाँ यह) उस शख्स के वास्ते है जो खुदा और रोजे आखेरत की उम्मीद रखता हो और खुदा की याद बाकसरत करता हो
22وَلَمَّا رَأَى الْمُؤْمِنُونَ الْأَحْزَابَ قَالُوا هَٰذَا مَا وَعَدَنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ وَصَدَقَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ ۚ وَمَا زَادَهُمْ إِلَّا إِيمَانًا وَتَسْلِيمًا
और जब सच्चे ईमानदारों ने (कुफ्फार के) जमघटों को देखा तो (बेतकल्लुफ़) कहने लगे कि ये वही चीज़ तो है जिसका हम से खुदा ने और उसके रसूल ने वायदा किया था (इसकी परवाह क्या है) और खुदा ने और उसके रसूल ने बिल्कुल ठीक कहा था और (इसके देखने से) उनका ईमानदार और उनकी इताअत और भी ज़िन्दा हो गयी
23مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ رِجَالٌ صَدَقُوا مَا عَاهَدُوا اللَّهَ عَلَيْهِ ۖ فَمِنْهُم مَّن قَضَىٰ نَحْبَهُ وَمِنْهُم مَّن يَنتَظِرُ ۖ وَمَا بَدَّلُوا تَبْدِيلًا
ईमानदारों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं कि खुदा से उन्होंने (जॉनिसारी का) जो एहद किया था उसे पूरा कर दिखाया ग़रज़ उनमें से बाज़ वह हैं जो (मर कर) अपना वक्त पूरा कर गए और उनमें से बाज़ (हुक्मे खुदा के) मुन्तज़िर बैठे हैं और उन लोगों ने (अपनी बात) ज़रा भी नहीं बदली
24لِّيَجْزِيَ اللَّهُ الصَّادِقِينَ بِصِدْقِهِمْ وَيُعَذِّبَ الْمُنَافِقِينَ إِن شَاءَ أَوْ يَتُوبَ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
ये इम्तेहान इसलिए था ताकि खुद सच्चे (ईमानदारों) को उनकी सच्चाई की जज़ाए ख़ैर दे और अगर चाहे तो मुनाफेक़ीन की सज़ा करे या (अगर वह लागे तौबा करें तो) खुदा उनकी तौबा कुबूल फरमाए इसमें शक नहीं कि खुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
25وَرَدَّ اللَّهُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِغَيْظِهِمْ لَمْ يَنَالُوا خَيْرًا ۚ وَكَفَى اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ الْقِتَالَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ قَوِيًّا عَزِيزًا
और खुदा ने (अपनी कुदरत से) क़ाफिरों को मदीने से फेर दिया (और वह लोग) अपनी झुंझलाहट में (फिर गए) और इन्हें कुछ फायदे भी न हुआ और खुदा ने (अपनी मेहरबानी से) मोमिनीन को लड़ने की नौबत न आने दी और खुदा तो (बड़ा) ज़बरदस्त (और) ग़ालिब हैं
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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मदनीRevelation
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 23

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Tuesday, August 18, 2026

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