अल-अहज़ाब · 5/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
ادْعُوهُمْ لِآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِندَ اللَّهِ ۚ فَإِن لَّمْ تَعْلَمُوا آبَاءَهُمْ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ وَمَوَالِيكُمْ ۚ وَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ فِيمَا أَخْطَأْتُم بِهِ وَلَٰكِن مَّا تَعَمَّدَتْ قُلُوبُكُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ۝٥
Ud`oohum li aabaaa`ihim huwa aqsatu `indal laah; fa illam ta`lamooo aabaaa`ahum fa ikhwaanukum fid deeni wa mawaaleekum; wa laisa `alaikum junaahun feemaaa akhtaatum bihee wa laakim maa ta`ammadat quloobukum; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa
📖 हिंदी अर्थ
लिये पालकों का उनके (असली) बापों के नाम से पुकारा करो यही खुदा के नज़दीक बहुत ठीक है हाँ अगर तुम लोग उनके असली बापों को न जानते हो तो तुम्हारे दीनी भाई और दोस्त हैं (उन्हें भाई या दोस्त कहकर पुकारा करो) और हाँ इसमें भूल चूक जाओ तो अलबत्ता उसका तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है मगर जब तुम दिल से जानबूझ कर करो (तो ज़रूर गुनाह है) और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है।

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَقْسَطُ: सबसे अधिक न्यायपूर्ण और उचित।
  • مَوَالِيكُمْ: तुम्हारे स्वामी (आज़ाद किए गए ग़ुलाम) या तुम्हारे सहायक और मित्र।
  • جُنَاحٌ: पाप, गुनाह या दोष।
  • أَخْطَأْتُمْ: भूल से कोई गलती कर बैठना।
  • تَعَمَّدَتْ: जानबूझकर इरादे से किया जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक और इस्लामी नियम को सिखाती है। इस्लाम से पहले के ज़माने में एक रिवाज था कि लोग किसी को गोद ले लेते थे और उसे अपने ही बेटे की तरह पुकारते थे, यहाँ तक कि उसका नाम भी अपने नाम के साथ जोड़ लेते थे। अल्लाह ने इस आयत में स्पष्ट कर दिया कि किसी को गोद लेने का मतलब यह नहीं है कि उसका असली नसब (वंश) मिट जाए। हर इंसान को उसके असली बाप की तरफ़ निस्बत करके पुकारा जाना चाहिए। यही अल्लाह के यहाँ सबसे अधिक न्यायपूर्ण और सच्चा तरीका है।

अल्लाह फ़रमाता है कि जिस शख्स को तुम गोद लेते हो, उसे उसके असली बाप की तरफ़ मंसूब करके बुलाओ। यह अल्लाह के नज़दीक सबसे ज़्यादा अदल और इंसाफ़ वाला काम है। अगर तुम्हें उसके असली बाप का पता न हो, तो उसे अपना दीनी भाई या अपना मित्र (मौला) कहकर पुकारो, क्योंकि इस्लामी भाईचारा ही सबसे बड़ा रिश्ता है। यानी उसे "ऐ मेरे दीनी भाई" या "ऐ मेरे दोस्त" कहकर संबोधित करो, न कि "ऐ मेरे बेटे"।

इसके बाद अल्लाह तआला एक और आसानी बयान करते हैं कि अगर किसी से भूल-चूक में यह बात निकल जाए, यानी किसी को गोद लेकर उसे बेटा कह बैठे, तो उस पर कोई गुनाह नहीं है। अल्लाह ने भूल और गलती को माफ कर दिया है। लेकिन अगर कोई जानबूझकर, इरादे से किसी को उसके असली बाप के अलावा किसी और की तरफ़ निस्बत करे, तो यह बड़ा गुनाह है और इस पर पकड़ होगी। अल्लाह बड़ा क्षमाशील और दयावान है, वह अपने बंदों की भूलों को माफ कर देता है और तौबा करने वालों पर रहम फरमाता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सच्चाई और न्याय पर आधारित है। अल्लाह ने हर इंसान का असली रिश्ता और नसब महफूज़ रखा है, ताकि समाज में कोई उलझन या धोखा न हो। साथ ही, इस्लाम में गोद लेने (पालन-पोषण) का बहुत बड़ा सवाब है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि असली रिश्तों को मिटा दिया जाए। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें सच्चाई पर चलना चाहिए, भले ही वह हमारी अपनी इच्छाओं के खिलाफ हो। अल्लाह ने हम पर रहम करते हुए भूल-चूक को माफ कर दिया है, जो उसकी असीम दया और क्षमा का प्रमाण है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इस रहमत का शुक्र अदा करें और अपने जीवन में सच्चाई, न्याय और इस्लामी भाईचारे को अपनाएँ। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी बताई हुई राह पर चलते हैं और अपनी गलतियों से तौबा करते हैं।



📜 आयत 3-7 — अल-अहज़ाब

3وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
और खुदा ही पर भरोसा रखो और खुदा ही कारसाजी के लिए काफी है
4مَّا جَعَلَ اللَّهُ لِرَجُلٍ مِّن قَلْبَيْنِ فِي جَوْفِهِ ۚ وَمَا جَعَلَ أَزْوَاجَكُمُ اللَّائِي تُظَاهِرُونَ مِنْهُنَّ أُمَّهَاتِكُمْ ۚ وَمَا جَعَلَ أَدْعِيَاءَكُمْ أَبْنَاءَكُمْ ۚ ذَٰلِكُمْ قَوْلُكُم بِأَفْوَاهِكُمْ ۖ وَاللَّهُ يَقُولُ الْحَقَّ وَهُوَ يَهْدِي السَّبِيلَ
ख़ुदा ने किसी आदमी के सीने में दो दिल नहीं पैदा किये कि (एक ही वक्त दो इरादे कर सके) और न उसने तुम्हारी बीवियों को जिन से तुम जेहार करते हो तुम्हारी माएँ बना दी और न उसने तुम्हारे लिये पालकों को तुम्हारे बेटे बना दिये। ये तो फ़क़त तुम्हारी मुँह बोली बात (और ज़ुबानी जमा खर्च) है और (चाहे किसी को बुरी लगे या अच्छी) खुदा तो सच्ची कहता है और सीधी राह दिखाता है।
5ادْعُوهُمْ لِآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِندَ اللَّهِ ۚ فَإِن لَّمْ تَعْلَمُوا آبَاءَهُمْ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ وَمَوَالِيكُمْ ۚ وَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ فِيمَا أَخْطَأْتُم بِهِ وَلَٰكِن مَّا تَعَمَّدَتْ قُلُوبُكُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
लिये पालकों का उनके (असली) बापों के नाम से पुकारा करो यही खुदा के नज़दीक बहुत ठीक है हाँ अगर तुम लोग उनके असली बापों को न जानते हो तो तुम्हारे दीनी भाई और दोस्त हैं (उन्हें भाई या दोस्त कहकर पुकारा करो) और हाँ इसमें भूल चूक जाओ तो अलबत्ता उसका तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है मगर जब तुम दिल से जानबूझ कर करो (तो ज़रूर गुनाह है) और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है।
6النَّبِيُّ أَوْلَىٰ بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَأَزْوَاجُهُ أُمَّهَاتُهُمْ ۗ وَأُولُو الْأَرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَىٰ بِبَعْضٍ فِي كِتَابِ اللَّهِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُهَاجِرِينَ إِلَّا أَن تَفْعَلُوا إِلَىٰ أَوْلِيَائِكُم مَّعْرُوفًا ۚ كَانَ ذَٰلِكَ فِي الْكِتَابِ مَسْطُورًا
नबी तो मोमिनीन से खुद उनकी जानों से भी बढ़कर हक़ रखते हैं (क्योंकि वह गोया उम्मत के मेहरबान बाप हैं) और उनकी बीवियाँ (गोया) उनकी माएँ हैं और मोमिनीन व मुहाजिरीन में से (जो लोग बाहम) क़राबतदार हैं। किताबें खुदा की रूह से (ग़ैरों की निस्बत) एक दूसरे के (तर्के के) ज्यादा हक़दार हैं मगर (जब) तुम अपने दोस्तों के साथ सुलूक करना चाहो (तो दूसरी बात है) ये तो किताबे (खुदा) में लिखा हुआ (मौजूद) है
7وَإِذْ أَخَذْنَا مِنَ النَّبِيِّينَ مِيثَاقَهُمْ وَمِنكَ وَمِن نُّوحٍ وَإِبْرَاهِيمَ وَمُوسَىٰ وَعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ ۖ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने और पैग़म्बरों से और ख़ास तुमसे और नूह और इबराहीम और मूसा और मरियम के बेटे ईसा से एहदो पैमाने लिया और उन लोगों से हमने सख्त एहद लिया था
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 5

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Tuesday, August 18, 2026

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