अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَقْسَطُ: सबसे अधिक न्यायपूर्ण और उचित।
- مَوَالِيكُمْ: तुम्हारे स्वामी (आज़ाद किए गए ग़ुलाम) या तुम्हारे सहायक और मित्र।
- جُنَاحٌ: पाप, गुनाह या दोष।
- أَخْطَأْتُمْ: भूल से कोई गलती कर बैठना।
- تَعَمَّدَتْ: जानबूझकर इरादे से किया जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक और इस्लामी नियम को सिखाती है। इस्लाम से पहले के ज़माने में एक रिवाज था कि लोग किसी को गोद ले लेते थे और उसे अपने ही बेटे की तरह पुकारते थे, यहाँ तक कि उसका नाम भी अपने नाम के साथ जोड़ लेते थे। अल्लाह ने इस आयत में स्पष्ट कर दिया कि किसी को गोद लेने का मतलब यह नहीं है कि उसका असली नसब (वंश) मिट जाए। हर इंसान को उसके असली बाप की तरफ़ निस्बत करके पुकारा जाना चाहिए। यही अल्लाह के यहाँ सबसे अधिक न्यायपूर्ण और सच्चा तरीका है।
अल्लाह फ़रमाता है कि जिस शख्स को तुम गोद लेते हो, उसे उसके असली बाप की तरफ़ मंसूब करके बुलाओ। यह अल्लाह के नज़दीक सबसे ज़्यादा अदल और इंसाफ़ वाला काम है। अगर तुम्हें उसके असली बाप का पता न हो, तो उसे अपना दीनी भाई या अपना मित्र (मौला) कहकर पुकारो, क्योंकि इस्लामी भाईचारा ही सबसे बड़ा रिश्ता है। यानी उसे "ऐ मेरे दीनी भाई" या "ऐ मेरे दोस्त" कहकर संबोधित करो, न कि "ऐ मेरे बेटे"।
इसके बाद अल्लाह तआला एक और आसानी बयान करते हैं कि अगर किसी से भूल-चूक में यह बात निकल जाए, यानी किसी को गोद लेकर उसे बेटा कह बैठे, तो उस पर कोई गुनाह नहीं है। अल्लाह ने भूल और गलती को माफ कर दिया है। लेकिन अगर कोई जानबूझकर, इरादे से किसी को उसके असली बाप के अलावा किसी और की तरफ़ निस्बत करे, तो यह बड़ा गुनाह है और इस पर पकड़ होगी। अल्लाह बड़ा क्षमाशील और दयावान है, वह अपने बंदों की भूलों को माफ कर देता है और तौबा करने वालों पर रहम फरमाता है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सच्चाई और न्याय पर आधारित है। अल्लाह ने हर इंसान का असली रिश्ता और नसब महफूज़ रखा है, ताकि समाज में कोई उलझन या धोखा न हो। साथ ही, इस्लाम में गोद लेने (पालन-पोषण) का बहुत बड़ा सवाब है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि असली रिश्तों को मिटा दिया जाए। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें सच्चाई पर चलना चाहिए, भले ही वह हमारी अपनी इच्छाओं के खिलाफ हो। अल्लाह ने हम पर रहम करते हुए भूल-चूक को माफ कर दिया है, जो उसकी असीम दया और क्षमा का प्रमाण है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इस रहमत का शुक्र अदा करें और अपने जीवन में सच्चाई, न्याय और इस्लामी भाईचारे को अपनाएँ। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी बताई हुई राह पर चलते हैं और अपनी गलतियों से तौबा करते हैं।
📜 आयत 3-7 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 5
सूरा अल-अहज़ाब आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लिये पालकों का उनके (असली) बापों के नाम से पुकारा…सूरा आयत 5/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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