अल-अहज़ाब · 58/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَالَّذِينَ يُؤْذُونَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ بِغَيْرِ مَا اكْتَسَبُوا فَقَدِ احْتَمَلُوا بُهْتَانًا وَإِثْمًا مُّبِينًا ۝٥٨
Wallazeena yu`zoonal mu`mineena almu`manaati bighairi mak tasaboo faqadih tamaloo buhtaananw wa ismam mubeenaa
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतों को बगैर कुछ किए द्दरे (तोहमत देकर) अज़ीयत देते हैं तो वह एक बोहतान और सरीह गुनाह का बोझ (अपनी गर्दन पर) उठाते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُؤْذُونَ – सताते हैं, तकलीफ़ पहुँचाते हैं
  • بِغَيْرِ مَا اكْتَسَبُوا – बिना किसी ऐसे काम के जो उन्होंने किया हो (बिना किसी गुनाह के)
  • احْتَمَلُوا – उठा लिया, अपने ऊपर ले लिया
  • بُهْتَانًا – झूठा आरोप, बड़ा कलंक
  • إِثْمًا مُّبِينًا – स्पष्ट और खुला गुनाह

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मोमिन पुरुषों और मोमिन औरतों को बिना किसी गुनाह के, बिना किसी ऐसे काम के जो उन्होंने किया हो, सताते हैं — चाहे वह सताना ज़ुबान से हो (जैसे बुरा भला कहना, ताना मारना, झूठी तोहमत लगाना) या किसी और तरीक़े से।

ऐसे लोगों ने अपने ऊपर बहुत बड़ा बोझ ले लिया है — उन्होंने झूठ और बदतरीन कलंक को अपने ज़िम्मे उठा लिया है, और यह एक ऐसा गुनाह है जो बिल्कुल साफ़ और ज़ाहिर है। इसकी बुराई किसी पर छिपी नहीं है।

यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब मुनाफ़िक़ों (मुनाफ़िक़ों) ने हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पर झूठा इल्ज़ाम लगाया था — यानी "हदीस-ए-इफ़्क" (झूठे इल्ज़ाम का वाक़िया) — और उन्होंने उन पाक दामन मोमिनों को तकलीफ़ दी जो बिल्कुल बेगुनाह थे। अल्लाह ने इस आयत में ऐसे लोगों को सख़्त तनबीह की।


दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इस्लाम में दूसरों की इज़्ज़त और आबरू की कितनी बड़ी अहमियत है। एक मोमिन की इज़्ज़त इतनी पाक और महफ़ूज़ है कि उसे छूना भी गुनाह है। अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया कि जो लोग बेगुनाह मोमिनों को सताते हैं, वह दरअसल अपने लिए अल्लाह का ग़ज़ब और आख़िरत में अज़ाब ख़रीद रहे हैं।

हमें चाहिए कि अपनी ज़ुबान को काबू में रखें, किसी के बारे में बुरा गुमान न करें, किसी पर झूठी तोहमत न लगाएँ, और न ही किसी को तकलीफ़ पहुँचाने वाली बात कहें। याद रखें — जिस तरह हम अपनी इज़्ज़त को प्यार करते हैं, उसी तरह दूसरे मोमिनों की इज़्ज़त भी अल्लाह के नज़दीक उतनी ही पाक और महत्वपूर्ण है। जो शख्स इस हद को पार करता है, वह अल्लाह की रहमत से दूर हो जाता है और अपने लिए सिर्फ़ नुक़्सान ही कमाता है।

आओ हम सब इस आयत पर अमल करते हुए अपनी ज़ुबान को नेकी और अच्छाई के लिए इस्तेमाल करें, और दूसरों के साथ वैसा ही सलूक करें जैसा हम अपने लिए पसंद करते हैं। यही ईमान की निशानी है और यही रास्ता हमें अल्लाह की मुहब्बत और जन्नत तक पहुँचाएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 56-60 — अल-अहज़ाब

56إِنَّ اللَّهَ وَمَلَائِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى النَّبِيِّ ۚ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا صَلُّوا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا تَسْلِيمًا
इसमें भी शक नहीं कि खुदा और उसके फरिश्ते पैग़म्बर (और उनकी आल) पर दुरूद भेजते हैं तो ऐ ईमानदारों तुम भी दुरूद भेजते रहो और बराबर सलाम करते रहो
57إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا مُّهِينًا
बेशक जो लोग खुदा को और उसके रसूल को अज़ीयत देते हैं उन पर खुदा ने दुनिया और आखेरत (दोनों) में लानत की है और उनके लिए रूसवाई का अज़ाब तैयार कर रखा है
58وَالَّذِينَ يُؤْذُونَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ بِغَيْرِ مَا اكْتَسَبُوا فَقَدِ احْتَمَلُوا بُهْتَانًا وَإِثْمًا مُّبِينًا
और जो लोग ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतों को बगैर कुछ किए द्दरे (तोहमत देकर) अज़ीयत देते हैं तो वह एक बोहतान और सरीह गुनाह का बोझ (अपनी गर्दन पर) उठाते हैं
59يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ وَبَنَاتِكَ وَنِسَاءِ الْمُؤْمِنِينَ يُدْنِينَ عَلَيْهِنَّ مِن جَلَابِيبِهِنَّ ۚ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰ أَن يُعْرَفْنَ فَلَا يُؤْذَيْنَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
ऐ नबी अपनी बीवियों और अपनी लड़कियों और मोमिनीन की औरतों से कह दो कि (बाहर निकलते वक्त) अपने (चेहरों और गर्दनों) पर अपनी चादरों का घूंघट लटका लिया करें ये उनकी (शराफ़त की) पहचान के वास्ते बहुत मुनासिब है तो उन्हें कोई छेड़ेगा नहीं और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
60۞ لَّئِن لَّمْ يَنتَهِ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْمُرْجِفُونَ فِي الْمَدِينَةِ لَنُغْرِيَنَّكَ بِهِمْ ثُمَّ لَا يُجَاوِرُونَكَ فِيهَا إِلَّا قَلِيلًا
ऐ रसूल मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ़्र का) मर्ज़ है और जो लोग मदीने में बुरी ख़बरें उड़ाया करते हैं- अगर ये लोग (अपनी शरारतों से) बाज़ न आएंगें तो हम तुम ही को (एक न एक दिन) उन पर मुसल्लत कर देगें फिर वह तुम्हारे पड़ोस में चन्द रोज़ों के सिवा ठहरने (ही) न पाएँगे
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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मदनीRevelation
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 58

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Tuesday, August 18, 2026

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