अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُؤْذُونَ – सताते हैं, तकलीफ़ पहुँचाते हैं
- بِغَيْرِ مَا اكْتَسَبُوا – बिना किसी ऐसे काम के जो उन्होंने किया हो (बिना किसी गुनाह के)
- احْتَمَلُوا – उठा लिया, अपने ऊपर ले लिया
- بُهْتَانًا – झूठा आरोप, बड़ा कलंक
- إِثْمًا مُّبِينًا – स्पष्ट और खुला गुनाह
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मोमिन पुरुषों और मोमिन औरतों को बिना किसी गुनाह के, बिना किसी ऐसे काम के जो उन्होंने किया हो, सताते हैं — चाहे वह सताना ज़ुबान से हो (जैसे बुरा भला कहना, ताना मारना, झूठी तोहमत लगाना) या किसी और तरीक़े से।
ऐसे लोगों ने अपने ऊपर बहुत बड़ा बोझ ले लिया है — उन्होंने झूठ और बदतरीन कलंक को अपने ज़िम्मे उठा लिया है, और यह एक ऐसा गुनाह है जो बिल्कुल साफ़ और ज़ाहिर है। इसकी बुराई किसी पर छिपी नहीं है।
यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब मुनाफ़िक़ों (मुनाफ़िक़ों) ने हज़रत आइशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पर झूठा इल्ज़ाम लगाया था — यानी "हदीस-ए-इफ़्क" (झूठे इल्ज़ाम का वाक़िया) — और उन्होंने उन पाक दामन मोमिनों को तकलीफ़ दी जो बिल्कुल बेगुनाह थे। अल्लाह ने इस आयत में ऐसे लोगों को सख़्त तनबीह की।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इस्लाम में दूसरों की इज़्ज़त और आबरू की कितनी बड़ी अहमियत है। एक मोमिन की इज़्ज़त इतनी पाक और महफ़ूज़ है कि उसे छूना भी गुनाह है। अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया कि जो लोग बेगुनाह मोमिनों को सताते हैं, वह दरअसल अपने लिए अल्लाह का ग़ज़ब और आख़िरत में अज़ाब ख़रीद रहे हैं।
हमें चाहिए कि अपनी ज़ुबान को काबू में रखें, किसी के बारे में बुरा गुमान न करें, किसी पर झूठी तोहमत न लगाएँ, और न ही किसी को तकलीफ़ पहुँचाने वाली बात कहें। याद रखें — जिस तरह हम अपनी इज़्ज़त को प्यार करते हैं, उसी तरह दूसरे मोमिनों की इज़्ज़त भी अल्लाह के नज़दीक उतनी ही पाक और महत्वपूर्ण है। जो शख्स इस हद को पार करता है, वह अल्लाह की रहमत से दूर हो जाता है और अपने लिए सिर्फ़ नुक़्सान ही कमाता है।
आओ हम सब इस आयत पर अमल करते हुए अपनी ज़ुबान को नेकी और अच्छाई के लिए इस्तेमाल करें, और दूसरों के साथ वैसा ही सलूक करें जैसा हम अपने लिए पसंद करते हैं। यही ईमान की निशानी है और यही रास्ता हमें अल्लाह की मुहब्बत और जन्नत तक पहुँचाएगा।
📜 आयत 56-60 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 58
सूरा अल-अहज़ाब आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतों को बगैर…सूरा आयत 58/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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