अल-अहज़ाब · 59/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ وَبَنَاتِكَ وَنِسَاءِ الْمُؤْمِنِينَ يُدْنِينَ عَلَيْهِنَّ مِن جَلَابِيبِهِنَّ ۚ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰ أَن يُعْرَفْنَ فَلَا يُؤْذَيْنَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ۝٥٩
Yaaa aiyuhan Nabiyyu qul li azwaajika wa banaatika wa nisaaa`il mu`mineena yudneena `alaihinna min jalaabee bihinn; zaalika adnaaa ai yu`rafna falaa yu`zain; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ नबी अपनी बीवियों और अपनी लड़कियों और मोमिनीन की औरतों से कह दो कि (बाहर निकलते वक्त) अपने (चेहरों और गर्दनों) पर अपनी चादरों का घूंघट लटका लिया करें ये उनकी (शराफ़त की) पहचान के वास्ते बहुत मुनासिब है तो उन्हें कोई छेड़ेगा नहीं और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَلَابِيبِهِنَّ (जलाबीब): "जिल्बाब" का बहुवचन है, जिसका अर्थ है चादर या ऐसा वस्त्र जो औरत अपने सिर और शरीर को ढकने के लिए ऊपर से पहनती है।
  • يُدْنِينَ (युद्नीन): अपने ऊपर लपेटना, लटकाना या ढक लेना।
  • أَدْنَى (अदना): अधिक निकट, अधिक उपयुक्त, अधिक उचित।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपनी पत्नियों, अपनी बेटियों और सभी मोमिन औरतों से कह दें कि वे अपनी चादरें (जलाबीब) अपने ऊपर लटका लें, यानी अपने सिर, चेहरे और पूरे शरीर को अच्छी तरह ढक लें, ताकि उनका कोई हिस्सा गैर-महरम (बाहरी पुरुषों) के सामने न खुल सके। यह आदेश इसलिए दिया गया ताकि मुस्लिम औरतें अपनी पहचान और इज़्ज़त के साथ समाज में रहें।

यह बात कि वे अपनी चादरें ढक लें, इस बात को अधिक निकट बनाती है कि उन्हें पहचान लिया जाए कि वे आज़ाद और पाकदामन औरतें हैं, इसलिए कोई शरारती या बुरी नीयत वाला व्यक्ति उन्हें छेड़ने या उन्हें तंग करने की जुर्रत न करे। जब एक औरत अपनी इस्लामी पोशाक के साथ सड़क पर निकलती है, तो उसकी शान और गरिमा साफ़ झलकती है, और समाज में उसके लिए सम्मान और सुरक्षा का माहौल बनता है।

यह आदेश सिर्फ़ उस समय के लिए नहीं था, बल्कि यह हर समय और हर जगह के लिए है। इस्लाम ने औरत को इज़्ज़त दी है और उसे समाज में एक मुक़ाम दिया है। हिजाब और पर्दा इसी इज़्ज़त और हिफ़ाज़त का ज़रिया है। यह कोई कैद नहीं, बल्कि एक रहमत है, जो औरत को बुरी नज़रों और बुरे हाथों से महफ़ूज़ रखती है।

अल्लाह ने यह भी फ़रमाया कि वह बड़ा क्षमाशील और दयावान है। यानी जिन लोगों से पहले इस मामले में कोई कमी हुई हो, वे तौबा कर लें, तो अल्लाह उन्हें माफ़ कर देगा। अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है, वह अपने बंदों की कमज़ोरियों को जानता है और उन पर रहम फ़रमाता है। यह आदेश एक नई ज़िंदगी का आग़ाज़ है — जो औरतें चाहें, वे आज से ही इस पाक राह पर चलकर अल्लाह की रहमत और मोहब्बत की हक़दार बनें।

याद रखिए, हिजाब सिर्फ़ कपड़ा नहीं, बल्कि एक पहचान है — पाकदामनी की, शर्म और हया की, और अल्लाह के हुक्म की इत्तिआ' की। यह औरत को गुलाम नहीं बनाता, बल्कि उसे आज़ाद करता है — उसे उसकी इज़्ज़त और इज़्ज़त के साथ जीने का हक़ देता है।



📜 आयत 57-61 — अल-अहज़ाब

57إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا مُّهِينًا
बेशक जो लोग खुदा को और उसके रसूल को अज़ीयत देते हैं उन पर खुदा ने दुनिया और आखेरत (दोनों) में लानत की है और उनके लिए रूसवाई का अज़ाब तैयार कर रखा है
58وَالَّذِينَ يُؤْذُونَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ بِغَيْرِ مَا اكْتَسَبُوا فَقَدِ احْتَمَلُوا بُهْتَانًا وَإِثْمًا مُّبِينًا
और जो लोग ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतों को बगैर कुछ किए द्दरे (तोहमत देकर) अज़ीयत देते हैं तो वह एक बोहतान और सरीह गुनाह का बोझ (अपनी गर्दन पर) उठाते हैं
59يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ وَبَنَاتِكَ وَنِسَاءِ الْمُؤْمِنِينَ يُدْنِينَ عَلَيْهِنَّ مِن جَلَابِيبِهِنَّ ۚ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰ أَن يُعْرَفْنَ فَلَا يُؤْذَيْنَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
ऐ नबी अपनी बीवियों और अपनी लड़कियों और मोमिनीन की औरतों से कह दो कि (बाहर निकलते वक्त) अपने (चेहरों और गर्दनों) पर अपनी चादरों का घूंघट लटका लिया करें ये उनकी (शराफ़त की) पहचान के वास्ते बहुत मुनासिब है तो उन्हें कोई छेड़ेगा नहीं और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
60۞ لَّئِن لَّمْ يَنتَهِ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْمُرْجِفُونَ فِي الْمَدِينَةِ لَنُغْرِيَنَّكَ بِهِمْ ثُمَّ لَا يُجَاوِرُونَكَ فِيهَا إِلَّا قَلِيلًا
ऐ रसूल मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ़्र का) मर्ज़ है और जो लोग मदीने में बुरी ख़बरें उड़ाया करते हैं- अगर ये लोग (अपनी शरारतों से) बाज़ न आएंगें तो हम तुम ही को (एक न एक दिन) उन पर मुसल्लत कर देगें फिर वह तुम्हारे पड़ोस में चन्द रोज़ों के सिवा ठहरने (ही) न पाएँगे
61مَّلْعُونِينَ ۖ أَيْنَمَا ثُقِفُوا أُخِذُوا وَقُتِّلُوا تَقْتِيلًا
लानत के मारे जहाँ कहीं हत्थे चढ़े पकड़े गए और फिर बुरी तरह मार डाले गए
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 59

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Tuesday, August 18, 2026

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