अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُؤْذُونَ – दुःख पहुँचाना, तकलीफ देना
- لَعَنَهُمُ – उन्हें रहमत से दूर कर दिया, फिटकारा
- مُهِينًا – अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला
तफसीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को तकलीफ पहुँचाते हैं। अल्लाह को तकलीफ पहुँचाने का मतलब है उसकी नाफरमानी करना, उसके हुक्मों की अवहेलना करना, उसके साथ शिर्क करना, और उसके बारे में ऐसी बातें कहना जो उसकी शान के खिलाफ हों। जहाँ तक रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का सवाल है, उन्हें तकलीफ पहुँचाने का मतलब है उन्हें झुठलाना, उनका मज़ाक उड़ाना, उनके बारे में बुरी बातें कहना, या उनके साथ बुरा व्यवहार करना।
अल्लाह तआला फरमाते हैं कि ऐसे लोगों पर दुनिया और आखिरत दोनों में लानत है। यानी अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से दूर कर दिया है और उन्हें हर भलाई से महरूम कर दिया है। दुनिया में उन्हें ज़िल्लत और रुसवाई का सामना करना पड़ता है, और आखिरत में उनके लिए ऐसा अज़ाब तैयार किया गया है जो उन्हें बुरी तरह ज़लील और अपमानित करेगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मुहब्बत और इज़्ज़त हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। जो लोग उन्हें तकलीफ देते हैं, वह अल्लाह की नज़र में सबसे बुरे लोग हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अक़वाल (बातों) और अफ़आल (कामों) में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अदब और ताज़ीम का पूरा ख्याल रखें।
याद रखिए, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मुहब्बत ईमान की निशानी है। जो उनसे मुहब्बत करता है, अल्लाह उससे मुहब्बत करता है। और जो उन्हें तकलीफ देता है, वह अल्लाह की लानत का हक़दार बनता है। आइए हम अपनी ज़िंदगी में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को अपनाएँ, उनके बताए हुए रास्ते पर चलें, और उनके अदब को अपने दिलों में बसाएँ। यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है।
📜 आयत 55-59 — अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 57
सूरा अल-अहज़ाब आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग खुदा को और उसके रसूल को अज़ीयत…सूरा आयत 57/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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