अल-अहज़ाब · 57/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا مُّهِينًا ۝٥٧
Innal lazeena yu`zoonal laaha wa Rasoolahoo la`anahumul laahu fid dunyaa wal Aakhirati wa a`adda lahum `azaabam muheenaa
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग खुदा को और उसके रसूल को अज़ीयत देते हैं उन पर खुदा ने दुनिया और आखेरत (दोनों) में लानत की है और उनके लिए रूसवाई का अज़ाब तैयार कर रखा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُؤْذُونَ – दुःख पहुँचाना, तकलीफ देना
  • لَعَنَهُمُ – उन्हें रहमत से दूर कर दिया, फिटकारा
  • مُهِينًا – अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला

तफसीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को तकलीफ पहुँचाते हैं। अल्लाह को तकलीफ पहुँचाने का मतलब है उसकी नाफरमानी करना, उसके हुक्मों की अवहेलना करना, उसके साथ शिर्क करना, और उसके बारे में ऐसी बातें कहना जो उसकी शान के खिलाफ हों। जहाँ तक रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का सवाल है, उन्हें तकलीफ पहुँचाने का मतलब है उन्हें झुठलाना, उनका मज़ाक उड़ाना, उनके बारे में बुरी बातें कहना, या उनके साथ बुरा व्यवहार करना।

अल्लाह तआला फरमाते हैं कि ऐसे लोगों पर दुनिया और आखिरत दोनों में लानत है। यानी अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से दूर कर दिया है और उन्हें हर भलाई से महरूम कर दिया है। दुनिया में उन्हें ज़िल्लत और रुसवाई का सामना करना पड़ता है, और आखिरत में उनके लिए ऐसा अज़ाब तैयार किया गया है जो उन्हें बुरी तरह ज़लील और अपमानित करेगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मुहब्बत और इज़्ज़त हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। जो लोग उन्हें तकलीफ देते हैं, वह अल्लाह की नज़र में सबसे बुरे लोग हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अक़वाल (बातों) और अफ़आल (कामों) में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अदब और ताज़ीम का पूरा ख्याल रखें।

याद रखिए, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मुहब्बत ईमान की निशानी है। जो उनसे मुहब्बत करता है, अल्लाह उससे मुहब्बत करता है। और जो उन्हें तकलीफ देता है, वह अल्लाह की लानत का हक़दार बनता है। आइए हम अपनी ज़िंदगी में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को अपनाएँ, उनके बताए हुए रास्ते पर चलें, और उनके अदब को अपने दिलों में बसाएँ। यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है।



📜 आयत 55-59 — सूरा अल-अहज़ाब

55لَّا جُنَاحَ عَلَيْهِنَّ فِي آبَائِهِنَّ وَلَا أَبْنَائِهِنَّ وَلَا إِخْوَانِهِنَّ وَلَا أَبْنَاءِ إِخْوَانِهِنَّ وَلَا أَبْنَاءِ أَخَوَاتِهِنَّ وَلَا نِسَائِهِنَّ وَلَا مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُنَّ ۗ وَاتَّقِينَ اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدًا
औरतों पर न अपने बाप दादाओं (के सामने होने) में कुछ गुनाह है और न अपने बेटों के और न अपने भाईयों के और न अपने भतीजों के और अपने भांजों के और न अपनी (क़िस्म कि) औरतों के और न अपनी लौंडियों के सामने होने में कुछ गुनाह है (ऐ पैग़म्बर की बीबियों) तुम लोग खुदा से डरती रहो इसमें कोई शक ही नहीं की खुदा (तुम्हारे आमाल में) हर चीज़ से वाक़िफ़ है
56إِنَّ اللَّهَ وَمَلَائِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى النَّبِيِّ ۚ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا صَلُّوا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا تَسْلِيمًا
इसमें भी शक नहीं कि खुदा और उसके फरिश्ते पैग़म्बर (और उनकी आल) पर दुरूद भेजते हैं तो ऐ ईमानदारों तुम भी दुरूद भेजते रहो और बराबर सलाम करते रहो
57إِنَّ الَّذِينَ يُؤْذُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَعَنَهُمُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًا مُّهِينًا
बेशक जो लोग खुदा को और उसके रसूल को अज़ीयत देते हैं उन पर खुदा ने दुनिया और आखेरत (दोनों) में लानत की है और उनके लिए रूसवाई का अज़ाब तैयार कर रखा है
58وَالَّذِينَ يُؤْذُونَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ بِغَيْرِ مَا اكْتَسَبُوا فَقَدِ احْتَمَلُوا بُهْتَانًا وَإِثْمًا مُّبِينًا
और जो लोग ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतों को बगैर कुछ किए द्दरे (तोहमत देकर) अज़ीयत देते हैं तो वह एक बोहतान और सरीह गुनाह का बोझ (अपनी गर्दन पर) उठाते हैं
59يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ وَبَنَاتِكَ وَنِسَاءِ الْمُؤْمِنِينَ يُدْنِينَ عَلَيْهِنَّ مِن جَلَابِيبِهِنَّ ۚ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰ أَن يُعْرَفْنَ فَلَا يُؤْذَيْنَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
ऐ नबी अपनी बीवियों और अपनी लड़कियों और मोमिनीन की औरतों से कह दो कि (बाहर निकलते वक्त) अपने (चेहरों और गर्दनों) पर अपनी चादरों का घूंघट लटका लिया करें ये उनकी (शराफ़त की) पहचान के वास्ते बहुत मुनासिब है तो उन्हें कोई छेड़ेगा नहीं और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
57आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 57

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Thursday, October 1, 2026

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