अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَرُونِي: मुझे दिखाओ, मेरे सामने प्रस्तुत करो (प्रमाण और दलील के साथ)।
- أَلْحَقْتُم: तुमने जोड़ा, शामिल किया।
- شُرَكَاء: साझीदार, भागीदार।
- كَلَّا: हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है।
- الْعَزِيزُ: वह शक्तिशाली जिसे कोई हरा न सके, जो सब पर ग़ालिब हो।
- الْحَكِيمُ: वह जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और हिकमत (समझदारी) से काम करता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "मुझे दिखाओ और साबित करके बताओ कि वे कौन हैं जिन्हें तुमने अल्लाह के साथ साझीदार बनाया है? क्या उन्होंने कुछ पैदा किया है? क्या वे कोई रिज़्क़ देते हैं? क्या वे किसी चीज़ के मालिक हैं?"
यह एक चुनौती है — अगर सच में वे साझीदार हैं, तो उनकी कोई न कोई खूबी, कोई क्षमता, कोई शक्ति तो होनी चाहिए जो उन्हें पूजा के योग्य बनाए। लेकिन हक़ीक़त यह है कि ये सब मूर्तियाँ, देवता, या पूज्य व्यक्ति — सब कुछ असमर्थ हैं। वे न किसी को फायदा पहुँचा सकते हैं, न नुकसान। वे न जान बना सकते हैं, न मार सकते हैं, न जिला सकते हैं।
फिर अल्लाह तआला खुद इस ग़लतफ़हमी को रद्द करते हुए फ़रमाता है: "कल्ला" — हरगिज़ नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है जैसा तुम समझते हो। यह बात सरासर झूठ और बुनियादी भूल है।
असल हक़ीक़त यह है कि अल्लाह ही एकमात्र पूजा के योग्य है। वही अल-अज़ीज़ है — वह शक्तिशाली जिसकी शक्ति के आगे हर ताकत बेबस है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेने में भी पूर्ण सक्षम है। और वही अल-हकीम है — वह जो हर बात में, हर काम में, हर फ़ैसले में गहरी समझदारी और हिकमत से काम करता है। उसकी तदबीर (योजना) में कोई कमी नहीं, उसके हुक्म में कोई बेवजह बात नहीं।
जब वह इतना शक्तिशाली और इतना हकीम है, तो क्या उसे किसी साझीदार की ज़रूरत है? क्या उसकी सल्तनत में कोई और हिस्सेदार हो सकता है? हरगिज़ नहीं! यह तो उसकी शान के खिलाफ है।
दावत और नसीहत (उपदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही असली सच्चाई है। अल्लाह ने हमें बनाया, हमें रिज़्क़ दिया, हमें ज़िंदगी दी — तो क्या हमें उसी की इबादत नहीं करनी चाहिए? क्या हम उसी के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए?
याद रखिए! जो लोग अल्लाह के साथ किसी और को शरीक करते हैं, वे दरअसल अपनी ही नुकसान करते हैं। क्योंकि वे उन चीज़ों से मदद माँगते हैं जो खुद बेबस हैं — वे न सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न किसी काम आ सकती हैं।
अल्लाह तआला हम पर बहुत मेहरबान है कि उसने हमें सीधा रास्ता दिखाया। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल में सिर्फ अल्लाह को याद करें, सिर्फ उसी से मदद माँगें, और उसी की राह पर चलें। यही हमारी कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
अल्लाह हमें सच्ची तौहीद पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 25-29 — सबा
अनुवाद — सबा 27
सूरा सबा आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल तुम कह दो कि जिनको तुम ने खुदा…सूरा आयत 27/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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