सबा · 28/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا كَافَّةً لِّلنَّاسِ بَشِيرًا وَنَذِيرًا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ۝٢٨
Wa maaa arsalnaaka illaa kaaffatal linnaasi basheeranw wa nazeeranw wa laakinna aksaran naasi laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हमने तुमको तमाम (दुनिया के) लोगों के लिए (नेकों को बेहश्त की) खुशखबरी देने वाला और (बन्दों को अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) बनाकर भेजा मगर बहुतेरे लोग (इतना भी) नहीं जानते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَافَّةً: सभी लोगों के लिए, आम तौर पर, पूरी मानवजाति के लिए।
  • بَشِيرًا: खुशखबरी सुनाने वाला (जन्नत की खुशखबरी)।
  • نَذِيرًا: डराने वाला (आग और अज़ाब से आगाह करने वाला)।

तफसीर:

ऐ नबी! अल्लाह ने आपको सिर्फ़ किसी एक क़ौम, किसी एक ज़माने या किसी एक इलाक़े के लिए नहीं भेजा, बल्कि आपको पूरी इंसानियत के लिए रहमत बनाकर भेजा है। आपकी रिसालत आम है — हर उस इंसान के लिए जो क़यामत तक आएगा, चाहे वह अरब का हो या अजमी, गोरा हो या काला, पूरब का हो या पश्चिम का। आपका मक़सद दो चीज़ें हैं: एक यह कि जो लोग ईमान लाएँ और नेक अमल करें, उन्हें जन्नत की खुशखबरी सुनाएँ, और दूसरे यह कि जो लोग कुफ़्र और गुनाह पर ज़िद करें, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराएँ। यानी आपकी दावत में खुशखबरी भी है और डर भी, ताकि लोग अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखें और उसके अज़ाब से बचें।

लेकिन अफ़सोस! अक्सर लोग इस हक़ीक़त को नहीं समझते। उनकी नादानी और जहालत की वजह से वे आपकी बात नहीं मानते और आपको झुठलाते हैं। अगर वे जान लेते कि यह पैग़ाम सच्चाई पर आधारित है और इसमें उन्हीं की भलाई है, तो वे कभी आपका विरोध न करते। यह उनकी नासमझी है कि वे अपने भले को बुरा समझ रहे हैं और अपने नुक़्सान को भला।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम कोई जाती या क़ौमी धर्म नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अल्लाह की तरफ़ से आख़िरी पैग़ाम है। हर इंसान — चाहे वह किसी भी मुल्क, रंग या ज़बान का हो — इस पैग़ाम को सुनने और समझने का हक़दार है। और हम मुसलमानों की ज़िम्मेदारी है कि इस पैग़ाम को मुहब्बत और हिकमत के साथ दुनिया तक पहुँचाएँ। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अगर लोग हमारी बात न मानें तो निराश न हों, क्योंकि अल्लाह के रसूल के साथ भी अक्सर लोगों ने ऐसा ही किया। हमारा काम सिर्फ़ पहुँचाना है, हिदायत अल्लाह के हाथ में है। और जो लोग इस पैग़ाम को क़बूल कर लें, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो मुँह मोड़ें, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब — यह अल्लाह का बिल्कुल इंसाफ़ है।



📜 आयत 26-30 — सबा

26قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَهُوَ الْفَتَّاحُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि हमारा परवरदिगार (क़यामत में) हम सबको इकट्ठा करेगा फिर हमारे दरमियान (ठीक) फैसला कर देगा और वह तो ठीक-ठीक फैसला करने वाला वाक़िफकार है
27قُلْ أَرُونِيَ الَّذِينَ أَلْحَقْتُم بِهِ شُرَكَاءَ ۖ كَلَّا ۚ بَلْ هُوَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(ऐ रसूल तुम कह दो कि जिनको तुम ने खुदा का शरीक बनाकर) खुदा के साथ मिलाया है ज़रा उन्हें मुझे भी तो दिखा दो हरगिज़ (कोई शरीक नहीं) बल्कि खुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
28وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا كَافَّةً لِّلنَّاسِ بَشِيرًا وَنَذِيرًا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) हमने तुमको तमाम (दुनिया के) लोगों के लिए (नेकों को बेहश्त की) खुशखबरी देने वाला और (बन्दों को अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) बनाकर भेजा मगर बहुतेरे लोग (इतना भी) नहीं जानते
29وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और (उलटे) कहते हैं कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (आख़िर) ये क़यामत का वायदा कब पूरा होगा
30قُل لَّكُم مِّيعَادُ يَوْمٍ لَّا تَسْتَأْخِرُونَ عَنْهُ سَاعَةً وَلَا تَسْتَقْدِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि तुम लोगों के वास्ते एक ख़ास दिन की मीयाद मुक़र्रर है कि न तुम उससे एक घड़ी पीछे रह सकते हो और न आगे ही बड़ सकते हो
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अनुवाद — सबा 28

सूरा सबा आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) हमने तुमको तमाम (दुनिया के) लोगों के लिए…

सूरा आयत 28/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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