सबा · 26/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَهُوَ الْفَتَّاحُ الْعَلِيمُ ۝٢٦
Qul yajma`u bainanaa Rabbunaa summa yaftahu bainanaa bilhaqq; wa Huwal Fattaahul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि हमारा परवरदिगार (क़यामत में) हम सबको इकट्ठा करेगा फिर हमारे दरमियान (ठीक) फैसला कर देगा और वह तो ठीक-ठीक फैसला करने वाला वाक़िफकार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَجْمَعُ بَيْنَنَا: हमें एकत्र करेगा (यानी क़ियामत के दिन हम सबको इकट्ठा करेगा)
  • يَفْتَحُ بَيْنَنَا: हमारे बीच फ़ैसला करेगा (न्याय करेगा)
  • الْفَتَّاحُ: फ़ैसला करने वाला, न्यायाधीश (जो बंद मामलों को खोलकर सच्चाई उजागर कर दे)
  • الْعَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला (जिसके ज्ञान से कुछ भी छिपा नहीं)

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन इनकार करने वालों से कह दीजिए कि जिस दिन का हम वादा कर रहे हैं, वह दिन ज़रूर आने वाला है। उस दिन हमारा रब हम सबको — चाहे हम सच्चे हों या झूठे, मोमिन हों या काफ़िर — एक जगह इकट्ठा करेगा। फिर वह हमारे बीच पूरे न्याय के साथ फ़ैसला करेगा। वह फ़ैसला किसी के पक्ष में झुकाव या किसी के खिलाफ़ सख़्ती पर नहीं, बल्कि पूरी सच्चाई और अद्ल पर आधारित होगा।

वही सबसे बड़ा फ़ैसला करने वाला है — वह हर उस मामले को खोल देता है जो बंद हो, हर उस सच्चाई को उजागर कर देता है जो छिपी हो। और वह सब कुछ जानने वाला है — उसे मालूम है कि किसने सच्चाई पर चलकर हक़ का साथ दिया और किसने झूठ और बातिल को अपनाया। उसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं, न छोटी, न बड़ी, न ज़ाहिर, न पोशीदा।

यह आयत हमें बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी देती है — जो लोग इस दुनिया में ज़ुल्म करते हैं, सच्चाई को दबाते हैं और नाइंसाफ़ी फैलाते हैं, वे यह न समझें कि वे बच जाएँगे। उनका हिसाब ज़रूर होगा। और जो लोग सच्चाई पर हैं, उन्हें यक़ीन होना चाहिए कि अल्लाह का फ़ैसला उनके हक़ में होगा, चाहे दुनिया में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएँ। यही वह अद्ल है जो हर मोमिन के दिल को सुकून देता है और उसे सब्र और भरोसे पर क़ायम रखता है। अल्लाह हर उस मामले का फ़ैसला करने वाला है जो इंसानों की समझ से बाहर है, और वह अपने बंदों के हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है।



📜 आयत 24-28 — सूरा सबा

24۞ قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ وَإِنَّا أَوْ إِيَّاكُمْ لَعَلَىٰ هُدًى أَوْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो मुक़र्रिब फरिश्ते कहते हैं कि जो वाजिबी था (ऐ रसूल) तुम (इनसे) पूछो तो कि भला तुमको सारे आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है (वह क्या कहेंगे) तुम खुद कह दो कि खुदा और मैं या तुम (दोनों में से एक तो) ज़रूर राहे रास्त पर है (और दूसरा गुमराह) या वह सरीही गुमराही में पड़ा है (और दूसरा राहे रास्त पर)
25قُل لَّا تُسْأَلُونَ عَمَّا أَجْرَمْنَا وَلَا نُسْأَلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो न हमारे गुनाहों की तुमसे पूछ गछ होगी और न तुम्हारी कारस्तानियों की हम से बाज़ पुर्स
26قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَهُوَ الْفَتَّاحُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि हमारा परवरदिगार (क़यामत में) हम सबको इकट्ठा करेगा फिर हमारे दरमियान (ठीक) फैसला कर देगा और वह तो ठीक-ठीक फैसला करने वाला वाक़िफकार है
27قُلْ أَرُونِيَ الَّذِينَ أَلْحَقْتُم بِهِ شُرَكَاءَ ۖ كَلَّا ۚ بَلْ هُوَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(ऐ रसूल तुम कह दो कि जिनको तुम ने खुदा का शरीक बनाकर) खुदा के साथ मिलाया है ज़रा उन्हें मुझे भी तो दिखा दो हरगिज़ (कोई शरीक नहीं) बल्कि खुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
28وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا كَافَّةً لِّلنَّاسِ بَشِيرًا وَنَذِيرًا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) हमने तुमको तमाम (दुनिया के) लोगों के लिए (नेकों को बेहश्त की) खुशखबरी देने वाला और (बन्दों को अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) बनाकर भेजा मगर बहुतेरे लोग (इतना भी) नहीं जानते
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
26आयत

अनुवाद — सबा 26

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Friday, October 2, 2026

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