साद · 6/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
وَانطَلَقَ الْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ امْشُوا وَاصْبِرُوا عَلَىٰ آلِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ يُرَادُ ۝٦
Wantalaqal mala-u minhum anim shoo wasbiroo `alaaa aalihatikum innna haazaa lashai `uny yuraad
📖 हिंदी अर्थ
और उनमें से चन्द रवादार लोग (मजलिस व अज़ा से) ये (कह कर) चल खड़े हुए कि (यहाँ से) चल दो और अपने माबूदों की इबादत पर जमे रहो यक़ीनन इसमें (उसकी) कुछ ज़ाती ग़रज़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انطلق الملأ: उनके सरदार और बड़े-बड़े रईस निकल पड़े।
  • امشوا: अपने तरीके पर चलते रहो, अपनी राह पर डटे रहो।
  • اصبروا على آلهتكم: अपने देवताओं की पूजा पर जमे रहो, उसे छोड़ने में जल्दबाज़ी न करो।
  • إن هذا لشيء يراد: यह (जो मुहम्मद ﷺ लाए हैं) एक ऐसा मामला है जिसका कोई मक़सद है, या यह कोई ऐसी चीज़ है जो अल्लाह की ओर से तय की गई है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी करीम ﷺ ने अपनी क़ौम को तौहीद (एक अल्लाह की इबादत) की दावत दी और उन्हें बुतों की पूजा से रोका, तो क़ुरैश के सरदार और बुज़ुर्ग आपस में सलाह-मशविरा करने के बाद अपने अनुयायियों की तरफ़ निकले। उन्होंने अपने लोगों से कहा: "तुम अपने पुरखों के रास्ते पर चलते रहो, अपने देवताओं की इबादत पर डटे रहो, और इस नए दीन की तरफ़ मत भटको। यह जो मुहम्मद ﷺ कह रहे हैं कि सिर्फ़ एक अल्लाह की इबादत करो, यह कोई सच्ची बात नहीं है, बल्कि यह एक चाल है। इसके पीछे उनका कोई मक़सद है — वे चाहते हैं कि इस तरह वे हम पर बड़ाई हासिल करें और हमें अपना मातहत बना लें।"

उन्होंने यह भी कहा: "हमने अपने बाप-दादाओं के दीन में ऐसी बात कभी नहीं सुनी, और न ही नसरानियों (ईसाइयों) के यहाँ ऐसी कोई बात है। यह तो सिर्फ़ झूठ और मनघड़ंत बात है जो वे खुद गढ़ लाए हैं।"

यानी उनके सरदारों ने अपनी सारी ताक़त लगा दी कि लोगों को सच्चाई की तरफ़ आने से रोकें। उन्होंने सोचा कि अगर लोग मुहम्मद ﷺ की बात मान लेंगे, तो हमारी सरदारी ख़त्म हो जाएगी और हमारा दबदबा नहीं रहेगा। इसलिए उन्होंने अपने लोगों को हौसला दिया और कहा कि अपने देवताओं पर जमे रहो, क्योंकि यह दावत एक ऐसी चीज़ है जिसे अल्लाह ने अपनी तरफ़ से तय किया है — यानी यह एक अज़मुदा (परीक्षा) है, और अल्लाह ही इसका फ़ैसला करेगा।


दावती पहलू (नसीहत):

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हक़ (सच्चाई) की राह हमेशा कठिन होती है, और बड़े-बड़े लोग उसके रास्ते में रुकावटें डालते हैं। लेकिन अल्लाह का वादा है कि सच्चाई ही बाज़ी लेकर रहेगी। जो लोग दुनिया की सरदारी और अपने फ़ायदे के लिए हक़ को दबाने की कोशिश करते हैं, वे आख़िरकार नाकाम होते हैं। जबकि जो लोग अल्लाह की राह पर सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त देता है।

आज भी जब कोई इंसान सच्चाई की तरफ़ बुलाता है, तो कुछ लोग उसे बदनाम करने की कोशिश करते हैं, उसकी नीयत पर शक करते हैं। लेकिन एक मोमिन को चाहिए कि वह इन बातों से न डरे, और अल्लाह पर भरोसा रखे। क्योंकि अल्लाह ही सब कुछ जानता है, और वही अपने बंदों की मदद करता है। याद रखिए, नबी ﷺ ने इन्हीं मुश्किलों के बीच सब्र किया, और अल्लाह ने उन्हें ऐसी कामयाबी दी कि आज पूरी दुनिया में उनका नाम बुलंद है।



📜 आयत 4-8 — सूरा साद

4وَعَجِبُوا أَن جَاءَهُم مُّنذِرٌ مِّنْهُمْ ۖ وَقَالَ الْكَافِرُونَ هَٰذَا سَاحِرٌ كَذَّابٌ
और उन लोगों ने इस बात से ताज्जुब किया कि उन्हीं में का (अज़ाबे खुदा से) एक डरानेवाला (पैग़म्बर) उनके पास आया और काफिर लोग कहने लगे कि ये तो बड़ा (खिलाड़ी) जादूगर और पक्का झूठा है
5أَجَعَلَ الْآلِهَةَ إِلَٰهًا وَاحِدًا ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ عُجَابٌ
भला (देखो तो) उसने तमाम माबूदों को (मटियामेट करके बस) एक ही माबूद क़ायम रखा ये तो यक़ीनी बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है
6وَانطَلَقَ الْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ امْشُوا وَاصْبِرُوا عَلَىٰ آلِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ يُرَادُ
और उनमें से चन्द रवादार लोग (मजलिस व अज़ा से) ये (कह कर) चल खड़े हुए कि (यहाँ से) चल दो और अपने माबूदों की इबादत पर जमे रहो यक़ीनन इसमें (उसकी) कुछ ज़ाती ग़रज़ है
7مَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ إِنْ هَٰذَا إِلَّا اخْتِلَاقٌ
हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी सुनी भी नहीं हो न हो ये उसकी मन गढ़ंत है
8أَأُنزِلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ مِن بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّن ذِكْرِي ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا عَذَابِ
क्या हम सब लोगों में बस (मोहम्मद ही क़ाबिल था कि) उस पर कुरान नाज़िल हुआ, नहीं बात ये है कि इनके (सिरे से) मेरे कलाम ही में शक है कि मेरा है या नहीं बल्कि असल ये है कि इन लोगों ने अभी तक अज़ाब के मज़े नहीं चखे
सादकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — साद 6

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Friday, October 2, 2026

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