साद · 5/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
أَجَعَلَ الْآلِهَةَ إِلَٰهًا وَاحِدًا ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ عُجَابٌ ۝٥
Aja`alal aalihata Ilaahanw Waahidan inna haazaa lashai`un `ujaab
📖 हिंदी अर्थ
भला (देखो तो) उसने तमाम माबूदों को (मटियामेट करके बस) एक ही माबूद क़ायम रखा ये तो यक़ीनी बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَجَعَلَ: क्या बना दिया?
  • الْآلِهَةَ: अनेक देवताओं को
  • إِلَٰهًا وَاحِدًا: एक ही पूज्य (ईश्वर)
  • عُجَابٌ: अत्यंत आश्चर्यजनक, हैरत में डाल देने वाली बात

तफ़सीर:

जब नबी करीम ﷺ ने मक्का के काफ़िरों को एक ईश्वर (अल्लाह) की इबादत की ओर बुलाया और उन्हें बताया कि ये सारे बुत और मूर्तियाँ, जिन्हें वे पूजते हैं, न तो कोई नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही कोई फ़ायदा, तो ये लोग हैरत में पड़ गए और आपस में कहने लगे: "क्या इस शख़्स ने सारे देवताओं को एक ही ईश्वर बना दिया?" उनकी समझ में यह बात बिल्कुल नहीं आ रही थी कि कैसे सिर्फ़ एक ही पूज्य हो सकता है, जबकि उनके पूर्वज सदियों से कई देवी-देवताओं की पूजा करते आ रहे थे। उन्होंने इसे एक बहुत ही अजीब और हैरतअंगेज़ बात क़रार दिया।

असल में यह उनकी नादानी और जहालत थी। वे यह भूल गए कि यह पूरी कायनात — आसमान, ज़मीन, सितारे, पहाड़, समुद्र, इंसान, जानवर — सब कुछ एक ही शक्तिशाली रचयिता की पैदा की हुई है। जिसने इतनी बड़ी और व्यवस्थित दुनिया बनाई, क्या वह एक नहीं हो सकता? क्या कई देवता इस कायनात को चला सकते हैं? बिल्कुल नहीं! अगर कई ईश्वर होते, तो हर एक अपनी इच्छा से कुछ न कुछ करता और पूरी व्यवस्था तहस-नहस हो जाती। यही वजह है कि अल्लाह तआला ने क़ुरआन में फ़रमाया: "अगर आसमान और ज़मीन में अल्लाह के सिवा और पूज्य होते, तो दोनों तबाह हो जाते।"

प्यारे भाइयो! यही तो इस्लाम की पहचान है — तौहीद (एकेश्वरवाद)। यही वह पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया। हज़रत नूह से लेकर हज़रत मुहम्मद ﷺ तक, सबका यही संदेश था कि "ला इलाहा इल्लल्लाह" — अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं। यही वह कलिमा है जो इंसान को ज़िल्लत से इज़्ज़त की तरफ़ लाता है, ग़ुलामी से आज़ादी की तरफ़ ले जाता है, और दिल को सुकून व इत्मीनान अता करता है।

आज भी अगर हम अपने दिलों को देखें, तो कई बार हमारे अंदर भी "छुपे हुए देवता" होते हैं — माल की मोहब्बत, औलाद का लगाव, रुतबे की चाहत, अपनी नफ़्स की परस्तिश। ये सब चीज़ें जब हमारे दिल में अल्लाह से बढ़कर जगह बना लेती हैं, तो हम भी उसी अज़ाब का शिकार हो जाते हैं जिसका शिकार वे काफ़िर थे। इसलिए हमें चाहिए कि अपने दिल को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ाली रखें, उसी से मदद माँगें, उसी से डरें और उसी से उम्मीद रखें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा।



📜 आयत 3-7 — सूरा साद

3كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍ فَنَادَوا وَّلَاتَ حِينَ مَنَاصٍ
हमने उन से पहले कितने गिरोह हलाक कर डाले तो (अज़ाब के वक्त) ये लोग चीख़ उठे मगर छुटकारे का वक्त ही न रहा था
4وَعَجِبُوا أَن جَاءَهُم مُّنذِرٌ مِّنْهُمْ ۖ وَقَالَ الْكَافِرُونَ هَٰذَا سَاحِرٌ كَذَّابٌ
और उन लोगों ने इस बात से ताज्जुब किया कि उन्हीं में का (अज़ाबे खुदा से) एक डरानेवाला (पैग़म्बर) उनके पास आया और काफिर लोग कहने लगे कि ये तो बड़ा (खिलाड़ी) जादूगर और पक्का झूठा है
5أَجَعَلَ الْآلِهَةَ إِلَٰهًا وَاحِدًا ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ عُجَابٌ
भला (देखो तो) उसने तमाम माबूदों को (मटियामेट करके बस) एक ही माबूद क़ायम रखा ये तो यक़ीनी बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है
6وَانطَلَقَ الْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ امْشُوا وَاصْبِرُوا عَلَىٰ آلِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ يُرَادُ
और उनमें से चन्द रवादार लोग (मजलिस व अज़ा से) ये (कह कर) चल खड़े हुए कि (यहाँ से) चल दो और अपने माबूदों की इबादत पर जमे रहो यक़ीनन इसमें (उसकी) कुछ ज़ाती ग़रज़ है
7مَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي الْمِلَّةِ الْآخِرَةِ إِنْ هَٰذَا إِلَّا اخْتِلَاقٌ
हम लोगों ने तो ये बात पिछले दीन में कभी सुनी भी नहीं हो न हो ये उसकी मन गढ़ंत है
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अनुवाद — साद 5

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Tuesday, September 8, 2026

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