अन-निसा · 151/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
أُولَٰئِكَ هُمُ الْكَافِرُونَ حَقًّا ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا مُّهِينًا ۝١٥١
Ulaaa`ika humul kaafiroona haqqaa; wa a`tadnaa lilkaafireena `azaabam muheenaa
📖 हिंदी अर्थ
यही लोग हक़ीक़तन काफ़िर हैं और हमने काफ़िरों के वास्ते ज़िल्लत देने वाला अज़ाब तैयार कर रखा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حَقًّا: वास्तव में, निःसंदेह, पूर्ण रूप से।
  • أَعْتَدْنَا: हमने तैयार कर रखा है।
  • مُهِينًا: अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला।

व्याख्या:

ये लोग—जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाने का दावा करते हैं, लेकिन कुछ रसूलों पर ईमान लाते हैं और कुछ को झुठलाते हैं, तथा ईमान और कुफ्र के बीच एक रास्ता बनाना चाहते हैं—वास्तव में पूर्ण काफ़िर हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि उनका कुफ्र सिद्ध और पक्का है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जो व्यक्ति किसी एक नबी को नहीं मानता, उसने अनिवार्य रूप से अल्लाह के सभी रसूलों को नहीं माना, और जिसने अल्लाह के किसी भी रसूल को झुठलाया, उसने अल्लाह को ही झुठलाया। ईमान एक अभिन्न (अविभाज्य) चीज़ है—इसे विभाजित नहीं किया जा सकता। अतः अल्लाह ने ऐसे सभी काफ़िरों के लिए—चाहे वे किसी भी प्रकार के काफ़िर हों—एक अपमानजनक और ज़लील करने वाला अज़ाब तैयार कर रखा है, जो उन्हें क़ियामत के दिन मिलेगा। यह अज़ाब उनके अहंकार और अल्लाह तथा उसके रसूलों पर ईमान लाने से इनकार करने का बदला होगा।

लाभ एवं शिक्षाएँ:

  1. ईमान एक अटूट सत्य है—इसे टुकड़ों में नहीं बाँटा जा सकता। जो अल्लाह के किसी एक रसूल को नहीं मानता, वह दरअसल अल्लाह की पूरी रिसालत (पैग़म्बरी) को नकारता है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि सभी नबियों पर एक समान ईमान लाना हर मुसलमान का आवश्यक कर्तव्य है। उनमें किसी के बीच भेदभाव करना—किसी को मानना और किसी को नकारना—कुफ्र है।
  3. अल्लाह का अज़ाब उसके बंदों पर ज़ुल्म नहीं, बल्कि उनके अपने कर्मों का स्वाभाविक परिणाम है। जो लोग सत्य को जानते हुए भी उससे मुँह मोड़ते हैं, उनके लिए अपमानजनक यातना ही उचित है।
  4. यह आयत हमें चेतावनी देती है कि ईमान के मामले में आधे-अधूरे रवैये की कोई गुंजाइश नहीं। या तो व्यक्ति पूर्ण रूप से अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, या फिर वह कुफ्र के दायरे में चला जाता है।
  5. अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों अटल हैं। जिसने ईमान का मार्ग अपनाया, उसके लिए अल्लाह की रहमत और सम्मान है; और जिसने कुफ्र का मार्ग चुना, उसके लिए अपमानजनक अज़ाब तैयार है। यह अल्लाह की पूर्ण न्यायपूर्ण व्यवस्था है।


📜 आयत 149-153 — सूरा अन-निसा

149إِن تُبْدُوا خَيْرًا أَوْ تُخْفُوهُ أَوْ تَعْفُوا عَن سُوءٍ فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ عَفُوًّا قَدِيرًا
अगर खुल्लम खुल्ला नेकी करते हो या छिपा कर या किसी की बुराई से दरगुज़र करते हो तो तो ख़ुदा भी बड़ा दरगुज़र करने वाला (और) क़ादिर है
150إِنَّ الَّذِينَ يَكْفُرُونَ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَيُرِيدُونَ أَن يُفَرِّقُوا بَيْنَ اللَّهِ وَرُسُلِهِ وَيَقُولُونَ نُؤْمِنُ بِبَعْضٍ وَنَكْفُرُ بِبَعْضٍ وَيُرِيدُونَ أَن يَتَّخِذُوا بَيْنَ ذَٰلِكَ سَبِيلًا
बेशक जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों से इन्कार करते हैं और ख़ुदा और उसके रसूलों में तफ़रक़ा डालना चाहते हैं और कहते हैं कि हम बाज़ (पैग़म्बरों) पर ईमान लाए हैं और बाज़ का इन्कार करते हैं और चाहते हैं कि इस (कुफ़्र व ईमान) के दरमियान एक दूसरी राह निकलें
151أُولَٰئِكَ هُمُ الْكَافِرُونَ حَقًّا ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا مُّهِينًا
यही लोग हक़ीक़तन काफ़िर हैं और हमने काफ़िरों के वास्ते ज़िल्लत देने वाला अज़ाब तैयार कर रखा है
152وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَلَمْ يُفَرِّقُوا بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ أُولَٰئِكَ سَوْفَ يُؤْتِيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए और उनमें से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते तो ऐसे ही लोगों को ख़ुदा बहुत जल्द उनका अज्र अता फ़रमाएगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
153يَسْأَلُكَ أَهْلُ الْكِتَابِ أَن تُنَزِّلَ عَلَيْهِمْ كِتَابًا مِّنَ السَّمَاءِ ۚ فَقَدْ سَأَلُوا مُوسَىٰ أَكْبَرَ مِن ذَٰلِكَ فَقَالُوا أَرِنَا اللَّهَ جَهْرَةً فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ بِظُلْمِهِمْ ۚ ثُمَّ اتَّخَذُوا الْعِجْلَ مِن بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَاتُ فَعَفَوْنَا عَن ذَٰلِكَ ۚ وَآتَيْنَا مُوسَىٰ سُلْطَانًا مُّبِينًا
(ऐ रसूल) अहले किताब (यहूदी) जो तुमसे (ये) दरख्वास्त करते हैं कि तुम उनपर एक किताब आसमान से उतरवा दो (तुम उसका ख्याल न करो क्योंकि) ये लोग मूसा से तो इससे कहीं बढ़ (बढ़) के दरख्वास्त कर चुके हैं चुनान्चे कहने लगे कि हमें ख़ुदा को खुल्लम खुल्ला दिखा दो तब उनकी शरारत की वजह से बिजली ने ले डाला फिर (बावजूद के) उन लोगों के पास तौहीद की वाजैए और रौशन (दलीलें) आ चुकी थी उसके बाद भी उन लोगों ने बछड़े को (ख़ुदा) बना लिया फिर हमने उससे भी दरगुज़र किया और मूसा को हमने सरीही ग़लबा अता किया
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
151आयत

अनुवाद — अन-निसा 151

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Tuesday, September 29, 2026

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