Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- حَقًّا: वास्तव में, निःसंदेह, पूर्ण रूप से।
- أَعْتَدْنَا: हमने तैयार कर रखा है।
- مُهِينًا: अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला।
व्याख्या:
ये लोग—जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाने का दावा करते हैं, लेकिन कुछ रसूलों पर ईमान लाते हैं और कुछ को झुठलाते हैं, तथा ईमान और कुफ्र के बीच एक रास्ता बनाना चाहते हैं—वास्तव में पूर्ण काफ़िर हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि उनका कुफ्र सिद्ध और पक्का है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जो व्यक्ति किसी एक नबी को नहीं मानता, उसने अनिवार्य रूप से अल्लाह के सभी रसूलों को नहीं माना, और जिसने अल्लाह के किसी भी रसूल को झुठलाया, उसने अल्लाह को ही झुठलाया। ईमान एक अभिन्न (अविभाज्य) चीज़ है—इसे विभाजित नहीं किया जा सकता। अतः अल्लाह ने ऐसे सभी काफ़िरों के लिए—चाहे वे किसी भी प्रकार के काफ़िर हों—एक अपमानजनक और ज़लील करने वाला अज़ाब तैयार कर रखा है, जो उन्हें क़ियामत के दिन मिलेगा। यह अज़ाब उनके अहंकार और अल्लाह तथा उसके रसूलों पर ईमान लाने से इनकार करने का बदला होगा।
लाभ एवं शिक्षाएँ:
- ईमान एक अटूट सत्य है—इसे टुकड़ों में नहीं बाँटा जा सकता। जो अल्लाह के किसी एक रसूल को नहीं मानता, वह दरअसल अल्लाह की पूरी रिसालत (पैग़म्बरी) को नकारता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सभी नबियों पर एक समान ईमान लाना हर मुसलमान का आवश्यक कर्तव्य है। उनमें किसी के बीच भेदभाव करना—किसी को मानना और किसी को नकारना—कुफ्र है।
- अल्लाह का अज़ाब उसके बंदों पर ज़ुल्म नहीं, बल्कि उनके अपने कर्मों का स्वाभाविक परिणाम है। जो लोग सत्य को जानते हुए भी उससे मुँह मोड़ते हैं, उनके लिए अपमानजनक यातना ही उचित है।
- यह आयत हमें चेतावनी देती है कि ईमान के मामले में आधे-अधूरे रवैये की कोई गुंजाइश नहीं। या तो व्यक्ति पूर्ण रूप से अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, या फिर वह कुफ्र के दायरे में चला जाता है।
- अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों अटल हैं। जिसने ईमान का मार्ग अपनाया, उसके लिए अल्लाह की रहमत और सम्मान है; और जिसने कुफ्र का मार्ग चुना, उसके लिए अपमानजनक अज़ाब तैयार है। यह अल्लाह की पूर्ण न्यायपूर्ण व्यवस्था है।
📜 आयत 149-153 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 151
सूरा अन-निसा आयत 151 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही लोग हक़ीक़तन काफ़िर हैं और हमने काफ़िरों के वास्ते…सूरा आयत 151/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 149–153. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, September 29, 2026
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