Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَكْفُرُونَ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ: अल्लाह और उसके रसूलों को नकारना और उन पर ईमान न लाना।
- يُفَرِّقُوا بَيْنَ اللَّهِ وَرُسُلِهِ: अल्लाह और उसके रसूलों के बीच अंतर करना, यानी अल्लाह पर ईमान लाना लेकिन उसके रसूलों को नकारना।
- نُؤْمِنُ بِبَعْضٍ وَنَكْفُرُ بِبَعْضٍ: हम कुछ रसूलों पर ईमान लाते हैं और कुछ को नकारते हैं।
- سَبِيلًا: रास्ता, मार्ग।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो अल्लाह और उसके रसूलों के साथ कुफ्र (इनकार) करते हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जो अल्लाह पर तो ईमान रखते हैं, लेकिन उसके रसूलों को नहीं मानते, या कुछ रसूलों को मानते हैं और कुछ को नकार देते हैं। यहूदियों और ईसाइयों का हाल यही था—यहूदी मूसा (अलैहिस्सलाम) और तौरात पर ईमान रखते थे, लेकिन ईसा (अलैहिस्सलाम) और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को नकारते थे; ईसाई ईसा (अलैहिस्सलाम) और इंजील पर ईमान रखते थे, लेकिन मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को नहीं मानते थे। वे सोचते थे कि इस तरह वे एक बीच का रास्ता निकाल लेंगे, जिससे वे अपने आप को सही ठहरा सकें और अपनी मनमानी कर सकें। लेकिन यह उनका भ्रम है, क्योंकि अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान एक अटूट सत्य है—जो एक रसूल को नकारता है, उसने सभी रसूलों को नकारा और अल्लाह पर भी पूर्ण ईमान नहीं लाया। अल्लाह ने सभी रसूलों को एक ही सत्य (तौहीद) के साथ भेजा, और उन सब पर ईमान लाना हर मुसलमान का अनिवार्य कर्तव्य है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान एक समग्र (संपूर्ण) चीज़ है—उसे टुकड़ों में नहीं बाँटा जा सकता। जो अल्लाह के किसी रसूल को नकारता है, उसका ईमान अधूरा और अमान्य है।
- इस्लाम में सभी नबियों और रसूलों का सम्मान करना अनिवार्य है, और उनके बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। यही सच्चे मुसलमान की पहचान है।
- यह आयत हमें चेतावनी देती है कि धर्म में आधे-अधूरे रास्ते या समझौते की कोशिश करना गुमराही है। सच्चा रास्ता केवल अल्लाह और उसके सभी रसूलों पर पूर्ण ईमान लाना है।
- यह हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत और मार्गदर्शन उन्हीं को मिलता है जो पूरी तरह से उसके आगे सिर झुकाते हैं और उसके भेजे हुए हर रसूल को मानते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची सफलता और शांति तक पहुँचाता है।
📜 आयत 148-152 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 150
सूरा अन-निसा आयत 150 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों से इन्कार करते…सूरा आयत 150/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 148–152. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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