अन-निसा · 152/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَلَمْ يُفَرِّقُوا بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ أُولَٰئِكَ سَوْفَ يُؤْتِيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا ۝١٥٢
Wallazeena aamanoo billaahi wa Rusulihee wa lam yufarriqoo baina ahadim minhum ulaaa`ika sawfa yu`teehim ujoorahum; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheema
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए और उनमें से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते तो ऐसे ही लोगों को ख़ुदा बहुत जल्द उनका अज्र अता फ़रमाएगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, विश्वास किया।
  • رُسُلِهِ: उसके सभी पैगंबरों पर।
  • لَمْ يُفَرِّقُوا: उन्होंने फर्क नहीं किया (किसी एक पर ईमान लाकर दूसरे को नहीं झुटलाया)।
  • أُجُورَهُمْ: उनके पूरे बदले और प्रतिफल।
  • غَفُورًا رَّحِيمًا: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की प्रशंसा करती है जो अल्लाह पर पूर्ण ईमान रखते हैं और उसके सभी पैगंबरों को बिना किसी भेदभाव के मानते हैं। ऐसे लोगों ने अल्लाह की एकता (तौहीद) को अपनाया और उसके सभी दूतों को सच्चा माना—चाहे वे आदम, नूह, इब्राहीम, मूसा, ईसा या अंतिम पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हों। वे किसी एक नबी को मानकर दूसरे को अस्वीकार नहीं करते, जैसा कि कुछ गुमराह लोग करते हैं। उनका ईमान समग्र है, अधूरा नहीं।

अल्लाह ने वादा किया है कि ऐसे सच्चे ईमान वालों को वह उनका पूरा-पूरा बदला देगा—उनके अच्छे कर्मों का प्रतिफल, उनकी नेकियों का अज्र, और उनके ईमान की बदौलत जन्नत की नेमतें। यह बदला उन्हें ज़रूर मिलेगा, क्योंकि अल्लाह का वादा अटल है। साथ ही, अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा क्षमाशील और दयावान है—वह उनकी छोटी-बड़ी गलतियों को माफ कर देता है, उनके अच्छे कर्मों को कई गुना बढ़ा देता है, और अपनी रहमत से उन्हें नवाज़ता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की पहचान यह है कि हम अल्लाह और उसके सभी रसूलों को एक साथ मानें। किसी एक नबी को छोड़कर दूसरे पर ईमान लाना अधूरा ईमान है। और जो लोग इस पूर्ण ईमान पर स्थिर रहते हैं, उनके लिए अल्लाह की ओर से बड़ा इनाम तैयार है। यह हमारे लिए खुशखबरी है कि हमें बस सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाना है, और फिर अल्लाह की रहमत और माफी हमारा इंतज़ार कर रही है। यही सफलता का रास्ता है—ईमान में एकता, अमल में नेकी, और अल्लाह की रहमत पर भरोसा।



📜 आयत 150-154 — अन-निसा

150إِنَّ الَّذِينَ يَكْفُرُونَ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَيُرِيدُونَ أَن يُفَرِّقُوا بَيْنَ اللَّهِ وَرُسُلِهِ وَيَقُولُونَ نُؤْمِنُ بِبَعْضٍ وَنَكْفُرُ بِبَعْضٍ وَيُرِيدُونَ أَن يَتَّخِذُوا بَيْنَ ذَٰلِكَ سَبِيلًا
बेशक जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों से इन्कार करते हैं और ख़ुदा और उसके रसूलों में तफ़रक़ा डालना चाहते हैं और कहते हैं कि हम बाज़ (पैग़म्बरों) पर ईमान लाए हैं और बाज़ का इन्कार करते हैं और चाहते हैं कि इस (कुफ़्र व ईमान) के दरमियान एक दूसरी राह निकलें
151أُولَٰئِكَ هُمُ الْكَافِرُونَ حَقًّا ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا مُّهِينًا
यही लोग हक़ीक़तन काफ़िर हैं और हमने काफ़िरों के वास्ते ज़िल्लत देने वाला अज़ाब तैयार कर रखा है
152وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَلَمْ يُفَرِّقُوا بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ أُولَٰئِكَ سَوْفَ يُؤْتِيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए और उनमें से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते तो ऐसे ही लोगों को ख़ुदा बहुत जल्द उनका अज्र अता फ़रमाएगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
153يَسْأَلُكَ أَهْلُ الْكِتَابِ أَن تُنَزِّلَ عَلَيْهِمْ كِتَابًا مِّنَ السَّمَاءِ ۚ فَقَدْ سَأَلُوا مُوسَىٰ أَكْبَرَ مِن ذَٰلِكَ فَقَالُوا أَرِنَا اللَّهَ جَهْرَةً فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ بِظُلْمِهِمْ ۚ ثُمَّ اتَّخَذُوا الْعِجْلَ مِن بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَاتُ فَعَفَوْنَا عَن ذَٰلِكَ ۚ وَآتَيْنَا مُوسَىٰ سُلْطَانًا مُّبِينًا
(ऐ रसूल) अहले किताब (यहूदी) जो तुमसे (ये) दरख्वास्त करते हैं कि तुम उनपर एक किताब आसमान से उतरवा दो (तुम उसका ख्याल न करो क्योंकि) ये लोग मूसा से तो इससे कहीं बढ़ (बढ़) के दरख्वास्त कर चुके हैं चुनान्चे कहने लगे कि हमें ख़ुदा को खुल्लम खुल्ला दिखा दो तब उनकी शरारत की वजह से बिजली ने ले डाला फिर (बावजूद के) उन लोगों के पास तौहीद की वाजैए और रौशन (दलीलें) आ चुकी थी उसके बाद भी उन लोगों ने बछड़े को (ख़ुदा) बना लिया फिर हमने उससे भी दरगुज़र किया और मूसा को हमने सरीही ग़लबा अता किया
154وَرَفَعْنَا فَوْقَهُمُ الطُّورَ بِمِيثَاقِهِمْ وَقُلْنَا لَهُمُ ادْخُلُوا الْبَابَ سُجَّدًا وَقُلْنَا لَهُمْ لَا تَعْدُوا فِي السَّبْتِ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
और हमने उनके एहद व पैमान की वजह से उनके (सर) पर (कोहे) तूर को लटका दिया और हमने उनसे कहा कि (शहर के) दरवाज़े में सजदा करते हुए दाख़िल हो और हमने (ये भी) कहा कि तुम हफ्ते के दिन (हमारे हुक्म से) तजावुज़ न करना और हमने उनसे बहुत मज़बूत एहदो पैमान ले लिया
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अनुवाद — अन-निसा 152

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Tuesday, August 18, 2026

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