अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آمَنُوا: ईमान लाए, विश्वास किया।
- رُسُلِهِ: उसके सभी पैगंबरों पर।
- لَمْ يُفَرِّقُوا: उन्होंने फर्क नहीं किया (किसी एक पर ईमान लाकर दूसरे को नहीं झुटलाया)।
- أُجُورَهُمْ: उनके पूरे बदले और प्रतिफल।
- غَفُورًا رَّحِيمًا: अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत दयावान।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की प्रशंसा करती है जो अल्लाह पर पूर्ण ईमान रखते हैं और उसके सभी पैगंबरों को बिना किसी भेदभाव के मानते हैं। ऐसे लोगों ने अल्लाह की एकता (तौहीद) को अपनाया और उसके सभी दूतों को सच्चा माना—चाहे वे आदम, नूह, इब्राहीम, मूसा, ईसा या अंतिम पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हों। वे किसी एक नबी को मानकर दूसरे को अस्वीकार नहीं करते, जैसा कि कुछ गुमराह लोग करते हैं। उनका ईमान समग्र है, अधूरा नहीं।
अल्लाह ने वादा किया है कि ऐसे सच्चे ईमान वालों को वह उनका पूरा-पूरा बदला देगा—उनके अच्छे कर्मों का प्रतिफल, उनकी नेकियों का अज्र, और उनके ईमान की बदौलत जन्नत की नेमतें। यह बदला उन्हें ज़रूर मिलेगा, क्योंकि अल्लाह का वादा अटल है। साथ ही, अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा क्षमाशील और दयावान है—वह उनकी छोटी-बड़ी गलतियों को माफ कर देता है, उनके अच्छे कर्मों को कई गुना बढ़ा देता है, और अपनी रहमत से उन्हें नवाज़ता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की पहचान यह है कि हम अल्लाह और उसके सभी रसूलों को एक साथ मानें। किसी एक नबी को छोड़कर दूसरे पर ईमान लाना अधूरा ईमान है। और जो लोग इस पूर्ण ईमान पर स्थिर रहते हैं, उनके लिए अल्लाह की ओर से बड़ा इनाम तैयार है। यह हमारे लिए खुशखबरी है कि हमें बस सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाना है, और फिर अल्लाह की रहमत और माफी हमारा इंतज़ार कर रही है। यही सफलता का रास्ता है—ईमान में एकता, अमल में नेकी, और अल्लाह की रहमत पर भरोसा।
📜 आयत 150-154 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 152
सूरा अन-निसा आयत 152 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए…सूरा आयत 152/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 150–154. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








