Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَعَنَهُمُ اللهُ: अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से दूर कर दिया और उन पर अपनी यातना का फैसला सुनाया।
- نَصِيرًا: सहायक, मददगार, कोई जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये वे लोग हैं जिनके भ्रष्टाचार और गुमराही ने हद से ज़्यादा फैल चुका है—यानी वे लोग जो ईमान और सच्चाई के बजाय कुफ्र और बुराई को अपनाते हैं, और जो अल्लाह की आयतों और उसके रसूल के मार्गदर्शन को ठुकराते हैं। अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से निकाल दिया है और उन पर अपनी लानत (फिटकार) भेजी है। जब अल्लाह किसी पर लानत भेज देता है, तो उसका अर्थ यह है कि वह व्यक्ति अल्लाह की रहमत, सुरक्षा और भलाई से महरूम हो गया। और जिसे अल्लाह अपनी रहमत से दूर कर दे, उसके लिए दुनिया में कोई मददगार नहीं होता जो उसे अल्लाह की यातना से बचा सके या उसकी भलाई लौटा सके। न कोई रिश्तेदार, न कोई साथी, न कोई ताकतवर—कोई भी उसकी मदद नहीं कर सकता। यह एक गंभीर चेतावनी है कि अल्लाह की पकड़ से बचने वाला कोई नहीं है, और जिसे अल्लाह ने छोड़ दिया, उसे कोई थामने वाला नहीं।
फ़ायदे (सबक):
- यह आयत हमें सिखाती है कि सबसे बड़ी सफलता अल्लाह की रहमत और उसकी मोहब्बत पाना है, और सबसे बड़ी नाकामी उसकी लानत और नाराज़गी कमाना है।
- हमें अपने आचरण और विश्वास की लगातार जाँच करनी चाहिए कि कहीं हम किसी ऐसे काम या विचार में तो नहीं पड़ रहे जो अल्लाह की नाराज़गी का कारण बने।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा सहारा और मददगार नहीं है—इसलिए हर मामले में उसी की तरफ रुजू करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए।
- मुसलमान को चाहिए कि वह उन लोगों के रास्ते से बचे जिन पर अल्लाह की लानत है, और हमेशा ईमान, सच्चाई और अच्छे आचरण को अपनाए ताकि वह अल्लाह की रहमत और उसकी मोहब्बत का हकदार बने।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, इसलिए हमें उसके हुक्मों का पालन करने में कोई कोताही नहीं करनी चाहिए और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक ढालना चाहिए।
📜 आयत 50-54 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 52
सूरा अन-निसा आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) यही वह लोग हैं जिनपर ख़ुदा ने लानत…सूरा आयत 52/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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