अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُولُو الْقُرْبَىٰ: मृतक के रिश्तेदार जो वारिस न हों।
- الْيَتَامَىٰ: वे बच्चे जिनके पिता का देहांत हो चुका हो।
- الْمَسَاكِينُ: गरीब और ज़रूरतमंद लोग।
- فَارْزُقُوهُم: उन्हें कुछ दो (अपनी इच्छा से)।
- قَوْلًا مَّعْرُوفًا: अच्छी और नेक बात, जिसमें कोई बुराई या कठोरता न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब मृतक की विरासत (मीरास) बाँटी जा रही हो और उस समय वहाँ उसके वे रिश्तेदार मौजूद हों जिन्हें विरासत में हिस्सा नहीं मिलता, या ऐसे अनाथ बच्चे हों जिनके पिता मर चुके हों, या गरीब लोग हों, तो उन्हें उस माल में से कुछ दे दो — यह एक अच्छा और पसंदीदा काम है। यह देना अनिवार्य नहीं है, बल्कि नेकी और भलाई के रूप में है, ताकि उनके दिलों को तसल्ली मिले और उन्हें कोई ईर्ष्या या रंजिश न हो। साथ ही, उनसे नर्मी और भलाई की बात करो, उन्हें दुत्कारो मत, न ही कोई कठोर या बुरा वचन कहो। यह इसलिए है कि इस्लाम ने हर मौके पर रिश्तेदारों, अनाथों और गरीबों के साथ अच्छा व्यवहार करने की तालीम दी है, ताकि समाज में मुहब्बत और हमदर्दी का जज़्बा पैदा हो।
यह आयत हमें सिखाती है कि माल और दौलत सिर्फ़ अपने लिए नहीं है, बल्कि उसमें दूसरों का भी हक़ है। जब हमारे पास कुछ आए, तो हमें उन लोगों का ख़याल रखना चाहिए जो कमज़ोर और ज़रूरतमंद हैं। यह काम अल्लाह को बहुत पसंद है और इससे दिलों में मुहब्बत पैदा होती है। याद रखें, यह हुक्म बाद में मंसूख़ (रद्द) हो गया, यानी विरासत के नियमों के आने के बाद यह आयत अपने पिछले हुक्म के साथ लागू नहीं रही, लेकिन इसकी रूह (भावना) हमेशा के लिए है — कि हर मौके पर नेकी और भलाई करना, और दूसरों के साथ अच्छा सुलूक करना, यही इस्लाम की तालीम है। अल्लाह हमें यह तौफ़ीक़ दे कि हम अपने रिश्तेदारों, अनाथों और गरीबों के साथ हमेशा नेकी और मुहब्बत से पेश आएँ।
📜 आयत 6-10 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 8
सूरा अन-निसा आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब (तर्क की) तक़सीम के वक्त (वह) क़राबतदार (जिनका…सूरा आयत 8/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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