अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَصِيبٌ: हिस्सा, भाग
- تَرَكَ: छोड़ा, मृतक का छोड़ा हुआ धन (विरासत)
- الْوَالِدَانِ: माता-पिता
- الْأَقْرَبُونَ: रिश्तेदार, निकट के सम्बन्धी
- مِمَّا قَلَّ مِنْهُ أَوْ كَثُرَ: चाहे वह (धन) थोड़ा हो या अधिक
- نَصِيبًا مَّفْرُوضًا: निर्धारित किया हुआ हिस्सा, जो अल्लाह ने अनिवार्य कर दिया हो
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मीरास (विरासत) के उस मौलिक सिद्धांत को स्थापित करती है जो जाहिलियत के दौर में मौजूद बुरी प्रथा को समाप्त करता है। उस समय अरब समाज में केवल लड़के और बड़े आदमी ही विरासत पाते थे, जबकि औरतें, लड़कियाँ और छोटे बच्चे विरासत से पूरी तरह वंचित रह जाते थे। अल्लाह तआला ने इस आयत में स्पष्ट कर दिया कि:
पुरुषों के लिए — चाहे वे बड़े हों या छोटे, उस धन में हिस्सा है जो माता-पिता और निकट के रिश्तेदार (जैसे भाई, चाचा आदि) मरते समय छोड़कर जाएँ।
और स्त्रियों के लिए भी — उसी धन में हिस्सा है, चाहे वह धन थोड़ा हो या अधिक। यह हिस्सा अल्लाह की ओर से निर्धारित और अनिवार्य है, जिसे देने से किसी को इनकार नहीं करना चाहिए।
इस आयत ने स्त्रियों और बच्चों को वह अधिकार दिया जो उन्हें सदियों से नहीं मिला था। यह कोई सामान्य हिस्सा नहीं है, बल्कि अल्लाह ने इसे "مَفْرُوضًا" (निर्धारित और अनिवार्य) कहा है, यानी यह एक ऐसा हक़ है जिसे अदा करना हर मुसलमान पर लाज़िमी है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस्लाम में स्त्री का सम्मान: यह आयत साबित करती है कि इस्लाम ने 1400 साल पहले स्त्रियों को आर्थिक अधिकार दिए, जब दुनिया की कोई सभ्यता उन्हें यह अधिकार नहीं देती थी। यह इस्लाम की सच्ची तस्वीर है — जो औरत को ज़िल्लत नहीं, बल्कि इज़्ज़त देता है।
- अल्लाह की रहमत और इंसाफ़: अल्लाह ने अपनी बेपनाह रहमत से हर इंसान का हक़ निर्धारित किया है, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, बड़ा हो या छोटा। यह अल्लाह के न्याय की निशानी है कि उसने किसी को उसके हक़ से महरूम नहीं रखा।
- माल की हक़ीक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि धन चाहे थोड़ा हो या अधिक, उसमें दूसरों का भी हक़ होता है। इससे हमें माल की محبت में कंजूसी नहीं करनी चाहिए, बल्कि अल्लाह के बताए हुए हिस्से उनके हक़दारों तक पहुँचाने चाहिएं।
- खानदानी रिश्तों की मज़बूती: जब हर व्यक्ति को उसका हक़ मिलेगा, तो खानदान में मोहब्बत और भाईचारा बढ़ेगा। यह आयत उन झगड़ों को खत्म करती है जो विरासत की वजह से खानदानों में पैदा होते हैं।
- क़ुरआन की कामिल तालीमात: यह आयत इस बात का सबूत है कि क़ुरआन हर ज़माने और हर मुआमले में इंसानों की रहनुमाई करता है — चाहे वह इबादत हो या मुआमलात, दुनिया हो या आख़िरत।
📜 आयत 5-9 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 7
सूरा अन-निसा आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मॉ बाप और क़राबतदारों के तर्के में कुछ हिस्सा ख़ास…सूरा आयत 7/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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