अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْكِتَابِ: क़ुरआन करीम।
- بِمَا أَرْسَلْنَا بِهِ رُسُلَنَا: वह सत्य और मार्गदर्शन जो अल्लाह ने अपने रसूलों के ज़रिए भेजा, यानी तमाम आसमानी किताबें और शरीअतें।
- فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ: वे अनिवार्य रूप से जान लेंगे (अपने किए का अंजाम)।
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह की किताब (क़ुरआन) को झुठलाया और उन सब चीज़ों को भी झुठलाया जो अल्लाह ने अपने रसूलों के ज़रिए भेजीं — चाहे वह तौरात हो, इंजील हो या अन्य आसमानी हिदायतें। ऐसे लोगों ने सिर्फ़ एक किताब को नहीं झुठलाया, बल्कि अल्लाह के पूरे पैग़ाम और उसके सारे रसूलों की तालीमात को नकार दिया।
अल्लाह फ़रमाता है कि ये लोग ज़रूर जान लेंगे — यानी उन्हें अपने इस इनकार का नतीजा भुगतना पड़ेगा। यह धमकी क़यामत के दिन की है, जब उनकी गर्दनों में तौक़ (हार) डाले जाएँगे, पैरों में ज़ंजीरें होंगी, और फ़रिश्ते उन्हें खौलते हुए पानी में घसीटेंगे, फिर उन्हें जहन्नम की आग में झोंका जाएगा। वह दिन बेहद सख़्त होगा, और तब उन्हें साफ़ पता चल जाएगा कि सच्चाई क्या थी, लेकिन वह जानना उनके किसी काम न आएगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने इंसान को आज़ादी दी कि वह सोचे, समझे और सही रास्ता चुने। क़ुरआन और रसूलों का पैग़ाम सिर्फ़ दुनिया की भलाई के लिए नहीं, बल्कि आख़िरत की कामयाबी के लिए भी है। जो लोग इस हिदायत को ठुकराते हैं, वह दरअसल अपने ही नुक़्सान का सामान करते हैं। मगर अल्लाह रहीम है — उसने दरवाज़ा खुला रखा है। जब तक साँसें चल रही हैं, तौबा और रुजूअ की गुंजाइश है। आओ हम क़ुरआन को सच्चे दिल से पढ़ें, उस पर अमल करें, और उस रास्ते को अपनाएँ जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाए। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 68-72 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 70
सूरा ग़ाफिर आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये कहाँ भटके चले जा रहे हैं, जिन लोगों ने…सूरा आयत 70/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 68–72. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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