ग़ाफिर · 70/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
الَّذِينَ كَذَّبُوا بِالْكِتَابِ وَبِمَا أَرْسَلْنَا بِهِ رُسُلَنَا ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ۝٧٠
Allazeena kazzaboo bil Kitaabi wa bimaa arsalnaa bihee Rusulanaa fasawfa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
ये कहाँ भटके चले जा रहे हैं, जिन लोगों ने किताबे (ख़ुदा) और उन बातों को जो हमने पैग़म्बरों को देकर भेजा था झुठलाया तो बहुत जल्द उसका नतीजा उन्हें मालूम हो जाएगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْكِتَابِ: क़ुरआन करीम।
  • بِمَا أَرْسَلْنَا بِهِ رُسُلَنَا: वह सत्य और मार्गदर्शन जो अल्लाह ने अपने रसूलों के ज़रिए भेजा, यानी तमाम आसमानी किताबें और शरीअतें।
  • فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ: वे अनिवार्य रूप से जान लेंगे (अपने किए का अंजाम)।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह की किताब (क़ुरआन) को झुठलाया और उन सब चीज़ों को भी झुठलाया जो अल्लाह ने अपने रसूलों के ज़रिए भेजीं — चाहे वह तौरात हो, इंजील हो या अन्य आसमानी हिदायतें। ऐसे लोगों ने सिर्फ़ एक किताब को नहीं झुठलाया, बल्कि अल्लाह के पूरे पैग़ाम और उसके सारे रसूलों की तालीमात को नकार दिया।

अल्लाह फ़रमाता है कि ये लोग ज़रूर जान लेंगे — यानी उन्हें अपने इस इनकार का नतीजा भुगतना पड़ेगा। यह धमकी क़यामत के दिन की है, जब उनकी गर्दनों में तौक़ (हार) डाले जाएँगे, पैरों में ज़ंजीरें होंगी, और फ़रिश्ते उन्हें खौलते हुए पानी में घसीटेंगे, फिर उन्हें जहन्नम की आग में झोंका जाएगा। वह दिन बेहद सख़्त होगा, और तब उन्हें साफ़ पता चल जाएगा कि सच्चाई क्या थी, लेकिन वह जानना उनके किसी काम न आएगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने इंसान को आज़ादी दी कि वह सोचे, समझे और सही रास्ता चुने। क़ुरआन और रसूलों का पैग़ाम सिर्फ़ दुनिया की भलाई के लिए नहीं, बल्कि आख़िरत की कामयाबी के लिए भी है। जो लोग इस हिदायत को ठुकराते हैं, वह दरअसल अपने ही नुक़्सान का सामान करते हैं। मगर अल्लाह रहीम है — उसने दरवाज़ा खुला रखा है। जब तक साँसें चल रही हैं, तौबा और रुजूअ की गुंजाइश है। आओ हम क़ुरआन को सच्चे दिल से पढ़ें, उस पर अमल करें, और उस रास्ते को अपनाएँ जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाए। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 68-72 — ग़ाफिर

68هُوَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ فَإِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ
और ताकि तुम (उसकी क़ुदरत को समझो) वह वही (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है, फिर जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस उससे कह देता है कि 'हो जा' तो वह फ़ौरन हो जाता है
69أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ أَنَّىٰ يُصْرَفُونَ
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (की हालत) पर ग़ौर नहीं किया जो ख़ुदा की आयतों में झगड़े निकाला करते हैं
70الَّذِينَ كَذَّبُوا بِالْكِتَابِ وَبِمَا أَرْسَلْنَا بِهِ رُسُلَنَا ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
ये कहाँ भटके चले जा रहे हैं, जिन लोगों ने किताबे (ख़ुदा) और उन बातों को जो हमने पैग़म्बरों को देकर भेजा था झुठलाया तो बहुत जल्द उसका नतीजा उन्हें मालूम हो जाएगा
71إِذِ الْأَغْلَالُ فِي أَعْنَاقِهِمْ وَالسَّلَاسِلُ يُسْحَبُونَ
जब (भारी भारी) तौक़ और ज़ंजीरें उनकी गर्दनों में होंगी (और पहले) खौलते हुए पानी में घसीटे जाएँगे
72فِي الْحَمِيمِ ثُمَّ فِي النَّارِ يُسْجَرُونَ
फिर (जहन्नुम की) आग में झोंक दिए जाएँगे
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अनुवाद — ग़ाफिर 70

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Tuesday, August 18, 2026

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