Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُجَادِلُونَ – झगड़ते हैं, विवाद करते हैं
- آيَاتِ اللَّهِ – अल्लाह की आयतें (कुरआन की आयतें और अल्लाह की निशानियाँ)
- أَنَّى يُصْرَفُونَ – वे कहाँ फेरे जा रहे हैं, यानी सत्य से कैसे हटाए जा रहे हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या आपने उन लोगों पर ग़ौर नहीं किया जो अल्लाह की आयतों में झगड़ते हैं? ये वे लोग हैं जो कुरआन के बारे में कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से नहीं है, और इसकी आयतों को झुठलाते हैं, हालाँकि ये आयतें अल्लाह की एकता (तौहीद), उसकी कुदरत और उसके हिकमत पर सबसे स्पष्ट प्रमाण हैं। ये आयतें इतनी रौशन और साफ़ हैं कि इन्हें समझने के लिए किसी गहरी सोच या जटिल दलील की ज़रूरत नहीं, बस एक खुली आँख और सीधा दिल चाहिए।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "क्या आपने नहीं देखा?" — यानी इस पर हैरानी होती है कि ये लोग इतने साफ़ सच को छोड़कर कहाँ भटक रहे हैं! सच्चाई उनके सामने सूरज की तरह रौशन है, फिर भी वे उससे मुँह मोड़ रहे हैं। वे किस ओर ले जाए जा रहे हैं? किस रास्ते पर उन्हें धकेला जा रहा है? वे सत्य से दूर होकर झूठ, अंधविश्वास और बुतपरस्ती की तरफ़ क्यों खिंचे चले जा रहे हैं?
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि इंसान जब सच को देखकर भी उसे नकारता है, तो उसका दिल कितना कठोर हो चुका होता है। अल्लाह की आयतें — चाहे वो कुरआन की आयतें हों या क़ुदरत के नज़ारे — हर तरफ़ बिखरी पड़ी हैं। आसमान, ज़मीन, रात-दिन का बदलना, इंसान की पैदाइश, ये सब अल्लाह की निशानियाँ हैं। फिर भी कुछ लोग इन पर झगड़ते हैं और इन्हें झुठलाते हैं।
ऐ अल्लाह के बंदो! तू इन आयतों पर झगड़ने वालों में से न बन, बल्कि उन लोगों में से बन जो इन आयतों पर ग़ौर करते हैं, इनसे सबक़ लेते हैं और इनके ज़रिए अपने रब की पहचान हासिल करते हैं। कुरआन की हर आयत तेरे लिए रौशनी है, हर पन्ना तेरे दिल के लिए शिफ़ा है। इसे पढ़, समझ और उस पर अमल कर — यही तेरी कामयाबी का रास्ता है। याद रख, जो लोग अल्लाह की आयतों से मुँह मोड़ते हैं, वे आख़िरकार अपना ही नुक़सान करते हैं, और जो इन्हें थाम लेते हैं, वे सीधे रास्ते पर चलते हैं और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनते हैं।
📜 आयत 67-71 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 69
सूरा ग़ाफिर आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (की हालत) पर ग़ौर…सूरा आयत 69/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 67–71. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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