ग़ाफिर · 69/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ أَنَّىٰ يُصْرَفُونَ ۝٦٩
Alam tara ilal lazeena yujaadiloona feee Aayaatil laahi annaa yusrafoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (की हालत) पर ग़ौर नहीं किया जो ख़ुदा की आयतों में झगड़े निकाला करते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُجَادِلُونَ – झगड़ते हैं, विवाद करते हैं
  • آيَاتِ اللَّهِ – अल्लाह की आयतें (कुरआन की आयतें और अल्लाह की निशानियाँ)
  • أَنَّى يُصْرَفُونَ – वे कहाँ फेरे जा रहे हैं, यानी सत्य से कैसे हटाए जा रहे हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या आपने उन लोगों पर ग़ौर नहीं किया जो अल्लाह की आयतों में झगड़ते हैं? ये वे लोग हैं जो कुरआन के बारे में कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से नहीं है, और इसकी आयतों को झुठलाते हैं, हालाँकि ये आयतें अल्लाह की एकता (तौहीद), उसकी कुदरत और उसके हिकमत पर सबसे स्पष्ट प्रमाण हैं। ये आयतें इतनी रौशन और साफ़ हैं कि इन्हें समझने के लिए किसी गहरी सोच या जटिल दलील की ज़रूरत नहीं, बस एक खुली आँख और सीधा दिल चाहिए।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "क्या आपने नहीं देखा?" — यानी इस पर हैरानी होती है कि ये लोग इतने साफ़ सच को छोड़कर कहाँ भटक रहे हैं! सच्चाई उनके सामने सूरज की तरह रौशन है, फिर भी वे उससे मुँह मोड़ रहे हैं। वे किस ओर ले जाए जा रहे हैं? किस रास्ते पर उन्हें धकेला जा रहा है? वे सत्य से दूर होकर झूठ, अंधविश्वास और बुतपरस्ती की तरफ़ क्यों खिंचे चले जा रहे हैं?

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि इंसान जब सच को देखकर भी उसे नकारता है, तो उसका दिल कितना कठोर हो चुका होता है। अल्लाह की आयतें — चाहे वो कुरआन की आयतें हों या क़ुदरत के नज़ारे — हर तरफ़ बिखरी पड़ी हैं। आसमान, ज़मीन, रात-दिन का बदलना, इंसान की पैदाइश, ये सब अल्लाह की निशानियाँ हैं। फिर भी कुछ लोग इन पर झगड़ते हैं और इन्हें झुठलाते हैं।

ऐ अल्लाह के बंदो! तू इन आयतों पर झगड़ने वालों में से न बन, बल्कि उन लोगों में से बन जो इन आयतों पर ग़ौर करते हैं, इनसे सबक़ लेते हैं और इनके ज़रिए अपने रब की पहचान हासिल करते हैं। कुरआन की हर आयत तेरे लिए रौशनी है, हर पन्ना तेरे दिल के लिए शिफ़ा है। इसे पढ़, समझ और उस पर अमल कर — यही तेरी कामयाबी का रास्ता है। याद रख, जो लोग अल्लाह की आयतों से मुँह मोड़ते हैं, वे आख़िरकार अपना ही नुक़सान करते हैं, और जो इन्हें थाम लेते हैं, वे सीधे रास्ते पर चलते हैं और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनते हैं।



📜 आयत 67-71 — ग़ाफिर

67هُوَ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ يُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ثُمَّ لِتَكُونُوا شُيُوخًا ۚ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ مِن قَبْلُ ۖ وَلِتَبْلُغُوا أَجَلًا مُّسَمًّى وَلَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
वही वह ख़ुदा है जिसने तुमको पहले (पहल) मिटटी से पैदा किया फिर नुत्फे से, फिर जमे हुए ख़ून फिर तुमको बच्चा बनाकर (माँ के पेट) से निकलता है (ताकि बढ़ों) फिर (ज़िन्दा रखता है) ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो फिर (और ज़िन्दा रखता है ताकि तुम बूढ़े हो जाओ और तुममें से कोई ऐसा भी है जो (इससे) पहले मर जाता है ग़रज़ (तुमको उस वक्त तक ज़िन्दा रखता है) की तुम (मौत के) मुकर्रर वक्त तक पहुँच जाओ
68هُوَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ فَإِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُن فَيَكُونُ
और ताकि तुम (उसकी क़ुदरत को समझो) वह वही (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है, फिर जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस उससे कह देता है कि 'हो जा' तो वह फ़ौरन हो जाता है
69أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ أَنَّىٰ يُصْرَفُونَ
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (की हालत) पर ग़ौर नहीं किया जो ख़ुदा की आयतों में झगड़े निकाला करते हैं
70الَّذِينَ كَذَّبُوا بِالْكِتَابِ وَبِمَا أَرْسَلْنَا بِهِ رُسُلَنَا ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
ये कहाँ भटके चले जा रहे हैं, जिन लोगों ने किताबे (ख़ुदा) और उन बातों को जो हमने पैग़म्बरों को देकर भेजा था झुठलाया तो बहुत जल्द उसका नतीजा उन्हें मालूम हो जाएगा
71إِذِ الْأَغْلَالُ فِي أَعْنَاقِهِمْ وَالسَّلَاسِلُ يُسْحَبُونَ
जब (भारी भारी) तौक़ और ज़ंजीरें उनकी गर्दनों में होंगी (और पहले) खौलते हुए पानी में घसीटे जाएँगे
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अनुवाद — ग़ाफिर 69

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Tuesday, August 18, 2026

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