फुस्सिलत · 36/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٣٦
Wa immaa yanzaghannaka minash Shaitaani nazghun fasta`iz billaahi innahoo Huwas Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम्हें शैतान की तरफ से वसवसा पैदा हो तो ख़ुदा की पनाह माँग लिया करो बेशक वह (सबकी) सुनता जानता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَنزَغَنَّكَ – शैतान की ओर से कोई खटक या विक्षोभ पहुँचे।
  • نَزْغٌ – शैतान की वह वसवसा (फुसफुसाहट) जो इंसान को बुराई की ओर उकसाए, जैसे कोई चुभन या धक्का।
  • فَاسْتَعِذْ – अल्लाह की पनाह माँगो।
  • السَّمِيعُ – सब कुछ सुनने वाला।
  • العَلِيمُ – सब कुछ जानने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ और उनके माध्यम से पूरी उम्मत को एक बहुत ही अनमोल नुस्खा सिखा रहा है। जब भी शैतान तुम्हारे दिल में कोई बुरा ख्याल डाले, किसी बुरे काम की तरफ उकसाए, या किसी को बुराई का जवाब बुराई से देने के लिए भड़काए – उसी वक्त तुम अल्लाह की पनाह माँग लो। शैतान का यह काम ऐसा है जैसे वह इंसान को चुभता है, उसे भड़काता है और उसे गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश करता है।

यह नसीहत सिर्फ नबी ﷺ के लिए नहीं, बल्कि हर मोमिन के लिए है। जब भी गुस्सा आए, जब भी दिल में किसी के खिलाफ बदले की भावना पैदा हो, जब भी कोई बुरा ख्याल आए – तो तुरंत "أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ" कहो। यह एक ढाल है जो शैतान के हमलों से बचाती है।

अल्लाह ने यह भी बताया कि वह सुनने वाला है – वह तुम्हारी पनाह माँगने की दुआ को सुनता है, और जानने वाला है – वह तुम्हारी नीयत और हालत को जानता है। जब तुम सच्चे दिल से अल्लाह से पनाह माँगते हो, तो वह ज़रूर तुम्हारी हिफाज़त करता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हम कमज़ोर हैं और शैतान हमारा पुराना दुश्मन है, लेकिन अल्लाह की पनाह सबसे मज़बूत किला है। जो इस किले में दाखिल हो जाए, वह शैतान की शरारतों से महफूज़ रहता है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस नुस्खे को अपनी ज़िंदगी में अपनाए और जब भी शैतान की तरफ से कोई वसवसा महसूस हो, फौरन अल्लाह की पनाह माँगे। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 34-38 — सूरा फुस्सिलत

34وَلَا تَسْتَوِي الْحَسَنَةُ وَلَا السَّيِّئَةُ ۚ ادْفَعْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ فَإِذَا الَّذِي بَيْنَكَ وَبَيْنَهُ عَدَاوَةٌ كَأَنَّهُ وَلِيٌّ حَمِيمٌ
और भलाई बुराई (कभी) बराबर नहीं हो सकती तो (सख्त कलामी का) ऐसे तरीके से जवाब दो जो निहायत अच्छा हो (ऐसा करोगे) तो (तुम देखोगे) जिस में और तुममें दुशमनी थी गोया वह तुम्हारा दिल सोज़ दोस्त है
35وَمَا يُلَقَّاهَا إِلَّا الَّذِينَ صَبَرُوا وَمَا يُلَقَّاهَا إِلَّا ذُو حَظٍّ عَظِيمٍ
ये बात बस उन्हीं लोगों को हासिल हुईहै जो सब्र करने वाले हैं और उन्हीं लोगों को हासिल होती है जो बड़े नसीबवर हैं
36وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और अगर तुम्हें शैतान की तरफ से वसवसा पैदा हो तो ख़ुदा की पनाह माँग लिया करो बेशक वह (सबकी) सुनता जानता है
37وَمِنْ آيَاتِهِ اللَّيْلُ وَالنَّهَارُ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُ ۚ لَا تَسْجُدُوا لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ وَاسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي خَلَقَهُنَّ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
और उसकी (कुदरत की) निशानियों में से रात और दिन और सूरज और चाँद हैं तो तुम लोग न सूरज को सजदा करो और न चाँद को, और अगर तुम ख़ुदा ही की इबादत करनी मंज़ूर रहे तो बस उसी को सजदा करो जिसने इन चीज़ों को पैदा किया है
38فَإِنِ اسْتَكْبَرُوا فَالَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُ بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْأَمُونَ ۩
पस अगर ये लोग सरकशी करें तो (ख़ुदा को भी उनकी परवाह नहीं) वो लोग (फ़रिश्ते) तुम्हारे परवरदिगार की बारगाह में हैं वह रात दिन उसकी तसबीह करते रहते हैं और वह लोग उकताते भी नहीं
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
36आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 36

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Monday, September 28, 2026

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