अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَوْلِيَاء (औलिया): सहायक, मददगार, संरक्षक मित्र।
- يَنصُرُونَهُم (यन्सुरूनहुम): वे उनकी मदद करें।
- مِن دُونِ اللَّهِ (मिन दूनिल्लाह): अल्लाह के सिवा, अल्लाह की पकड़ से बचाने वाला।
- يُضْلِلِ اللَّهُ (युज़लिलिल्लाह): जिसे अल्लाह गुमराह कर दे (उसकी हिदायत छीन ले)।
- سَبِيلٍ (सबील): रास्ता, मार्ग, उपाय।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला क़यामत के दिन काफ़िरों की बदकिस्मती और बेबसी का हाल बयान कर रहा है। वह फ़रमाता है कि जिस दिन अल्लाह उन्हें अज़ाब में डालेगा, उस दिन उनका कोई साथी, कोई रिश्तेदार, कोई मददगार नहीं होगा जो उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सके। दुनिया में जिन लोगों पर वे भरोसा करते थे, जिन्हें अपना हिमायती समझते थे, वे सब उनसे किनारा कर लेंगे। न कोई सिफ़ारिशी होगा, न कोई बचाने वाला। यह उन लोगों के लिए सबसे बड़ी रुसवाई और निहायती मायूसी का दिन होगा।
फिर अल्लाह तआला एक अहम हक़ीक़त बयान करता है: "और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, उसके लिए कोई रास्ता नहीं।" यानी जिस इंसान ने खुद अपने कुफ़्र और ज़ुल्म से अल्लाह की हिदायत को ठुकरा दिया, और अल्लाह ने उसे उसकी हालत पर छोड़ दिया, तो उसके लिए हिदायत का कोई रास्ता बाकी नहीं रहता। न दुनिया में उसे सच्चाई का रास्ता मिलता है, न आख़िरत में जन्नत का। सारे दरवाज़े उस पर बंद कर दिए जाते हैं। क्योंकि हिदायत और गुमराही का मालिक सिर्फ अल्लाह है। जिसे अल्लाह हिदायत दे, कोई उसे गुमराह नहीं कर सकता, और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, कोई उसे हिदायत नहीं दे सकता।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से आगाह करती है कि हमारी नजात (मुक्ति) और कामयाबी सिर्फ अल्लाह के हाथ में है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की राह को पकड़ें, उसकी इबादत करें और उसके बताए हुए रास्ते पर चलें। जो लोग अल्लाह से मुँह मोड़ते हैं और दुनिया के झूठे सहारों पर भरोसा करते हैं, वे क़यामत के दिन बिल्कुल अकेले होंगे। इसलिए आज ही अपने रब से रिश्ता जोड़ लें, उसकी रहमत और हिदायत के तलबगार बनें, क्योंकि अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। जो उसकी तरफ एक कदम बढ़ाता है, अल्लाह उसकी तरफ दौड़कर आता है। यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है कि हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें और उस दिन की शर्मिंदगी से बचें।
📜 आयत 44-48 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 46
सूरा अश-शूरा आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा के सिवा न उनके सरपरस्त ही होंगे जो…सूरा आयत 46/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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