अश-शूरा · 47/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
اسْتَجِيبُوا لِرَبِّكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِيَ يَوْمٌ لَّا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۚ مَا لَكُم مِّن مَّلْجَإٍ يَوْمَئِذٍ وَمَا لَكُم مِّن نَّكِيرٍ ۝٤٧
Istajeeboo li Rabbikum min qabli any yaatiya Yawmul laa maradda lahoo minal laah; maa lakum mim malja iny yawma`izinw wa maa lakum min nakeer
📖 हिंदी अर्थ
(लोगों) उस दिन के पहले जो ख़ुदा की तरफ से आयेगा और किसी तरह (टाले न टलेगा) अपने परवरदिगार का हुक्म मान लो (क्यों कि) उस दिन न तो तुमको कहीं पनाह की जगह मिलेगी और न तुमसे (गुनाह का) इन्कार ही बन पड़ेगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَجِيبُوا: स्वीकार करो, आज्ञा का पालन करो।
  • لَا مَرَدَّ لَهُ: जिसे कोई टाल न सके, जिसका कोई प्रतिकार न हो।
  • مَلْجَإٍ: शरण स्थल, बचाव का ठिकाना।
  • نَكِيرٍ: इनकार, अस्वीकार, (अपने कर्मों से) मुकरना।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! अपने रब की पुकार पर तुरंत लब्बैक कहो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो। यह काम आज ही कर लो, कल पर मत टालो, क्योंकि कल का भरोसा नहीं। वह दिन आने वाला है—क़ियामत का दिन—जिसे अल्लाह ने तय कर रखा है और जिसे कोई रोकने या टालने की ताकत नहीं रखता। जब वह दिन आ जाएगा, तो तुम्हारे पास न कोई छिपने की जगह होगी, न कोई सहारा, न कोई मददगार। तुम अपने किए गए गुनाहों से मुकर भी नहीं सकोगे, क्योंकि उस दिन तुम्हारे हाथ-पैर और ज़माना सब तुम्हारे खिलाफ गवाही देंगे। तुम्हारी ज़ुबान बंद हो जाएगी और तुम्हारे अपने अंग बोल उठेंगे। यह वह दिन होगा जब हर आदमी अपने किए का फल पाएगा—अच्छा हो तो अच्छा, बुरा हो तो बुरा।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है: काम को कल पर मत टालो। आज जो नेक काम कर सकते हो, आज ही कर लो। क्योंकि पता नहीं, कल हो या न हो। कितने लोग हैं जो सोचते हैं कि "अभी वक़्त है, बाद में तौबा कर लेंगे, बाद में नमाज़ पढ़ लेंगे, बाद में अच्छे काम कर लेंगे"—लेकिन मौत का कोई वक़्त तय नहीं। और जब मौत आ जाए, तो फिर पछताने के सिवा कुछ नहीं बचता। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है कि वह हमें मौका दे रहा है, हमें बुला रहा है कि "आओ, मेरी तरफ आओ, मैं तुम्हें माफ कर दूंगा।" यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें आगाह किया, हमें चेतावनी दी, ताकि हम संभल जाएं। कौन जानता है कि अगली सांस आए या न आए? इसलिए इसी पल को गनीमत समझो, इसी पल तौबा कर लो, इसी पल अपने रब की तरफ लौट जाओ। अल्लाह का दरवाजा खुला है, वह बुला रहा है—लेकिन याद रखो, यह दरवाजा हमेशा खुला नहीं रहेगा। जब वह दिन आ जाएगा, तो फिर दरवाजा बंद हो जाएगा और पछतावे के सिवा कुछ हाथ न आएगा।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की राह में देरी करना शैतान का काम है। शैतान हमेशा कहता है, "जल्दी क्या है? अभी तो जवान हो, अभी तो वक़्त है, बाद में कर लेना।" लेकिन अक्लमंद वही है जो आज ही अपने रब की तरफ लौट आए, आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह में लगा दे। क्योंकि कल का भरोसा नहीं, और मौत का कोई ऐलान नहीं। अल्लाह हम सबको यह तौफीक दे कि हम उसकी पुकार पर तुरंत लब्बैक कहें और अपनी ज़िंदगी को उसकी राह में खर्च करें। आमीन।



📜 आयत 45-49 — अश-शूरा

45وَتَرَاهُمْ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا خَاشِعِينَ مِنَ الذُّلِّ يَنظُرُونَ مِن طَرْفٍ خَفِيٍّ ۗ وَقَالَ الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ الْخَاسِرِينَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَأَهْلِيهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا إِنَّ الظَّالِمِينَ فِي عَذَابٍ مُّقِيمٍ
और तुम उनको देखोगे कि दोज़ख़ के सामने लाए गये हैं (और) ज़िल्लत के मारे कटे जाते हैं (और) कनक्खियों से देखे जाते हैं और मोमिनीन कहेंगे कि हकीक़त में वही बड़े घाटे में हैं जिन्होने क़यामत के दिन अपने आप को और अपने घर वालों को ख़सारे में डाला देखो ज़ुल्म करने वाले दाएमी अज़ाब में रहेंगे
46وَمَا كَانَ لَهُم مِّنْ أَوْلِيَاءَ يَنصُرُونَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ ۗ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن سَبِيلٍ
और ख़ुदा के सिवा न उनके सरपरस्त ही होंगे जो उनकी मदद को आएँ और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसके लिए (हिदायत की) कोई राह नहीं
47اسْتَجِيبُوا لِرَبِّكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِيَ يَوْمٌ لَّا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۚ مَا لَكُم مِّن مَّلْجَإٍ يَوْمَئِذٍ وَمَا لَكُم مِّن نَّكِيرٍ
(लोगों) उस दिन के पहले जो ख़ुदा की तरफ से आयेगा और किसी तरह (टाले न टलेगा) अपने परवरदिगार का हुक्म मान लो (क्यों कि) उस दिन न तो तुमको कहीं पनाह की जगह मिलेगी और न तुमसे (गुनाह का) इन्कार ही बन पड़ेगा
48فَإِنْ أَعْرَضُوا فَمَا أَرْسَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا ۖ إِنْ عَلَيْكَ إِلَّا الْبَلَاغُ ۗ وَإِنَّا إِذَا أَذَقْنَا الْإِنسَانَ مِنَّا رَحْمَةً فَرِحَ بِهَا ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ فَإِنَّ الْإِنسَانَ كَفُورٌ
फिर अगर मुँह फेर लें तो (ऐ रसूल) हमने तुमको उनका निगेहबान बनाकर नहीं भेजा तुम्हारा काम तो सिर्फ (एहकाम का) पहुँचा देना है और जब हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखाते हैं तो वह उससे ख़ुश हो जाता है और अगर उनको उन्हीं के हाथों की पहली करतूतों की बदौलत कोई तकलीफ पहुँचती (सब एहसान भूल गए) बेशक इन्सान बड़ा नाशुक्रा है
49لِّلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ يَهَبُ لِمَن يَشَاءُ إِنَاثًا وَيَهَبُ لِمَن يَشَاءُ الذُّكُورَ
सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत ख़ास ख़ुदा ही की है जो चाहता है पैदा करता है (और) जिसे चाहता है (फ़क़त) बेटियाँ देता है और जिसे चाहता है (महज़) बेटा अता करता है
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अनुवाद — अश-शूरा 47

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Tuesday, August 18, 2026

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