अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَاشِعِينَ: झुके हुए, अपमानित, डरे हुए
- مِنَ الذُّلِّ: अपमान और ज़िल्लत के कारण
- مِن طَرْفٍ خَفِيٍّ: छिपी नज़र से, चोरी-छिपे देखना (जैसे कोई डर के मारे कत्ल किए जाने वाला जल्लाद की तरफ़ देखता है)
- خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ: अपने आप को नुक़सान में डाला
- عَذَابٍ مُّقِيمٍ: स्थायी और कभी न ख़त्म होने वाला अज़ाब
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप उस दिन उन ज़ालिमों को देखेंगे जब वे आग के सामने पेश किए जाएँगे। वे इतने अपमानित और दबे हुए होंगे कि उनकी आँखें नीची होंगी, और वे डर के मारे आग की तरफ़ चोरी-छिपे देखेंगे — बिल्कुल उस तरह जैसे कोई मौत की सज़ा पाने वाला जल्लाद की तरफ़ देखता है। उनकी यह हालत देखकर ईमान वाले जो जन्नत में होंगे, वे कहेंगे: "असली नुक़सान उठाने वाले तो वही हैं जिन्होंने आज अपने आप को और अपने घरवालों को जहन्नम की आग में झोंक दिया।" यानी जो लोग दुनिया में ईमान नहीं लाए, उन्होंने अपनी जानें तो ग़ारत की ही, साथ ही उन जन्नती हूरों और नेमतों से भी महरूम रहे जो उनके लिए तैयार थीं अगर वे ईमान लाते।
फिर अल्लाह तआला ख़ुद फ़रमाता है: "सुन लो! यक़ीनन ज़ालिम (काफ़िर और मुशरिक) लोग ऐसे अज़ाब में हैं जो कभी ख़त्म नहीं होगा, न उन्हें उससे राहत मिलेगी और न ही वे उससे बाहर निकल सकेंगे।"
दावती पहलू:
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आज हम दुनिया की चमक-दमक में इतने खोए हुए हैं कि उस दिन की हक़ीक़त को भूल गए हैं। जिस दिन हर इंसान अपने आमाल के साथ पेश होगा, वहाँ कोई रिश्तेदारी काम नहीं आएगी, न दौलत और न औलाद। आज का हर ज़ालिम — चाहे वह कितना भी ताक़तवर क्यों न हो — उस दिन इतना बेबस और ज़लील होगा कि वह आग की तरफ़ देखने की हिम्मत भी नहीं कर पाएगा।
यह आयत हमें दो चीज़ें सिखाती है: पहली, हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और ज़ुल्म व नाइंसाफ़ी से बचना चाहिए, क्योंकि ज़ुल्म का अंजाम सिर्फ़ उस दिन के लिए नहीं, बल्कि हमेशा के लिए तबाही है। दूसरी, हमें अपने घरवालों और बच्चों की इस्लाह की फ़िक्र करनी चाहिए, ताकि क़यामत के दिन हम उन लोगों में न हों जो अपने अहल-ओ-अयाल को भी अपने साथ जहन्नम में ले जाएँ।
रहमत के मालिक ने हमें यह दुनिया इम्तिहान के लिए दी है, और रास्ता भी दिखा दिया है। जो लोग उस रास्ते पर चलेंगे, वे उस दिन की रुसवाई से बच जाएँगे और उन्हें वह इनाम मिलेगा जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो उस दिन खुशहाल होंगे, न कि उनमें जो पछतावे के सिवा कुछ हासिल नहीं करेंगे। आमीन।
📜 आयत 43-47 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 45
सूरा अश-शूरा आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम उनको देखोगे कि दोज़ख़ के सामने लाए गये…सूरा आयत 45/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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