Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
يا मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह के बुलाने वाले (पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पुकार पर लब्बैक कहो, यानी उनकी दावत को क़बूल करो और अल्लाह पर ईमान लाओ। अगर तुम ऐसा करोगे तो अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को माफ़ कर देगा और तुम्हें दर्दनाक अज़ाब से बचा लेगा।
शब्दों के अर्थ:
- दाइयल्लाह: अल्लाह की तरफ़ बुलाने वाला, यानी पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)।
- अजीबू: पुकार पर जवाब देना, क़बूल करना, मान लेना।
- यग़फिर: माफ़ कर देगा, ढक देगा।
- युजिरकुम: बचा लेगा, पनाह देगा, सुरक्षित कर लेगा।
- अज़ाबुन अलीम: बहुत दर्दनाक और तकलीफ़देह सज़ा।
तफ़सीर:
यह आयत उन नेक जिन्नों के क़ौल को बयान करती है जिन्होंने पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की तिलावत सुनी और अपनी क़ौम की तरफ़ लौटकर उन्हें ईमान की दावत दी। वे कह रहे हैं: "ऐ हमारी क़ौम के लोगो! उस रसूल की बात मानो जो अल्लाह की तरफ़ बुला रहा है, और उस पर ईमान लाओ। अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को माफ़ कर देगा और तुम्हें उस दर्दनाक अज़ाब से बचा लेगा जो काफ़िरों के लिए तैयार किया गया है।"
इस आयत में दो बड़ी ख़ुशख़बरियाँ हैं: एक यह कि ईमान लाने पर गुनाहों की माफ़ी मिलती है, और दूसरी यह कि जहन्नुम के अज़ाब से निजात मिलती है। यहाँ "मिन ज़ुनूबिकुम" का मतलब यह है कि अल्लाह उन गुनाहों को माफ़ करेगा जो सिर्फ़ उसके हक़ से जुड़े हैं, लेकिन बंदों के हक़ (ज़ुल्म, चोरी, ग़ीबत वगैरह) उसी बंदे की माफ़ी के बिना माफ़ नहीं होंगे। यह अल्लाह का बहुत बड़ा फज़ल है कि वह अपने बंदों को इतनी आसान शर्त पर — सिर्फ़ ईमान और दावत को क़बूल करने पर — अपनी रहमत का वादा देता है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आवाज़ आज भी हर उस इंसान के कानों तक पहुँच रही है जो सच्चाई की तलाश में है। अल्लाह का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला है। जो शख्स एक बार ईमान ले आए, उसकी पिछली ज़िंदगी के गुनाह अल्लाह की रहमत से माफ़ हो जाते हैं और वह जहन्नुम के अज़ाब से बचकर जन्नत की तरफ़ रवाना हो जाता है। यह कितनी बड़ी नेअमत है! अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको अपने दीन पर साबित-क़दम रखे और हमें उस दर्दनाक अज़ाब से बचाकर अपनी जन्नत का मेहमान बनाए। आमीन।
📜 आयत 29-33 — सूरा अल-अहकाफ
अनुवाद — अल-अहकाफ 31
सूरा अल-अहकाफ आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ हमारी क़ौम ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात…सूरा आयत 31/35 — सूरा अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहकाफ सुनें, सूरा अल-अहकाफ अनुवाद, सूरा अल-अहकाफ mp3, सूरा अल-अहकाफ pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहकाफ
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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