अल-अहकाफ · 30/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
قَالُوا يَا قَوْمَنَا إِنَّا سَمِعْنَا كِتَابًا أُنزِلَ مِن بَعْدِ مُوسَىٰ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ يَهْدِي إِلَى الْحَقِّ وَإِلَىٰ طَرِيقٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝٣٠
Qaaloo yaa qawmanaaa innaa sami`naa Kitaaban unzila mim ba`di Moosa musaddiqal limaa baina yadihi yahdeee ilal haqqi wa ilaa Tareeqim Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
कि (उनको अज़ाब से) डराएं तो उन से कहना शुरू किया कि ऐ भाइयों हम एक किताब सुन आए हैं जो मूसा के बाद नाज़िल हुई है (और) जो किताबें, पहले (नाज़िल हुयीं) हैं उनकी तसदीक़ करती हैं सच्चे (दीन) और सीधी राह की हिदायत करती हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • किताब: पुस्तक, यहाँ अर्थ है क़ुरआन।
  • मुसद्दिक़न: सत्यापित करने वाला, पुष्टि करने वाला।
  • मा बैना यदैहि: जो उसके सामने है, अर्थात पिछली आसमानी किताबें (तौरात)।
  • अल-हक़: सत्य, सही बात।
  • तरीक़ मुस्तक़ीम: सीधा और सही रास्ता।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब जिन्नों के एक समूह ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से क़ुरआन की आयतें सुनीं, तो वे उससे बहुत प्रभावित हुए और अपनी क़ौम के पास लौटकर उन्हें यह संदेश देने लगे। उन्होंने कहा: "ऐ हमारी क़ौम! हमने एक अद्भुत किताब सुनी है जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के बाद उतारी गई है। यह किताब उन सभी पिछली किताबों की पुष्टि करती है जो अल्लाह ने अपने नबियों पर उतारी थीं, विशेष रूप से तौरात की। यह किताब लोगों को सत्य की ओर मार्गदर्शन करती है और उन्हें सीधे रास्ते पर चलने की शिक्षा देती है।"

यह किताब (क़ुरआन) केवल एक साधारण पुस्तक नहीं है, बल्कि यह वह प्रकाश है जो अंधकार से निकालकर उजाले की ओर ले जाता है। यह हर उस व्यक्ति के लिए मार्गदर्शन है जो सत्य की खोज में है। यह उन्हें अल्लाह की ओर बुलाती है, उसके आदेशों का पालन करने की शिक्षा देती है, और उन्हें उस सीधे रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है जो उन्हें अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत तक पहुँचाता है।

यह वही रास्ता है जो इस्लाम है—एक ऐसा रास्ता जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई देता है। यह रास्ता अल्लाह की इबादत, उसके रसूल की पैरवी, और अच्छे कर्मों की ओर ले जाता है। यह वह रास्ता है जो इंसान को जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की ओर ले जाता है।

दावत का पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि जब सत्य हमारे सामने आए, तो हमें उसे खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए, जैसे उन जिन्नों ने किया। उन्होंने क़ुरआन सुनते ही उसे पहचान लिया और अपनी क़ौम को भी उसकी ओर बुलाया। यह हमारे लिए एक सबक है कि हम भी क़ुरआन को पढ़ें, समझें, और उस पर अमल करें। क़ुरआन वह किताब है जो हमें हर अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाती है। यह हमें सीधा रास्ता दिखाती है और हमें उस सच्चाई से मिलाती है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देती है।

अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 28-32 — अल-अहकाफ

28فَلَوْلَا نَصَرَهُمُ الَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ قُرْبَانًا آلِهَةً ۖ بَلْ ضَلُّوا عَنْهُمْ ۚ وَذَٰلِكَ إِفْكُهُمْ وَمَا كَانُوا يَفْتَرُونَ
तो ख़ुदा के सिवा जिन को उन लोगों ने तक़र्रुब (ख़ुदा) के लिए माबूद बना रखा था उन्होंने (अज़ाब के वक्त) उनकी क्यों न मदद की बल्कि वह तो उनसे ग़ायब हो गये और उनके झूठ और उनकी (इफ़तेरा) परदाज़ियों की ये हक़ीक़त थी
29وَإِذْ صَرَفْنَا إِلَيْكَ نَفَرًا مِّنَ الْجِنِّ يَسْتَمِعُونَ الْقُرْآنَ فَلَمَّا حَضَرُوهُ قَالُوا أَنصِتُوا ۖ فَلَمَّا قُضِيَ وَلَّوْا إِلَىٰ قَوْمِهِم مُّنذِرِينَ
और जब हमने जिनों में से कई शख़्शों को तुम्हारी तरफ मुतावज्जे किया कि वह दिल लगाकर क़ुरान सुनें तो जब उनके पास हाज़िर हुए तो एक दुसरे से कहने लगे ख़ामोश बैठे (सुनते) रहो फिर जब (पढ़ना) तमाम हुआ तो अपनी क़ौम की तरफ़ वापस गए
30قَالُوا يَا قَوْمَنَا إِنَّا سَمِعْنَا كِتَابًا أُنزِلَ مِن بَعْدِ مُوسَىٰ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ يَهْدِي إِلَى الْحَقِّ وَإِلَىٰ طَرِيقٍ مُّسْتَقِيمٍ
कि (उनको अज़ाब से) डराएं तो उन से कहना शुरू किया कि ऐ भाइयों हम एक किताब सुन आए हैं जो मूसा के बाद नाज़िल हुई है (और) जो किताबें, पहले (नाज़िल हुयीं) हैं उनकी तसदीक़ करती हैं सच्चे (दीन) और सीधी राह की हिदायत करती हैं
31يَا قَوْمَنَا أَجِيبُوا دَاعِيَ اللَّهِ وَآمِنُوا بِهِ يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُجِرْكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ
ऐ हमारी क़ौम ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात मानों और ख़ुदा पर ईमान लाओ वह तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और (क़यामत) में तुम्हें दर्दनाक अज़ाब से पनाह में रखेगा
32وَمَن لَّا يُجِبْ دَاعِيَ اللَّهِ فَلَيْسَ بِمُعْجِزٍ فِي الْأَرْضِ وَلَيْسَ لَهُ مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءُ ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
और जिसने ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात न मानी तो (याद रहे कि) वह (ख़ुदा को रूए) ज़मीन में आजिज़ नहीं कर सकता और न उस के सिवा कोई सरपरस्त होगा यही लोग गुमराही में हैं
अल-अहकाफकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अहकाफ 30

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सूरा आयत 30/35 — अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहकाफ सुनें, अल-अहकाफ अनुवाद, अल-अहकाफ mp3, अल-अहकाफ pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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