अल-अहकाफ · 32/35
अनुवाद उच्चारण — अल-अहकाफ
وَمَن لَّا يُجِبْ دَاعِيَ اللَّهِ فَلَيْسَ بِمُعْجِزٍ فِي الْأَرْضِ وَلَيْسَ لَهُ مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءُ ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ۝٣٢
Wa mal laa yujib daa`iyal laahi falaisa bimu`jizin fil ardi wa laisa lahoo min dooniheee awliyaaa`; ulaaa ika fee dalaalim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और जिसने ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात न मानी तो (याद रहे कि) वह (ख़ुदा को रूए) ज़मीन में आजिज़ नहीं कर सकता और न उस के सिवा कोई सरपरस्त होगा यही लोग गुमराही में हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يُجِبْ – जवाब न दे, स्वीकार न करे
  • دَاعِيَ اللَّهِ – अल्लाह की ओर बुलाने वाला (अर्थात पैगंबर मुहम्मद ﷺ)
  • بِمُعْجِزٍ – अल्लाह को विवश करने वाला, काबू से बाहर निकल जाने वाला
  • أَوْلِيَاءُ – सहायक, मददगार, रक्षक
  • ضَلَالٍ مُّبِينٍ – स्पष्ट पथभ्रष्टता, खुला गुमराही

विस्तृत तफसीर:

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह के रसूल ﷺ की पुकार को अनसुना कर देते हैं और सत्य की ओर बुलाए जाने पर अपने कान बंद कर लेते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि जो व्यक्ति उस दावत को कबूल नहीं करता जो अल्लाह की ओर से उसके पैगंबर ﷺ के माध्यम से दी जा रही है, वह समझ ले कि वह अल्लाह को हरा नहीं सकता। वह धरती में भागकर कहीं नहीं जा सकता, न ही आसमान की तरफ उड़कर अल्लाह की पकड़ से बच सकता है। अल्लाह की कुदरत और उसकी पकड़ से बचने की कोई सूरत नहीं है।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐसे लोगों के लिए अल्लाह के सिवा कोई और सहायक नहीं होगा। उनके वे सारे "मददगार" जिन पर वे भरोसा किए हुए थे – चाहे वे मूर्तियाँ हों, बुज़ुर्ग हों, या दुनिया के ताकतवर लोग – क़ियामत के दिन उनके किसी काम न आएंगे। जब अल्लाह का अज़ाब आएगा, तो कोई उन्हें बचाने वाला नहीं होगा।

अंत में अल्लाह फरमाता है कि ऐसे लोग खुली गुमराही में हैं। यानी उनका यह रास्ता बिल्कुल साफ़ गलत है, कोई शुबहा नहीं, कोई संदेह नहीं। उनकी गुमराही इतनी स्पष्ट है जैसे दिन की रोशनी में कोई रास्ता भटक जाए।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी खुशखबरी देती है कि अल्लाह का दीन सच्चा है और उसका रसूल ﷺ सच्चा है। जो लोग इस दावत को कबूल कर लेते हैं, वे अल्लाह की रहमत और हिफाज़त में आ जाते हैं। उन्हें किसी और की ज़रूरत नहीं रहती। अल्लाह उनका रक्षक बन जाता है, और जिसका रक्षक अल्लाह हो, उसे किसी का डर नहीं। यह आयत हमें बताती है कि सच्चाई का रास्ता साफ़ है – जो इसे पकड़ ले, वह कामयाब है, और जो इसे छोड़ दे, वह खुद अपने ऊपर ज़ुल्म करता है। अल्लाह तआला ने अपने रसूल ﷺ को पूरी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा है। यह हमारी सबसे बड़ी खुशनसीबी है कि हमें यह दावत मिली और हम उस पर अमल कर रहे हैं। आइए हम इस नेमत की कद्र करें और दूसरों तक भी यही पैगाम पहुँचाएँ, ताकि वे भी अल्लाह की रहमत और हिफाज़त में आ सकें।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — अल-अहकाफ

30قَالُوا يَا قَوْمَنَا إِنَّا سَمِعْنَا كِتَابًا أُنزِلَ مِن بَعْدِ مُوسَىٰ مُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ يَهْدِي إِلَى الْحَقِّ وَإِلَىٰ طَرِيقٍ مُّسْتَقِيمٍ
कि (उनको अज़ाब से) डराएं तो उन से कहना शुरू किया कि ऐ भाइयों हम एक किताब सुन आए हैं जो मूसा के बाद नाज़िल हुई है (और) जो किताबें, पहले (नाज़िल हुयीं) हैं उनकी तसदीक़ करती हैं सच्चे (दीन) और सीधी राह की हिदायत करती हैं
31يَا قَوْمَنَا أَجِيبُوا دَاعِيَ اللَّهِ وَآمِنُوا بِهِ يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُجِرْكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ
ऐ हमारी क़ौम ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात मानों और ख़ुदा पर ईमान लाओ वह तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और (क़यामत) में तुम्हें दर्दनाक अज़ाब से पनाह में रखेगा
32وَمَن لَّا يُجِبْ دَاعِيَ اللَّهِ فَلَيْسَ بِمُعْجِزٍ فِي الْأَرْضِ وَلَيْسَ لَهُ مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءُ ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
और जिसने ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात न मानी तो (याद रहे कि) वह (ख़ुदा को रूए) ज़मीन में आजिज़ नहीं कर सकता और न उस के सिवा कोई सरपरस्त होगा यही लोग गुमराही में हैं
33أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّ اللَّهَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَلَمْ يَعْيَ بِخَلْقِهِنَّ بِقَادِرٍ عَلَىٰ أَن يُحْيِيَ الْمَوْتَىٰ ۚ بَلَىٰ إِنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
क्या इन लोगों ने ये ग़ौर नहीं किया कि जिस ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को पैदा किया और उनके पैदा करने से ज़रा भी थका नहीं वह इस बात पर क़ादिर है कि मुर्दो को ज़िन्दा करेगा हाँ (ज़रूर) वह हर चीज़ पर क़ादिर है
34وَيَوْمَ يُعْرَضُ الَّذِينَ كَفَرُوا عَلَى النَّارِ أَلَيْسَ هَٰذَا بِالْحَقِّ ۖ قَالُوا بَلَىٰ وَرَبِّنَا ۚ قَالَ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
जिस दिन कुफ्फ़ार (जहन्नुम की) आग के सामने पेश किए जाएँगे (तो उन से पूछा जाएगा) क्या अब भी ये बरहक़ नहीं है वह लोग कहेंगे अपने परवरदिगार की क़सम हाँ (हक़ है) ख़ुदा फ़रमाएगा तो लो अब अपने इन्कार व कुफ्र के बदले अज़ाब के मज़े चखो
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अनुवाद — अल-अहकाफ 32

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Tuesday, August 18, 2026

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