अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا يُجِبْ – जवाब न दे, स्वीकार न करे
- دَاعِيَ اللَّهِ – अल्लाह की ओर बुलाने वाला (अर्थात पैगंबर मुहम्मद ﷺ)
- بِمُعْجِزٍ – अल्लाह को विवश करने वाला, काबू से बाहर निकल जाने वाला
- أَوْلِيَاءُ – सहायक, मददगार, रक्षक
- ضَلَالٍ مُّبِينٍ – स्पष्ट पथभ्रष्टता, खुला गुमराही
विस्तृत तफसीर:
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह के रसूल ﷺ की पुकार को अनसुना कर देते हैं और सत्य की ओर बुलाए जाने पर अपने कान बंद कर लेते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि जो व्यक्ति उस दावत को कबूल नहीं करता जो अल्लाह की ओर से उसके पैगंबर ﷺ के माध्यम से दी जा रही है, वह समझ ले कि वह अल्लाह को हरा नहीं सकता। वह धरती में भागकर कहीं नहीं जा सकता, न ही आसमान की तरफ उड़कर अल्लाह की पकड़ से बच सकता है। अल्लाह की कुदरत और उसकी पकड़ से बचने की कोई सूरत नहीं है।
फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐसे लोगों के लिए अल्लाह के सिवा कोई और सहायक नहीं होगा। उनके वे सारे "मददगार" जिन पर वे भरोसा किए हुए थे – चाहे वे मूर्तियाँ हों, बुज़ुर्ग हों, या दुनिया के ताकतवर लोग – क़ियामत के दिन उनके किसी काम न आएंगे। जब अल्लाह का अज़ाब आएगा, तो कोई उन्हें बचाने वाला नहीं होगा।
अंत में अल्लाह फरमाता है कि ऐसे लोग खुली गुमराही में हैं। यानी उनका यह रास्ता बिल्कुल साफ़ गलत है, कोई शुबहा नहीं, कोई संदेह नहीं। उनकी गुमराही इतनी स्पष्ट है जैसे दिन की रोशनी में कोई रास्ता भटक जाए।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी खुशखबरी देती है कि अल्लाह का दीन सच्चा है और उसका रसूल ﷺ सच्चा है। जो लोग इस दावत को कबूल कर लेते हैं, वे अल्लाह की रहमत और हिफाज़त में आ जाते हैं। उन्हें किसी और की ज़रूरत नहीं रहती। अल्लाह उनका रक्षक बन जाता है, और जिसका रक्षक अल्लाह हो, उसे किसी का डर नहीं। यह आयत हमें बताती है कि सच्चाई का रास्ता साफ़ है – जो इसे पकड़ ले, वह कामयाब है, और जो इसे छोड़ दे, वह खुद अपने ऊपर ज़ुल्म करता है। अल्लाह तआला ने अपने रसूल ﷺ को पूरी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा है। यह हमारी सबसे बड़ी खुशनसीबी है कि हमें यह दावत मिली और हम उस पर अमल कर रहे हैं। आइए हम इस नेमत की कद्र करें और दूसरों तक भी यही पैगाम पहुँचाएँ, ताकि वे भी अल्लाह की रहमत और हिफाज़त में आ सकें।
📜 आयत 30-34 — अल-अहकाफ
अनुवाद — अल-अहकाफ 32
सूरा अल-अहकाफ आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिसने ख़ुदा की तरफ बुलाने वाले की बात न…सूरा आयत 32/35 — अल-अहकाफ الأحقاف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहकाफ सुनें, अल-अहकाफ अनुवाद, अल-अहकाफ mp3, अल-अहकाफ pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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