मुहम्मद · 11/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ مَوْلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَأَنَّ الْكَافِرِينَ لَا مَوْلَىٰ لَهُمْ ۝١١
Zaalika bi annal laaha mawlal lazeena aamanoo wa annal kaafireena laa mawlaa lahum
📖 हिंदी अर्थ
ये इस वजह से कि ईमानदारों का ख़ुदा सरपरस्त है और काफिरों का हरगिज़ कोई सरपरस्त नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَوْلَى (मौला): संरक्षक, सहायक, मित्र और मददगार।
  • لَا مَوْلَى لَهُمْ (ला मौला लहुम): उनका कोई संरक्षक या सहायक नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान सत्य को स्पष्ट करती है जो ईमान और कुफ्र के बीच के फर्क को उजागर करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह जो कुछ भी हुआ — यानी मोमिनों की मदद और काफ़िरों की रुसवाई — यह इसलिए है कि अल्लाह उन लोगों का मौला (संरक्षक और सहायक) है जो ईमान लाए। वह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता, न दुनिया में और न आख़िरत में। जब कोई बंदा अल्लाह पर भरोसा करता है और उसकी राह पर चलता है, तो अल्लाह उसका हाथ थाम लेता है, उसे मुश्किलों से निकालता है और दुश्मनों के मुकाबले में उसे कामयाबी देता है।

दूसरी ओर, काफ़िरों का कोई मौला नहीं — उनका कोई संरक्षक नहीं जो उन्हें बचा सके, न कोई सहायक जो उनकी मदद कर सके। वे अपनी ताकत, अपनी साजिशों और अपने धन-दौलत पर भरोसा करते हैं, लेकिन यह सब उन्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकता। जब अल्लाह की मदद मोमिनों के साथ होती है, तो काफ़िरों की सारी ताकत बेकार हो जाती है।

यहाँ "मौला" से मुराद मदद और नुसरत की वलायत है, न कि अल्लाह की मालिकियत की वलायत — क्योंकि सारे इंसान चाहे मोमिन हों या काफ़िर, अल्लाह के बंदे हैं और उसी की मिल्कियत में हैं। लेकिन जो लोग ईमान लाते हैं, अल्लाह उनका ख़ास संरक्षक बनता है, उनकी हिफ़ाज़त करता है और उन्हें कामयाबी की राह दिखाता है।

दावती पहलू:

यह आयत हर मोमिन के दिल को सुकून देती है कि चाहे दुनिया में कितनी भी मुश्किलें आएँ, अल्लाह उसके साथ है। जब अल्लाह किसी का मौला हो, तो उसे किसी और की ज़रूरत नहीं। यही वजह है कि इतिहास में कमज़ोर मुसलमानों ने ताकतवर दुश्मनों को हराया — क्योंकि उनका भरोसा अल्लाह पर था, न कि अपनी ताकत पर। यह हमें सिखाता है कि हम अपने जीवन में अल्लाह से जुड़े रहें, उसकी राह पर चलें, और यक़ीन रखें कि जो अल्लाह का साथी बन जाए, अल्लाह उसका साथी बन जाता है। काफ़िरों की सारी ताकत और साजिशें अल्लाह की मदद के आगे बेकार हैं। यही ईमान की ताकत है — यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — मुहम्मद

9ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَرِهُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इसलिए कि ख़ुदा ने जो चीज़ नाज़िल फ़रमायी उसे उन्होने (नापसन्द किया) तो ख़ुदा ने उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया
10۞ أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ دَمَّرَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ ۖ وَلِلْكَافِرِينَ أَمْثَالُهَا
तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं तो देखते जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या (ख़राब) हुआ कि ख़ुदा ने उन पर तबाही डाल दी और इसी तरह (उन) काफिरों को भी (सज़ा मिलेगी)
11ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ مَوْلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَأَنَّ الْكَافِرِينَ لَا مَوْلَىٰ لَهُمْ
ये इस वजह से कि ईमानदारों का ख़ुदा सरपरस्त है और काफिरों का हरगिज़ कोई सरपरस्त नहीं
12إِنَّ اللَّهَ يُدْخِلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا يَتَمَتَّعُونَ وَيَأْكُلُونَ كَمَا تَأْكُلُ الْأَنْعَامُ وَالنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ
ख़ुदा उन लोगों को जो ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे ज़रूर बेहिश्त के उन बाग़ों में जा पहुँचाएगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं और जो काफ़िर हैं वह (दुनिया में) चैन करते हैं और इस तरह (बेफिक्री से खाते (पीते) हैं जैसे चारपाए खाते पीते हैं और आख़िर) उनका ठिकाना जहन्नुम है
13وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ هِيَ أَشَدُّ قُوَّةً مِّن قَرْيَتِكَ الَّتِي أَخْرَجَتْكَ أَهْلَكْنَاهُمْ فَلَا نَاصِرَ لَهُمْ
और जिस बस्ती से तुम लोगों ने निकाल दिया उससे ज़ोर में कहीं बढ़ चढ़ के बहुत सी बस्तियाँ थीं जिनको हमने तबाह बर्बाद कर दिया तो उनका कोई मददगार भी न हुआ
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अनुवाद — मुहम्मद 11

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Tuesday, August 18, 2026

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