अल-हुजुरात · 15/18
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हुजुरात
إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ثُمَّ لَمْ يَرْتَابُوا وَجَاهَدُوا بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الصَّادِقُونَ ۝١٥
Innamal muu`minoonal lazeena aamanoo billaahi wa Rasoolihee summa lam yartaaboo wa jaahadoo biamwaalihim wa anfusihim fee sabeelil laah; ulaaaika humus saadiqoon
📖 हिंदी अर्थ
(सच्चे मोमिन) तो बस वही हैं जो ख़ुदा और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होंने उसमें किसी तरह का शक़ शुबह न किया और अपने माल से और अपनी जानों से ख़ुदा की राह में जेहाद किया यही लोग (दावाए ईमान में) सच्चे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَمْ يَرْتَابُوا – उन्होंने कोई संदेह नहीं किया, उनके दिलों में कोई शक नहीं पैदा हुआ।
  • وَجَاهَدُوا – उन्होंने भरपूर प्रयास और संघर्ष किया।
  • بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ – अपने धन और अपनी जान से।
  • فِي سَبِيلِ اللَّهِ – अल्लाह के रास्ते में।
  • الصَّادِقُونَ – सच्चे लोग, जिनका दावा सच्चाई पर आधारित हो।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने सच्चे ईमानवालों की पहचान बयान की है। वह कहते हैं कि असली मोमिन वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाए, फिर उनके दिलों में कभी कोई शक या संदेह पैदा नहीं हुआ। उनका ईमान पक्का और स्थिर है, जिसमें किसी प्रकार की हिचकिचाहट या झिझक नहीं।

फिर उनकी दूसरी विशेषता बताई गई कि उन्होंने अपने धन और अपनी जान से अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया। उन्होंने अपनी दौलत को अल्लाह की राह में खर्च किया और अपनी जान को भी उसकी राह में कुर्बान करने से पीछे नहीं हटे। उन्होंने न तो धन बचाने में कंजूसी की और न ही जान देने में डर दिखाया।

यही लोग हैं जो अपने ईमान के दावे में सच्चे हैं। जो लोग केवल ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं लेकिन उनके दिलों में शक हो और वे अल्लाह की राह में अपना धन और जान खर्च करने से कतराएँ, वे सच्चे मोमिन नहीं हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल का सबूत है। जब ईमान सच्चा होता है तो वह इंसान के अंदर जोश और जुनून पैदा करता है कि वह अपनी सबसे प्यारी चीज़ें — धन और जान — अल्लाह की राह में खर्च कर दे।

प्यारे भाइयो और बहनो! आइए हम अपने ईमान को सिर्फ़ दावे तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने अमल से साबित करें। अपने धन से अल्लाह की राह में खर्च करें, अपने समय से, अपनी ताकत से और अपनी जान से भी अल्लाह की राह में काम करें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह के यहाँ सच्चा और कामयाब बनाता है। अल्लाह हमें सच्चे ईमान वालों में शामिल करे। आमीन।



📜 आयत 13-17 — सूरा अल-हुजुरात

13يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن ذَكَرٍ وَأُنثَىٰ وَجَعَلْنَاكُمْ شُعُوبًا وَقَبَائِلَ لِتَعَارَفُوا ۚ إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ اللَّهِ أَتْقَاكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ
लोगों हमने तो तुम सबको एक मर्द और एक औरत से पैदा किया और हम ही ने तुम्हारे कबीले और बिरादरियाँ बनायीं ताकि एक दूसरे की शिनाख्त करे इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक तुम सबमें बड़ा इज्ज़तदार वही है जो बड़ा परहेज़गार हो बेशक ख़ुदा बड़ा वाक़िफ़कार ख़बरदार है
14۞ قَالَتِ الْأَعْرَابُ آمَنَّا ۖ قُل لَّمْ تُؤْمِنُوا وَلَٰكِن قُولُوا أَسْلَمْنَا وَلَمَّا يَدْخُلِ الْإِيمَانُ فِي قُلُوبِكُمْ ۖ وَإِن تُطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ لَا يَلِتْكُم مِّنْ أَعْمَالِكُمْ شَيْئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
अरब के देहाती कहते हैं कि हम ईमान लाए (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम ईमान नहीं लाए बल्कि (यूँ) कह दो कि इस्लाम लाए हालॉकि ईमान का अभी तक तुम्हारे दिल में गुज़र हुआ ही नहीं और अगर तुम ख़ुदा की और उसके रसूल की फरमाबरदारी करोगे तो ख़ुदा तुम्हारे आमाल में से कुछ कम नहीं करेगा - बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
15إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ثُمَّ لَمْ يَرْتَابُوا وَجَاهَدُوا بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الصَّادِقُونَ
(सच्चे मोमिन) तो बस वही हैं जो ख़ुदा और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होंने उसमें किसी तरह का शक़ शुबह न किया और अपने माल से और अपनी जानों से ख़ुदा की राह में जेहाद किया यही लोग (दावाए ईमान में) सच्चे हैं
16قُلْ أَتُعَلِّمُونَ اللَّهَ بِدِينِكُمْ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
(ऐ रसूल इनसे) पूछो तो कि क्या तुम ख़ुदा को अपनी दीदारी जताते हो और ख़ुदा तो जो कुछ आसमानों मे है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) जानता है और ख़ुदा हर चीज़ से ख़बरदार है
17يَمُنُّونَ عَلَيْكَ أَنْ أَسْلَمُوا ۖ قُل لَّا تَمُنُّوا عَلَيَّ إِسْلَامَكُم ۖ بَلِ اللَّهُ يَمُنُّ عَلَيْكُمْ أَنْ هَدَاكُمْ لِلْإِيمَانِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम पर ये लोग (इसलाम लाने का) एहसान जताते हैं तुम (साफ़) कह दो कि तुम अपने इसलाम का मुझ पर एहसान न जताओ (बल्कि) अगर तुम (दावाए ईमान में) सच्चे हो तो समझो कि, ख़ुदा ने तुम पर एहसान किया कि उसने तुमको ईमान का रास्ता दिखाया
अल-हुजुरातकुरान सूची
18आयत
मदनीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अल-हुजुरात 15

सूरा अल-हुजुरात आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (सच्चे मोमिन) तो बस वही हैं जो ख़ुदा और उसके…

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Thursday, October 1, 2026

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