अर-रहमान · 49/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٤٩
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
फिर दोनों अपने सरपरस्त की किस किस नेअमतों को झुठलाओगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلاء: अल्लाह की नेमतें, उपकार और एहसान।
  • تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों झुठलाते हो (यानी जिन्न और इंसान)।

तफसीर:

ऐ जिन्न और इंसान की जमात! अल्लाह तआला ने तुम पर जो अनगिनत नेमतें और एहसानात बरसाए हैं, उनमें से कौन-सी नेमत को तुम झुठला सकते हो? यह आयत एक ऐसा सवाल है जो हर इंसान और जिन्न के ज़मीर को झिंझोड़ता है। अल्लाह की नेमतें इतनी ज़्यादा हैं कि उन्हें गिनना मुमकिन नहीं — आसमान और ज़मीन की पैदाइश, सूरज और चाँद की रोशनी, बारिश का पानी, खाने-पीने की चीज़ें, सेहत, अम्न, और सबसे बड़ी नेमत यह कि उसने हमें मुसलमान बनाया और कुरआन जैसी हिदायत की किताब दी।

यह आयत अपने अंदर एक गहरा दावती पैगाम रखती है — अगर अल्लाह की नेमतें झुठलाने के काबिल नहीं हैं, तो हमें चाहिए कि हम उनका शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों पर अमल करें। यह सवाल क़यामत के दिन भी दोहराया जाएगा, जब हर इंसान से पूछा जाएगा कि उसने अपने रब की नेमतों का क्या हक़ अदा किया।

प्यारे भाइयों और बहनों! जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — साँस लेते हैं, चलते-फिरते हैं, खाते-पीते हैं — तो हर लम्हा अल्लाह की नेमतों से भरा हुआ है। क्या हम इन नेमतों को झुठला सकते हैं? हरगिज़ नहीं! बल्कि हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान से "الحمد لله" कहें, अपने दिल से शुक्र अदा करें और अपने अमल से अल्लाह की रज़ा हासिल करें। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों का इनकार करना कितनी बड़ी नाइंसाफ़ी है, और उनका शुक्र अदा करना ही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 47-51 — सूरा अर-रहमान

47فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे
48ذَوَاتَا أَفْنَانٍ
दोनों बाग़ (दरख्तों की) टहनियों से हरे भरे (मेवों से लदे) हुए
49فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर दोनों अपने सरपरस्त की किस किस नेअमतों को झुठलाओगे
50فِيهِمَا عَيْنَانِ تَجْرِيَانِ
इन दोनों में दो चश्में जारी होंगें
51فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — अर-रहमान 49

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Thursday, October 1, 2026

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