अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- انظُرُونَا: हमारी प्रतीक्षा करो, हमें देखो (अर्थात हमारा इंतज़ार करो)।
- نَقْتَبِسْ: हम उधार लें, रोशनी प्राप्त करें।
- سُورٍ: दीवार, आड़ (जो जन्नत और जहन्नम के बीच होगी)।
- بَاطِنُهُ: उसका भीतरी हिस्सा (जो मोमिनों की ओर होगा)।
- ظَاهِرُهُ: उसका बाहरी हिस्सा (जो मुनाफ़िक़ों की ओर होगा)।
तफ़सीर:
उस दिन का दृश्य अत्यंत भयावह और दिल दहला देने वाला होगा, जब मुनाफ़िक़ पुरुष और मुनाफ़िक़ औरतें, जो दुनिया में ईमान का दिखावा करते थे, क़यामत के मैदान में हक़ीक़त से सामना करेंगे। वे मोमिनों को देखेंगे कि उनके चेहरे नूर से चमक रहे हैं और उनके पास रोशनी है जो उन्हें पुल-सिरात पर रास्ता दिखाएगी। उस वक़्त मुनाफ़िक़ीन हैरान और परेशान होकर मोमिनों से कहेंगे: "हमारा इंतज़ार करो, हमें भी अपनी रोशनी से कुछ हिस्सा दे दो, ताकि हम भी इस अंधेरे में रास्ता पा सकें।"
लेकिन यह माँग बिल्कुल बेकार होगी, क्योंकि रोशनी ईमान का नतीजा है, और ईमान तो दुनिया में ही हासिल करना होता है। वहाँ तो सिर्फ़ अफ़सोस और पछतावा ही बचेगा। उन्हें जवाब मिलेगा: "पीछे लौट जाओ और अपने लिए रोशनी तलाश करो।" यानी अब यहाँ से कुछ हासिल नहीं हो सकता, जो दुनिया में कमाया नहीं, वह यहाँ कहाँ से मिलेगा? यह जवाब उनके लिए सख्त तौर पर तंज़ और ज़िल्लत का होगा।
फिर अचानक उनके और मोमिनों के बीच एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी, जिसमें एक दरवाज़ा होगा। उस दीवार का भीतरी हिस्सा, जो मोमिनों की तरफ़ है, वहाँ रहमत होगी यानी जन्नत की तरफ़ खुलेगा, और उसका बाहरी हिस्सा, जो मुनाफ़िक़ों की तरफ़ है, वहाँ अज़ाब होगा यानी जहन्नम की तरफ़। इस तरह मोमिन और मुनाफ़िक़ हमेशा के लिए अलग कर दिए जाएँगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल का सबूत है। आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, यही वह मौक़ा है जहाँ हम अपने लिए रोशनी कमा सकते हैं। नमाज़, रोज़ा, ज़कात, नेकी, सच्चाई, ईमानदारी — यह सब वो ज़रिये हैं जिनसे हमारा चेहरा क़यामत के दिन रोशन होगा। अल्लाह तआला ने हम पर रहमत की है कि हमें दुनिया में भेजा और हमें मौक़ा दिया कि हम अपनी आख़िरत संवार लें। आओ, हम अपने ईमान को सिर्फ़ दावे तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने अमल से साबित करें, ताकि उस दिन हम मोमिनों के साथ हों और उस रोशनी से महरूम न रहें। याद रखिए, आज की एक नेकी कल के अंधेरे में हमारे लिए नूर बन जाएगी।
📜 आयत 11-15 — अल-हदीद
अनुवाद — अल-हदीद 13
सूरा अल-हदीद आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन मुनाफ़िक मर्द और मुनाफ़िक औरतें ईमानदारों से कहेंगे…सूरा आयत 13/29 — अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हदीद सुनें, अल-हदीद अनुवाद, अल-हदीद mp3, अल-हदीद pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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