अल-हदीद · 15/29
अनुवाद उच्चारण — अल-हदीद
فَالْيَوْمَ لَا يُؤْخَذُ مِنكُمْ فِدْيَةٌ وَلَا مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ مَأْوَاكُمُ النَّارُ ۖ هِيَ مَوْلَاكُمْ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ ۝١٥
Fal Yawma laa yu`khazu minkum fidyatunw wa laa minal lazeena kafaroo; maawaakumun Naaru hiya maw laakum wa bi`sal maseer
📖 हिंदी अर्थ
तो आज न तो तुमसे कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न काफ़िरों से तुम सबका ठिकाना (बस) जहन्नुम है वही तुम्हारे वास्ते सज़ावार है और (क्या) बुरी जगह है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِدْيَةٌ (फ़िद्या): बदला, छुड़ौती, वह चीज़ जो किसी को सज़ा या आज़ाब से बचाने के लिए दी जाए।
  • مَأْوَاكُمُ (मअ्वाकुम): तुम्हारा ठिकाना, तुम्हारा आश्रय स्थल।
  • مَوْلَاكُمْ (मौलाकुम): यहाँ इसका अर्थ है तुम्हारा सबसे निकट का साथी, यानी आग तुम्हारे लिए सबसे ज़्यादा हक़दार है।
  • مَصِيرُ (मसीर): अंतिम परिणाम, आख़िरी ठिकाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

आज के दिन, यानी क़ियामत के दिन, तुम मुनाफ़िक़ों से कोई फ़िद्या (बदला या छुड़ौती) स्वीकार नहीं किया जाएगा, और न ही उन लोगों से जिन्होंने खुले तौर पर अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का इनकार किया। तुम्हारी कोई भी दौलत, कोई भी रिश्ता, कोई भी सिफ़ारिश तुम्हें अल्लाह के आज़ाब से नहीं बचा सकती। यह वह दिन होगा जब हर शख्स सिर्फ़ अपने अच्छे या बुरे कर्मों का सामना करेगा।

तुम सबका ठिकाना जहन्नम की आग है। यह आग तुम्हारे लिए सबसे ज़्यादा निकट और सबसे ज़्यादा हक़दार है, क्योंकि तुमने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी की और उसके दीन को कबूल नहीं किया। यह आग तुम्हारा मालिक बन जाएगी, यानी तुम्हारे ऊपर उसका पूरा अधिकार होगा, और तुम उससे कहीं निकल नहीं पाओगे। कितना बुरा अंजाम है यह! कितनी बुरी मंज़िल है यह!

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में ज़िंदगी दी है ताकि हम उसकी इबादत करें और उसकी राह में चलें। यह मौका हमेशा नहीं रहेगा। आज हमारे पास तौबा करने का, अल्लाह की रहमत हासिल करने का और अपने गुनाहों से बचने का मौका है। क़ियामत के दिन कोई फ़िद्या काम नहीं आएगा, कोई दौलत काम नहीं आएगी, कोई रिश्तेदारी काम नहीं आएगी। इसलिए हमें चाहिए कि आज ही अपनी ज़िंदगी को सही कर लें, अल्लाह के हुक्मों पर अमल करें और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाएँ। अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है, और वह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है। आज ही वापस आ जाएँ, आज ही सुधर जाएँ, क्योंकि कल का पछतावा किसी काम नहीं आएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — अल-हदीद

13يَوْمَ يَقُولُ الْمُنَافِقُونَ وَالْمُنَافِقَاتُ لِلَّذِينَ آمَنُوا انظُرُونَا نَقْتَبِسْ مِن نُّورِكُمْ قِيلَ ارْجِعُوا وَرَاءَكُمْ فَالْتَمِسُوا نُورًا فَضُرِبَ بَيْنَهُم بِسُورٍ لَّهُ بَابٌ بَاطِنُهُ فِيهِ الرَّحْمَةُ وَظَاهِرُهُ مِن قِبَلِهِ الْعَذَابُ
उस दिन मुनाफ़िक मर्द और मुनाफ़िक औरतें ईमानदारों से कहेंगे एक नज़र (शफ़क्क़त) हमारी तरफ़ भी करो कि हम भी तुम्हारे नूर से कुछ रौशनी हासिल करें तो (उनसे) कहा जाएगा कि तुम अपने पीछे (दुनिया में) लौट जाओ और (वही) किसी और नूर की तलाश करो फिर उनके बीच में एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी जिसमें एक दरवाज़ा होगा (और) उसके अन्दर की जानिब तो रहमत है और बाहर की तरफ अज़ाब तो मुनाफ़िक़ीन मोमिनीन से पुकार कर कहेंगे
14يُنَادُونَهُمْ أَلَمْ نَكُن مَّعَكُمْ ۖ قَالُوا بَلَىٰ وَلَٰكِنَّكُمْ فَتَنتُمْ أَنفُسَكُمْ وَتَرَبَّصْتُمْ وَارْتَبْتُمْ وَغَرَّتْكُمُ الْأَمَانِيُّ حَتَّىٰ جَاءَ أَمْرُ اللَّهِ وَغَرَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ
(क्यों भाई) क्या हम कभी तुम्हारे साथ न थे तो मोमिनीन कहेंगे थे तो ज़रूर मगर तुम ने तो ख़ुद अपने आपको बला में डाला और (हमारे हक़ में गर्दिशों के) मुन्तज़िर हैं और (दीन में) शक़ किया किए और तुम्हें (तुम्हारी) तमन्नाओं ने धोखे में रखा यहाँ तक कि ख़ुदा का हुक्म आ पहुँचा और एक बड़े दग़ाबाज़ (शैतान) ने ख़ुदा के बारे में तुमको फ़रेब दिया
15فَالْيَوْمَ لَا يُؤْخَذُ مِنكُمْ فِدْيَةٌ وَلَا مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ مَأْوَاكُمُ النَّارُ ۖ هِيَ مَوْلَاكُمْ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
तो आज न तो तुमसे कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न काफ़िरों से तुम सबका ठिकाना (बस) जहन्नुम है वही तुम्हारे वास्ते सज़ावार है और (क्या) बुरी जगह है
16۞ أَلَمْ يَأْنِ لِلَّذِينَ آمَنُوا أَن تَخْشَعَ قُلُوبُهُمْ لِذِكْرِ اللَّهِ وَمَا نَزَلَ مِنَ الْحَقِّ وَلَا يَكُونُوا كَالَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِن قَبْلُ فَطَالَ عَلَيْهِمُ الْأَمَدُ فَقَسَتْ قُلُوبُهُمْ ۖ وَكَثِيرٌ مِّنْهُمْ فَاسِقُونَ
क्या ईमानदारों के लिए अभी तक इसका वक्त नहीं आया कि ख़ुदा की याद और क़ुरान के लिए जो (ख़ुदा की तरफ से) नाज़िल हुआ है उनके दिल नरम हों और वह उन लोगों के से न हो जाएँ जिनको उन से पहले किताब (तौरेत, इन्जील) दी गयी थी तो (जब) एक ज़माना दराज़ गुज़र गया तो उनके दिल सख्त हो गए और इनमें से बहुतेरे बदकार हैं
17اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
जान रखो कि ख़ुदा ही ज़मीन को उसके मरने (उफ़तादा होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) करता है हमने तुमसे अपनी (क़ुदरत की) निशानियाँ खोल खोल कर बयान कर दी हैं ताकि तुम समझो
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अनुवाद — अल-हदीद 15

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Tuesday, August 18, 2026

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