अनुवाद — Tafsir
अल-हदीद (57) : 16
शब्दों के अर्थ:
- أَلَمْ يَأْنِ: क्या अभी वक़्त नहीं आया?
- تَخْشَعَ: नरम होना, झुकना, अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाना और उसका एहतिराम करना।
- لِذِكْرِ اللَّهِ: अल्लाह की याद और उसके ज़िक्र के वक़्त।
- وَمَا نَزَلَ مِنَ الْحَقِّ: और उस हक़ (सच्चाई) के लिए जो नाज़िल हुई, यानी क़ुरआन।
- فَطَالَ عَلَيْهِمُ الْأَمَدُ: उन पर लंबा अर्सा गुज़र गया (यानी लंबी मुद्दत बीत गई)।
- فَقَسَتْ قُلُوبُهُمْ: तो उनके दिल सख्त हो गए।
- فَاسِقُونَ: हुक्म से निकल जाने वाले, नाफ़रमान।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में ईमान वालों को एक प्यार भरा एहसास दिला रहे हैं और उनसे पूछ रहे हैं: "क्या अभी तक वह वक़्त नहीं आया कि ईमान लाने वालों के दिल अल्लाह की याद और उसके नाज़िल किए हुए हक़ (क़ुरआन) के सामने नरम हों और ख़ुशूअ (गिड़गिड़ाहट) हासिल करें?" यह एक मुहब्बत भरा एहसास है, जो मोमिनों को उनकी कसूर पर ध्यान दिलाता है कि कहीं उनके दिल भी उन लोगों की तरह सख्त तो नहीं हो गए जिन्हें पहले किताब दी गई थी।
अल्लाह तआला फरमाते हैं कि पहले अहले-किताब (यहूद और नसारा) को तौरात और इंजील दी गई, लेकिन उन पर लंबा ज़माना गुज़र गया। उन्होंने अपने दीन को बदल डाला, अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ लिया, और धीरे-धीरे उनके दिल पत्थर जैसे सख्त हो गए। उनमें से बहुत से लोग अल्लाह की इताअत से निकल गए और फ़ासिक़ (नाफ़रमान) हो गए।
अल्लाह तआला मोमिनों को उनके हाल से सबक़ लेने की तरग़ीब देते हैं। यह आयत दिल को जगाने वाली है — यह हमें बताती है कि दिल की नरमी और ख़ुशूअ अल्लाह की रहमत की निशानी है। जब हम क़ुरआन सुनते हैं, अल्लाह का ज़िक्र करते हैं, तो हमारे दिलों में लज़्ज़त, खौफ़ और मुहब्बत पैदा होनी चाहिए। अगर दिल सख्त हो जाए, तो यह बहुत बड़ा नुक़सान है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने दिलों को हमेशा तरो-ताज़ा रखना चाहिए, क़ुरआन और ज़िक्र से जोड़े रखना चाहिए, और अहले-किताब की तरह लंबी मुद्दत गुज़रने से दिल के सख्त होने से बचना चाहिए। हमें चाहिए कि हर वक़्त अल्लाह की याद में जिएँ, उसकी आयतों पर ग़ौर करें, और अपने दिल को नरम और ख़ुशूअ वाला बनाए रखें।
याद रखिए! दिल की नरमी अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ी नेमत है। जो दिल अल्लाह की याद से नरम हो जाता है, वही दिल सच्ची हिदायत पाता है। और जो दिल सख्त हो जाए, वह हिदायत से महरूम रहता है। आइए हम अपने दिलों को ज़िक्रुल्लाह और क़ुरआन की तिलावत से नरम करें, और अल्लाह की रहमत के तलबगार बनें।
📜 आयत 14-18 — अल-हदीद
अनुवाद — अल-हदीद 16
सूरा अल-हदीद आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ईमानदारों के लिए अभी तक इसका वक्त नहीं आया…सूरा आयत 16/29 — अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हदीद सुनें, अल-हदीद अनुवाद, अल-हदीद mp3, अल-हदीद pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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