अल-हदीद · 17/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हदीद
اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ ۝١٧
I`lamooo annal laaha yuhyil arda ba`da mawtihaa; qad baiyannaa lakumul Aayaati la`allakum ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
जान रखो कि ख़ुदा ही ज़मीन को उसके मरने (उफ़तादा होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) करता है हमने तुमसे अपनी (क़ुदरत की) निशानियाँ खोल खोल कर बयान कर दी हैं ताकि तुम समझो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا: अर्थात वह सूखी और बंजर धरती को जीवित कर देता है, उसमें हरियाली और वनस्पति उगा देता है।
  • الْآيَاتِ: अल्लाह की कुदरत और एकता की निशानियाँ और प्रमाण।
  • تَعْقِلُونَ: तुम समझो और विचार करो।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! यह अच्छी तरह जान लो कि अल्लाह ही वह है जो मृत (सूखी) धरती को बारिश के द्वारा जीवित कर देता है, और वह उसमें से तरह-तरह की वनस्पतियाँ और फसलें उगाता है। यह अल्लाह की कुदरत का एक ज़ाहिर नमूना है। जिस तरह वह बंजर और सूखी ज़मीन को जीवित कर देता है, उसी तरह वह क़यामत के दिन मुर्दों को भी जीवित करके उठाएगा। और यही अल्लाह की कुदरत है कि वह सख्त और पत्थर जैसे दिलों को भी नरम करके ईमान और खुशू (अल्लाह के आगे झुकने) की तरफ लौटा देता है।

अल्लाह ने अपनी इन आयतों और निशानियों को तुम्हारे सामने साफ-साफ बयान कर दिया है, ताकि तुम अक्ल से काम लो और इन निशानियों पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करो। जब तुम देखते हो कि सूखी ज़मीन बारिश के बाद हरी-भरी हो जाती है, तो यह तुम्हारे लिए सबक़ है कि अल्लाह की कुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। वह चाहे तो तुम्हारे दिलों को भी ज़िंदा कर दे, उनमें ईमान की रौशनी और नर्मी पैदा कर दे, और तुम्हें अपनी तरफ खींच ले।

याद रखो! अल्लाह की रहमत और कुदरत से कभी निराश न हो। जिस तरह वह मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करता है, उसी तरह वह तुम्हारे दिलों को भी ज़िंदा कर सकता है। तुम अपने गुनाहों और ग़फलत से तौबा करके उसकी तरफ रुजू करो, क्योंकि वह बड़ा मेहरबान और क़ुदरत वाला है। यही उसकी महानता है कि उसने अपनी आयतें बयान करके तुम्हें राह दिखाई है, ताकि तुम समझदार बनो और उसकी इबादत की तरफ आओ।



📜 आयत 15-19 — सूरा अल-हदीद

15فَالْيَوْمَ لَا يُؤْخَذُ مِنكُمْ فِدْيَةٌ وَلَا مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ مَأْوَاكُمُ النَّارُ ۖ هِيَ مَوْلَاكُمْ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
तो आज न तो तुमसे कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न काफ़िरों से तुम सबका ठिकाना (बस) जहन्नुम है वही तुम्हारे वास्ते सज़ावार है और (क्या) बुरी जगह है
16۞ أَلَمْ يَأْنِ لِلَّذِينَ آمَنُوا أَن تَخْشَعَ قُلُوبُهُمْ لِذِكْرِ اللَّهِ وَمَا نَزَلَ مِنَ الْحَقِّ وَلَا يَكُونُوا كَالَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِن قَبْلُ فَطَالَ عَلَيْهِمُ الْأَمَدُ فَقَسَتْ قُلُوبُهُمْ ۖ وَكَثِيرٌ مِّنْهُمْ فَاسِقُونَ
क्या ईमानदारों के लिए अभी तक इसका वक्त नहीं आया कि ख़ुदा की याद और क़ुरान के लिए जो (ख़ुदा की तरफ से) नाज़िल हुआ है उनके दिल नरम हों और वह उन लोगों के से न हो जाएँ जिनको उन से पहले किताब (तौरेत, इन्जील) दी गयी थी तो (जब) एक ज़माना दराज़ गुज़र गया तो उनके दिल सख्त हो गए और इनमें से बहुतेरे बदकार हैं
17اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
जान रखो कि ख़ुदा ही ज़मीन को उसके मरने (उफ़तादा होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) करता है हमने तुमसे अपनी (क़ुदरत की) निशानियाँ खोल खोल कर बयान कर दी हैं ताकि तुम समझो
18إِنَّ الْمُصَّدِّقِينَ وَالْمُصَّدِّقَاتِ وَأَقْرَضُوا اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا يُضَاعَفُ لَهُمْ وَلَهُمْ أَجْرٌ كَرِيمٌ
बेशक ख़ैरात देने वाले मर्द और ख़ैरात देने वाली औरतें और (जो लोग) ख़ुदा की नीयत से ख़ालिस कर्ज़ देते हैं उनको दोगुना (अज्र) दिया जाएगा और उनका बहुत मुअज़िज़ सिला (जन्नत) तो है ही
19وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الصِّدِّيقُونَ ۖ وَالشُّهَدَاءُ عِندَ رَبِّهِمْ لَهُمْ أَجْرُهُمْ وَنُورُهُمْ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए यही लोग अपने परवरदिगार के नज़दीक सिद्दीक़ों और शहीदों के दरजे में होंगे उनके लिए उन्ही (सिद्दीकों और शहीदों) का अज्र और उन्हीं का नूर होगा और जिन लोगों ने कुफ्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया वही लोग जहन्नुमी हैं
अल-हदीदकुरान सूची
29आयत
मदनीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — अल-हदीद 17

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Friday, October 2, 2026

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