अल-हदीद · 19/29
अनुवाद उच्चारण — अल-हदीद
وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الصِّدِّيقُونَ ۖ وَالشُّهَدَاءُ عِندَ رَبِّهِمْ لَهُمْ أَجْرُهُمْ وَنُورُهُمْ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ ۝١٩
Wallazeena aamanoo billaahi wa Rusuliheee ulaaa`ika humus siddeeqoona wash shuhadaaa`u `inda Rabbihim lahum ajruhum wa nooruhum wallazeena kafaroo wa kazzaboo bi aayaatinaaa ulaaaika As haabul jaheem
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए यही लोग अपने परवरदिगार के नज़दीक सिद्दीक़ों और शहीदों के दरजे में होंगे उनके लिए उन्ही (सिद्दीकों और शहीदों) का अज्र और उन्हीं का नूर होगा और जिन लोगों ने कुफ्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया वही लोग जहन्नुमी हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصِّدِّيقُونَ: वे लोग जो अपने ईमान में सच्चे हों और अपने विश्वास को अमल से साबित करें।
  • الشُّهَدَاءُ: गवाह, यानी वे लोग जो क़यामत के दिन दूसरे उम्मतों पर गवाही देंगे, या फिर अल्लाह की राह में शहीद होने वाले।
  • أَصْحَابُ الْجَحِيمِ: जहन्नम (नरक) में रहने वाले, यानी उसके साथी।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों और काफ़िरों का फ़र्क़ बयान कर रहे हैं। जिन लोगों ने अल्लाह पर ईमान लाया और उसके सभी रसूलों पर बिना किसी भेदभाव के ईमान लाए—किसी नबी को नहीं मानने से इनकार नहीं किया, न ही किसी को दूसरे से कमतर समझा—तो यही लोग सच्चे सिद्दीक़ (बहुत सच्चे) हैं। यानी उनका ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं, बल्कि दिल, ज़ुबान और अमल तीनों से पुख़्ता है। उन्होंने अपने ईमान को अपने आचरण से साबित किया।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि यही लोग "शुहदा" (गवाह) हैं—अपने रब के पास उनके लिए बड़ा अज्र (इनाम) है और उनका नूर (रोशनी) क़यामत के दिन उनके आगे और दाईं तरफ़ चमकेगा, जब लोग अंधेरों में भटक रहे होंगे। यह नूर उनके ईमान और अच्छे आमाल की बरकत से मिलेगा। यह वही रोशनी है जो पुल-सिरात पर उनके क़दमों को मंज़िल तक पहुँचाएगी।

इसके मुक़ाबले में, जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह की आयतों (निशानियों, हिदायतों और रसूलों के मो'जिज़ात) को झुठलाया, वे जहन्नम के साथी हैं। "साथी" का लफ़्ज़ बताता है कि वे हमेशा उसमें रहेंगे, कभी बाहर नहीं निकलेंगे। उनके लिए न कोई अज्र है, न कोई नूर, बल्कि अंधेरा और अज़ाब ही अज़ाब है।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनों को खुशख़बरी देती है कि अल्लाह की राह में सच्चा ईमान और नेक अमल कभी ज़ाया नहीं होता। जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों पर पूरा यक़ीन रखते हैं, वे दुनिया में भी इज़्ज़त पाते हैं और आख़िरत में भी उनका मुक़ाम बुलंद होगा। यह हमें सिखाता है कि ईमान सिर्फ़ दिल का एहसास नहीं, बल्कि अमल का तक़ाज़ा है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की रोशनी में चलते हैं, अल्लाह उन्हें क़यामत के दिन भी रोशनी अता करेगा। और जो लोग हिदायत से मुँह मोड़ते हैं, वे अपने लिए अंधेरा और अज़ाब का सामान करते हैं। आओ, हम अपने ईमान को सिर्फ़ दावा न बनाएँ, बल्कि उसे अपने अमल से सच्चा साबित करें, ताकि हम भी उन सिद्दीक़ों और शुहदा के साथी बन सकें जिनका ज़िक्र अल्लाह ने इस आयत में किया है।

🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अल-हदीद

17اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
जान रखो कि ख़ुदा ही ज़मीन को उसके मरने (उफ़तादा होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) करता है हमने तुमसे अपनी (क़ुदरत की) निशानियाँ खोल खोल कर बयान कर दी हैं ताकि तुम समझो
18إِنَّ الْمُصَّدِّقِينَ وَالْمُصَّدِّقَاتِ وَأَقْرَضُوا اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا يُضَاعَفُ لَهُمْ وَلَهُمْ أَجْرٌ كَرِيمٌ
बेशक ख़ैरात देने वाले मर्द और ख़ैरात देने वाली औरतें और (जो लोग) ख़ुदा की नीयत से ख़ालिस कर्ज़ देते हैं उनको दोगुना (अज्र) दिया जाएगा और उनका बहुत मुअज़िज़ सिला (जन्नत) तो है ही
19وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الصِّدِّيقُونَ ۖ وَالشُّهَدَاءُ عِندَ رَبِّهِمْ لَهُمْ أَجْرُهُمْ وَنُورُهُمْ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए यही लोग अपने परवरदिगार के नज़दीक सिद्दीक़ों और शहीदों के दरजे में होंगे उनके लिए उन्ही (सिद्दीकों और शहीदों) का अज्र और उन्हीं का नूर होगा और जिन लोगों ने कुफ्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया वही लोग जहन्नुमी हैं
20اعْلَمُوا أَنَّمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا لَعِبٌ وَلَهْوٌ وَزِينَةٌ وَتَفَاخُرٌ بَيْنَكُمْ وَتَكَاثُرٌ فِي الْأَمْوَالِ وَالْأَوْلَادِ ۖ كَمَثَلِ غَيْثٍ أَعْجَبَ الْكُفَّارَ نَبَاتُهُ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَاهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَكُونُ حُطَامًا ۖ وَفِي الْآخِرَةِ عَذَابٌ شَدِيدٌ وَمَغْفِرَةٌ مِّنَ اللَّهِ وَرِضْوَانٌ ۚ وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا إِلَّا مَتَاعُ الْغُرُورِ
जान रखो कि दुनियावी ज़िन्दगी महज़ खेल और तमाशा और ज़ाहिरी ज़ीनत (व आसाइश) और आपस में एक दूसरे पर फ़ख्र क़रना और माल और औलाद की एक दूसरे से ज्यादा ख्वाहिश है (दुनयावी ज़िन्दगी की मिसाल तो) बारिश की सी मिसाल है जिस (की वजह) से किसानों की खेती (लहलहाती और) उनको ख़ुश कर देती थी फिर सूख जाती है तो तू उसको देखता है कि ज़र्द हो जाती है फिर चूर चूर हो जाती है और आख़िरत में (कुफ्फार के लिए) सख्त अज़ाब है और (मोमिनों के लिए) ख़ुदा की तरफ से बख़्शिस और ख़ुशनूदी और दुनयावी ज़िन्दगी तो बस फ़रेब का साज़ो सामान है
21سَابِقُوا إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا كَعَرْضِ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أُعِدَّتْ لِلَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۚ ذَٰلِكَ فَضْلُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
तुम अपने परवरदिगार के (सबब) बख़्शिस की और बेहिश्त की तरफ लपक के आगे बढ़ जाओ जिसका अर्ज़ आसमान और ज़मीन के अर्ज़ के बराबर है जो उन लोगों के लिए तैयार की गयी है जो ख़ुदा पर और उसके रसूलों पर ईमान लाए हैं ये ख़ुदा का फज़ल है जिसे चाहे अता करे और ख़ुदा का फज़ल (व क़रम) तो बहुत बड़ा है
अल-हदीदकुरान सूची
29आयत
मदनीRevelation
19आयत

अनुवाद — अल-हदीद 19

सूरा अल-हदीद आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाए…

सूरा आयत 19/29 — अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हदीद सुनें, अल-हदीद अनुवाद, अल-हदीद mp3, अल-हदीद pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए