Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- المُصَّدِّقِينَ / المُصَّدِّقَاتِ: यानी सच्चे दिल से दान देने वाले पुरुष और दान देने वाली स्त्रियाँ। (मूल शब्द "المتصدقين" है, जिसमें ता को साद में मिला दिया गया है)
- قَرْضًا حَسَنًا: अच्छा कर्ज़, यानी वह खर्च जो अल्लाह की राह में खुशी और साफ़ दिल से किया जाए, बिना किसी एहसान जताए और बिना किसी नुक़्सान के।
- يُضَاعَفُ: कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
- أَجْرٌ كَرِيمٌ: बड़ा सम्मानित और उदार बदला, यानी जन्नत।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने उन बंदों की तारीफ़ कर रहा है जो अपने माल में से अल्लाह की राह में खर्च करते हैं — चाहे वे पुरुष हों या स्त्रियाँ। यहाँ अल्लाह ने "क़र्ज़-ए-हसन" (अच्छा कर्ज़) का शब्द इस्तेमाल किया है, जो बहुत ही प्यारा और दिल को छूने वाला है। यानी अल्लाह अपने बंदों से कह रहा है: "जो कुछ तुम मेरी राह में खर्च करते हो, वह मुझे कर्ज़ है, और मैं उसे लौटाने वाला हूँ — बल्कि कई गुना बढ़ाकर लौटाने वाला हूँ।" यह अल्लाह की बहुत बड़ी मेहरबानी है कि वह अपने बंदों को यह शरीफ़ और इज़्ज़त वाला मौक़ा देता है कि वे उसे कर्ज़ दें!
इस "क़र्ज़-ए-हसन" की शर्तें ये हैं: दिल की खुशी के साथ देना, नियत सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए हो, और जिसे दिया जाए वह सच में ज़रूरतमंद हो। साथ ही दान देने के बाद न तो एहसान जताया जाए और न ही किसी को तकलीफ़ पहुँचाई जाए।
अल्लाह ने वादा किया है कि ऐसे लोगों का सवाब कई गुना बढ़ाया जाएगा — एक नेकी का बदला दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक, और अल्लाह चाहे तो उससे भी कहीं ज़्यादा। और इस सब के ऊपर उनके लिए एक और बड़ी चीज़ है — "अजरुन करीम" यानी जन्नत, जो अल्लाह की तरफ़ से सबसे बड़ा और सबसे इज़्ज़त वाला इनाम है।
यह आयत हमें सिखाती है कि दान देना कोई नुक़्सान नहीं है, बल्कि यह अल्लाह के साथ एक नफ़ा वाला सौदा है। जो जितना खर्च करता है, अल्लाह उसे उतना ही नहीं, बल्कि कहीं ज़्यादा लौटाता है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने माल में से अल्लाह की राह में खर्च करने की आदत डालें, चाहे कितनी ही कम मात्रा में ही क्यों न हो। अल्लाह छोटे से छोटे दान को भी कबूल करता है और उसे बड़ा बना देता है।
याद रखिए, यह दुनिया की दौलत तो एक दिन ख़त्म हो जाने वाली है, लेकिन अल्लाह की राह में खर्च किया हुआ माल वही असली पूँजी है जो हमारे आगे के सफ़र में काम आएगी। अल्लाह हम सबको इस नेक काम की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 16-20 — सूरा अल-हदीद
अनुवाद — अल-हदीद 18
सूरा अल-हदीद आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक ख़ैरात देने वाले मर्द और ख़ैरात देने वाली औरतें…सूरा आयत 18/29 — सूरा अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हदीद सुनें, सूरा अल-हदीद अनुवाद, सूरा अल-हदीद mp3, सूरा अल-हदीद pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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