अल-हश्र · 20/24
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हश्र
لَا يَسْتَوِي أَصْحَابُ النَّارِ وَأَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۚ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ هُمُ الْفَائِزُونَ ۝٢٠
Laa yastaweee as-haabun naari wa ashaabul jannah; as haabul jannati humul faaa`izoon
📖 हिंदी अर्थ
जहन्नुमी और जन्नती किसी तरह बराबर नहीं हो सकते जन्नती लोग ही तो कामयाबी हासिल करने वाले हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا يَسْتَوِي – बराबर नहीं हो सकते, समान नहीं हैं।
  • أَصْحَابُ النَّارِ – आग (जहन्नम) वाले लोग।
  • أَصْحَابُ الْجَنَّةِ – जन्नत (स्वर्ग) वाले लोग।
  • الْفَائِزُونَ – कामयाब होने वाले, सफलता पाने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में स्पष्ट फ़रमा रहे हैं कि जहन्नम वाले और जन्नत वाले कभी भी एक समान नहीं हो सकते। यह दोनों समूह अपने आचरण, विश्वास और कर्मों में मौलिक रूप से भिन्न हैं। जो लोग अल्लाह की अवज्ञा करते हैं और उसके रसूलों को झुठलाते हैं, उनका ठिकाना आग है, जहाँ उन्हें सज़ा और अपमान मिलेगा। जबकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उनका ठिकाना जन्नत है, जहाँ हमेशा की नेमतें, सुख-चैन और अल्लाह की रज़ा उनका इंतज़ार कर रही है।

यहाँ अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि सच्ची कामयाबी और सफलता सिर्फ़ जन्नत वालों की है। वे ही असली फ़ाइज़ (कामयाब) हैं, क्योंकि उन्होंने वह सब कुछ पा लिया जो वे चाहते थे और उन बुराइयों से बच गए जिनसे वे डरते थे। जन्नत वालों को हमेशा की नेमतें मिलेंगी, उनका चेहरा खुशहाल होगा, और वे अल्लाह की रहमत में हमेशा-हमेशा के लिए रहेंगे। इसके विपरीत, जहन्नम वाले हमेशा अज़ाब में रहेंगे और उन्हें कभी राहत नहीं मिलेगी।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा असली लक्ष्य क्या होना चाहिए। दुनिया की चमक-दमक और अस्थायी सुख हमें धोखा न दें। हमें अपने कर्मों को सुधारना चाहिए, अल्लाह की इबादत करनी चाहिए और उसके रास्ते पर चलना चाहिए, ताकि हम उन कामयाब लोगों में शामिल हो सकें जिन्हें अल्लाह ने जन्नत की खुशखबरी दी है। याद रखिए, यह दुनिया एक इम्तिहान है, और असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की रज़ा को अपना निशाना बनाए और अपने आख़िरत को संवारे। अल्लाह हम सबको यह तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 18-22 — सूरा अल-हश्र

18يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَلْتَنظُرْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ لِغَدٍ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो, और हर शख़्श को ग़ौर करना चाहिए कि कल क़यामत के वास्ते उसने पहले से क्या भेजा है और ख़ुदा ही से डरते रहो बेशक जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
19وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ نَسُوا اللَّهَ فَأَنسَاهُمْ أَنفُسَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
और उन लोगों के जैसे न हो जाओ जो ख़ुदा को भुला बैठे तो ख़ुदा ने उन्हें ऐसा कर दिया कि वह अपने आपको भूल गए यही लोग तो बद किरदार हैं
20لَا يَسْتَوِي أَصْحَابُ النَّارِ وَأَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۚ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ هُمُ الْفَائِزُونَ
जहन्नुमी और जन्नती किसी तरह बराबर नहीं हो सकते जन्नती लोग ही तो कामयाबी हासिल करने वाले हैं
21لَوْ أَنزَلْنَا هَٰذَا الْقُرْآنَ عَلَىٰ جَبَلٍ لَّرَأَيْتَهُ خَاشِعًا مُّتَصَدِّعًا مِّنْ خَشْيَةِ اللَّهِ ۚ وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
अगर हम इस क़ुरान को किसी पहाड़ पर (भी) नाज़िल करते तो तुम उसको देखते कि ख़ुदा के डर से झुका और फटा जाता है ये मिसालें हम लोगों (के समझाने) के लिए बयान करते हैं ताकि वह ग़ौर करें
22هُوَ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۖ هُوَ الرَّحْمَٰنُ الرَّحِيمُ
वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला वही बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
अल-हश्रकुरान सूची
24आयत
मदनीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — अल-हश्र 20

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Friday, October 2, 2026

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