अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ख़ाशि'अन (خاشِعًا): झुका हुआ, दबा हुआ, अल्लाह के भय से दबा हुआ।
- मुतसद्दि'अन (مُتَصَدِّعًا): फटा हुआ, टुकड़े-टुकड़े हो जाने वाला।
- ख़श्यतिल्लाह (خَشْيَةِ اللَّهِ): अल्लाह का भय, जो इल्म और समझ से पैदा होता है।
- अम्साल (أَمْثَال): मिसालें, उदाहरण, नसीहत के लिए दी गई बातें।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में एक बहुत ही गहरी और असरदार मिसाल पेश कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि अगर हम यह क़ुरआन किसी पहाड़ पर नाज़िल करते — और वह पहाड़ अपनी सख़्ती, बुलंदी और अज़मत के बावजूद इस क़ुरआन के पैग़ाम को समझता — तो तुम देखते कि वह पहाड़ अल्लाह के ख़ौफ़ से झुक जाता, दब जाता और फट जाता। यानी इतना बड़ा, सख़्त और अटल पहाड़ भी अल्लाह के कलाम की अज़मत और उसके वा'ईद (डरावने अंजाम) के सामने नहीं टिक पाता, वह ख़श्नूद होकर टूट जाता।
यह एक तमसील (उदाहरण) है, जो अल्लाह ने इंसानों को उनके दिलों की सख़्ती पर शर्मिंदा करने के लिए बयान की है। जब एक बेजान पहाड़, जिसमें न समझ है न इल्म, अल्लाह के कलाम के सामने झुक जाता और फट जाता है, तो फिर इंसान — जिसे अल्लाह ने अक्ल, समझ और दिल दिया है — उसे क्यों नहीं झुकना चाहिए? जब वह क़ुरआन सुनता है, तो उसका दिल क्यों नहीं पिघलता? उसकी आँखों से आँसू क्यों नहीं बहते? उसका बदन क्यों नहीं काँपता?
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है जो क़ुरआन सुनते हैं, लेकिन उनके दिलों पर कोई असर नहीं होता। वे क़ुरआन की आयतें पढ़ते हैं, लेकिन उनकी ज़िंदगी में कोई तब्दीली नहीं आती। उनके दिल पत्थर से भी ज़्यादा सख़्त हो गए हैं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और ये मिसालें हम लोगों के लिए बयान करते हैं, ताकि वे ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें।" यानी इन उदाहरणों का मक़सद सिर्फ़ यह है कि इंसान अपनी अक्ल से काम ले, सोचे-समझे, अपने दिल की सख़्ती को दूर करे और अल्लाह की तरफ़ रुजू करे।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि उस पर ग़ौर करने, उससे सबक़ लेने और उस पर अमल करने के लिए है। अगर हमारा दिल क़ुरआन सुनकर नहीं पिघलता, तो हमें अपने दिल की सख़्ती पर रोना चाहिए। हमें चाहिए कि क़ुरआन को सीने से लगाएँ, उसकी आयतों पर दिन-रात ग़ौर करें, और उसके हुक्मों को अपनी ज़िंदगी में लागू करें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत, उसकी रहमत और जन्नत तक पहुँचाएगा। क़ुरआन हमारे लिए रहनुमा है, शिफ़ा है और रहमत है — बशर्ते हम इसे सच्चे दिल से पढ़ें और समझें।
📜 आयत 19-23 — अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 21
सूरा अल-हश्र आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर हम इस क़ुरान को किसी पहाड़ पर (भी) नाज़िल…सूरा आयत 21/24 — अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हश्र सुनें, अल-हश्र अनुवाद, अल-हश्र mp3, अल-हश्र pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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