अल-हश्र · 19/24
अनुवाद उच्चारण — अल-हश्र
وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ نَسُوا اللَّهَ فَأَنسَاهُمْ أَنفُسَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ ۝١٩
Wa laa takoonoo kallazeena nasul laaha fa ansaahum anfusahum; ulaaa`ika humul faasiqoon
📖 हिंदी अर्थ
और उन लोगों के जैसे न हो जाओ जो ख़ुदा को भुला बैठे तो ख़ुदा ने उन्हें ऐसा कर दिया कि वह अपने आपको भूल गए यही लोग तो बद किरदार हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَسُوا اللَّهَ (अल्लाह को भूल गए): अल्लाह के अधिकारों और उसकी आज्ञाओं को छोड़ दिया, उसकी याद से गाफिल हो गए।
  • فَأَنسَاهُمْ أَنفُسَهُمْ (तो अल्लाह ने उन्हें उनका स्वयं भुला दिया): अल्लाह ने उन्हें उनके स्वयं के भले और उनकी आत्मा के अधिकारों से गाफिल कर दिया, यहाँ तक कि वे अपने लिए कोई भलाई आगे नहीं भेज सके।
  • الْفَاسِقُونَ (अवज्ञाकारी): अल्लाह की आज्ञा से निकल जाने वाले, उसकी अवज्ञा करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! तुम उन लोगों की तरह मत बनो जिन्होंने अल्लाह को भुला दिया—यानी उसके हुक्मों को छोड़ दिया, उसकी इबादत से मुँह मोड़ लिया, और उसके ज़िक्र से गाफिल हो गए। जब उन्होंने अल्लाह को भुलाया तो अल्लाह ने भी उन्हें उनके स्वयं से भुला दिया—यानी उन्हें उनकी आत्मा के भले की समझ ही खो दी, उनके दिलों पर मुहर लगा दी, और वे अपने लिए कल (आख़िरत) की कोई जमा-पूँजी नहीं जुटा सके। वे न तो अपने लिए नेकियाँ आगे भेज सके और न ही उन्हें अपनी बुराइयों का एहसास हुआ। यही लोग सच्चे फ़ासिक़ (अवज्ञाकारी) हैं—जो अल्लाह की आज्ञा से पूरी तरह निकल चुके हैं।

इस आयत में एक बहुत गहरा संकेत है: जो व्यक्ति अपने नफ्स को पहचानता है और उसकी बुराइयों से बचता है, वही अपने रब को पहचान पाता है। और जो अपने रब को भूल जाता है, वह अपनी ही आत्मा का दुश्मन बन जाता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

ऐ अल्लाह के बंदो! यह आयत हमें जगाती है कि अल्लाह की याद ही वह चीज़ है जो हमारे दिलों को ज़िंदा रखती है। जब हम अल्लाह को याद करते हैं, तो अल्लाह हमें हमारी अपनी भलाई की तरफ़ राह दिखाता है—हमें समझ आता है कि क्या सही है और क्या गलत। लेकिन जब हम उससे गाफिल हो जाते हैं, तो हमारा दिल अंधा हो जाता है, और हम अपने ही नुक़सान में लग जाते हैं।

आज ही अपने दिल की तरफ़ रुजू करो—क्या तुम अल्लाह को याद करते हो? क्या तुम्हारी ज़ुबान पर उसका ज़िक्र है? क्या तुम्हारे दिल में उसका ख़ौफ़ है? अगर नहीं, तो आज ही लौट आओ! अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है। एक सजदा, एक तौबा, एक आँसू—यही वह चीज़ है जो तुम्हें खुद से मिलाएगी और तुम्हारे रब से जोड़ेगी। याद रखो, जो अल्लाह को भूल गया, उसकी ज़िंदगी बेकार है, चाहे वह दुनिया में कितना भी कामयाब दिखे। और जो अल्लाह से जुड़ गया, उसकी ज़िंदगी में बरकत है, चाहे दुनिया उसे कितना भी कमज़ोर समझे।

अल्लाह हम सबको उन लोगों में से न बनाए जो उसे भूल गए और फिर उन्हें उनका स्वयं भुला दिया गया। आमीन।



📜 आयत 17-21 — अल-हश्र

17فَكَانَ عَاقِبَتَهُمَا أَنَّهُمَا فِي النَّارِ خَالِدَيْنِ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ الظَّالِمِينَ
तो दोनों का नतीजा ये हुआ कि दोनों दोज़ख़ में (डाले) जाएँगे और उसमें हमेशा रहेंगे और यही तमाम ज़ालिमों की सज़ा है
18يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَلْتَنظُرْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ لِغَدٍ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो, और हर शख़्श को ग़ौर करना चाहिए कि कल क़यामत के वास्ते उसने पहले से क्या भेजा है और ख़ुदा ही से डरते रहो बेशक जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
19وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ نَسُوا اللَّهَ فَأَنسَاهُمْ أَنفُسَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
और उन लोगों के जैसे न हो जाओ जो ख़ुदा को भुला बैठे तो ख़ुदा ने उन्हें ऐसा कर दिया कि वह अपने आपको भूल गए यही लोग तो बद किरदार हैं
20لَا يَسْتَوِي أَصْحَابُ النَّارِ وَأَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۚ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ هُمُ الْفَائِزُونَ
जहन्नुमी और जन्नती किसी तरह बराबर नहीं हो सकते जन्नती लोग ही तो कामयाबी हासिल करने वाले हैं
21لَوْ أَنزَلْنَا هَٰذَا الْقُرْآنَ عَلَىٰ جَبَلٍ لَّرَأَيْتَهُ خَاشِعًا مُّتَصَدِّعًا مِّنْ خَشْيَةِ اللَّهِ ۚ وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
अगर हम इस क़ुरान को किसी पहाड़ पर (भी) नाज़िल करते तो तुम उसको देखते कि ख़ुदा के डर से झुका और फटा जाता है ये मिसालें हम लोगों (के समझाने) के लिए बयान करते हैं ताकि वह ग़ौर करें
अल-हश्रकुरान सूची
24आयत
मदनीRevelation
19आयत

अनुवाद — अल-हश्र 19

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Tuesday, August 18, 2026

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