Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَبَوَّءُوا الدَّارَ: मदीना को अपना घर बनाया और वहाँ बस गए।
- الْإِيمَانَ: ईमान को अपनाया और उस पर दृढ़ रहे।
- حَاجَةً: यहाँ इसका अर्थ है जलन, ईर्ष्या या दिल में कोई कड़वाहट।
- خَصَاصَةٌ: अत्यधिक आवश्यकता, तंगी और फ़क़ीरी।
- شُحَّ نَفْسِهِ: मन का अति लालच, हिर्स और बुख़्ल (कंजूसी) से बचना।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अनसार (मदीना के मुसलमानों) की उन महान विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं, जिन्होंने मुहाजिरों (मक्का से हिजरत करके आने वालों) का भरपूर स्वागत किया। ये वो लोग थे जिन्होंने मुहाजिरों के आने से पहले ही मदीना को अपना वतन बना लिया था और ईमान को अपने दिलों में बसा लिया था। उनके दिलों में मुहाजिरों के लिए सच्ची मुहब्बत थी, और वे उन्हें अपने भाइयों से भी बढ़कर सम्मान देते थे।
जब अल्लाह ने बनी नज़ीर के माल का फ़य (जो बिना जंग के मिला) मुहाजिरों को दिया, तो अनसार के दिलों में न तो कोई जलन पैदा हुई और न ही कोई शिकायत। उन्होंने न केवल इसे खुशी से स्वीकार किया, बल्कि अपनी तरफ से भी मुहाजिरों की मदद करते रहे। यहाँ तक कि वे अपनी ज़रूरत के बावजूद दूसरों को अपने ऊपर तरजीह देते थे। अगर उनके पास एक ही चीज़ होती, तो वे उसे भी अपने भाई मुहाजिर को दे देते, चाहे उन्हें खुद उसकी सख्त ज़रूरत होती।
यह ईसार (दूसरों को अपने ऊपर प्राथमिकता देना) की वो बुलंद मंज़िल है, जो ईमान की असली मिठास को दर्शाती है। इसके बाद अल्लाह तआला एक सामान्य नियम बयान करते हैं कि जो व्यक्ति अपने नफ्स के लालच, हिर्स और कंजूसी से बचा लिया गया, वही सच्चा कामयाब और फलाह पाने वाला है। क्योंकि शुह्ह (लालच) ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह की राह में खर्च करने, भलाई करने और दूसरों की मदद करने से रोकती है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में भाईचारे और कुर्बानी की क्या अहमियत है। अनसार ने मुहाजिरों के लिए जो किया, वह दुनिया की किसी भी तहज़ीब में नहीं मिलता। वे अपने घर, अपनी ज़मीन, अपनी दौलत, यहाँ तक कि अपनी ज़रूरत की चीज़ें भी अपने भाइयों को दे देते थे। यही वो रूह है जो इस्लाम को ज़िंदा रखती है।
आज हमें भी चाहिए कि हम अपने मुस्लिम भाइयों के साथ इसी मुहब्बत और ईसार का रवैया अपनाएँ। अगर हम अपने दिलों से हसद, जलन और लालच को निकाल दें, तो हमारी ज़िंदगी में सुकून आएगा और हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनेंगे। याद रखें, जो शख्स अपने नफ्स के लालच से बच गया, वही असली कामयाब है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 7-11 — सूरा अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 9
सूरा अल-हश्र आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग मोहाजेरीन से पहले (हिजरत के) घर (मदीना) में…सूरा आयत 9/24 — सूरा अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हश्र सुनें, सूरा अल-हश्र अनुवाद, सूरा अल-हश्र mp3, सूरा अल-हश्र pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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