अल-अनआम · 104/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قَدْ جَاءَكُم بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ عَمِيَ فَعَلَيْهَا ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ ۝١٠٤
Qad jaaa`akum basaaa`iru mir Rabbikum faman absara falinafsihee wa man `amiya fa`alaihaa; wa maaa ana `alaikum bihafeez
📖 हिंदी अर्थ
तुम्हारे पास तो सुझाने वाली चीज़े आ ही चुकीं फिर जो देखे (समझे) तो अपने दम के लिए और जो अन्धा बने तो (उसका ज़रर (नुकसान) भी) ख़ुद उस पर है और (ऐ रसूल उन से कह दो) कि मै तुम लोगों का कुछ निगेहबान तो हूँ नहीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَصَائِرُ: बहुवचन है 'بَصِيرَة' का, जिसका अर्थ है स्पष्ट प्रमाण, रोशनी देने वाले दलीलें, और वे चीज़ें जिनसे सत्य और असत्य का भेद स्पष्ट हो जाए।
  • أَبْصَرَ: देखा, समझा, सत्य को पहचान लिया।
  • عَمِيَ: अंधा हो गया, यानी सत्य से आँखें मूँद लीं, उसे नहीं पहचाना।
  • بِحَفِيظٍ: निगरानी करने वाला, रक्षक, जो हर काम को गिनता और दर्ज करता हो।

आयत की व्याख्या:

हे लोगों! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से स्पष्ट प्रमाण और रोशनी देने वाले दलीलें आ चुकी हैं। ये वे सबूत हैं जो क़ुरआन और रसूल ﷺ के ज़रिए पेश किए गए, जिनसे हर समझदार इंसान हिदायत (सत्य मार्ग) और गुमराही (पथभ्रष्टता) के बीच फर्क साफ देख सकता है। अब जिसने इन प्रमाणों को देखा, उन्हें समझा और उन पर ईमान लाया, तो इसका लाभ उसी की आत्मा को मिलेगा — यह उसके अपने भले के लिए है। और जो इनसे अंधा रहा, यानी सत्य सामने आने के बाद भी उसे नहीं पहचाना और उस पर ईमान नहीं लाया, तो इसका नुकसान भी उसी की आत्मा पर ही पड़ेगा। यह नुकसान किसी और को नहीं, बल्कि सिर्फ उसी को होगा।

फिर अल्लाह के रसूल ﷺ से कहलवाया गया: "मैं तुम्हारे ऊपर निगरानी करने वाला और तुम्हारे कर्मों का हिसाब रखने वाला नहीं हूँ। मेरा काम सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना है। हिसाब लेने वाला तो अल्लाह है, और वही हर चीज़ का जानने वाला और निगरानी करने वाला है।"

आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह ने हर इंसान को सत्य समझने की क्षमता और स्पष्ट प्रमाण दिए हैं, ताकि वह अपनी मर्जी से सही रास्ता चुन सके। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है।
  2. ईमान और अच्छे कर्मों का फल इंसान को खुद मिलता है, और गुमराही व बुराई का अंजाम भी उसे खुद भुगतना पड़ता है। यह अल्लाह का पूर्ण न्याय है।
  3. रसूल ﷺ की ज़िम्मेदारी सिर्फ संदेश पहुँचाना थी, जो उन्होंने पूरी अमानत और वफादारी से निभाई। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें भी अपनी ज़िम्मेदारियाँ ईमानदारी से निभानी चाहिए, और दूसरों को भलाई की ओर बुलाना चाहिए, लेकिन परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
  4. इस्लाम ज़बरदस्ती का धर्म नहीं है; यह दलील और प्रमाण का धर्म है। हर इंसान को सोच-समझकर सत्य अपनाने की पूरी आज़ादी दी गई है।
  5. अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखने वाला है, इसलिए हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए और अच्छे काम करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि हमारा हर अच्छा काम हमारे ही भले के लिए है।
🎧 सुनें

📜 आयत 102-106 — अल-अनआम

102ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ فَاعْبُدُوهُ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
(लोगों) वही अल्लाह तुम्हारा परवरदिगार है उसके सिवा कोई माबूद नहीं वही हर चीज़ का पैदा करने वाला है तो उसी की इबादत करो और वही हर चीज़ का निगेह बान है
103لَّا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ ۖ وَهُوَ اللَّطِيفُ الْخَبِيرُ
उसको ऑंखें देख नहीं सकती (न दुनिया में न आख़िरत में) और वह (लोगों की) नज़रों को खूब देखता है और वह बड़ा बारीक बीन (देख़ने वाला) ख़बरदार है
104قَدْ جَاءَكُم بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ عَمِيَ فَعَلَيْهَا ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
तुम्हारे पास तो सुझाने वाली चीज़े आ ही चुकीं फिर जो देखे (समझे) तो अपने दम के लिए और जो अन्धा बने तो (उसका ज़रर (नुकसान) भी) ख़ुद उस पर है और (ऐ रसूल उन से कह दो) कि मै तुम लोगों का कुछ निगेहबान तो हूँ नहीं
105وَكَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ وَلِيَقُولُوا دَرَسْتَ وَلِنُبَيِّنَهُ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
और हम (अपनी) आयतें यूं उलट फेरकर बयान करते है (ताकि हुज्जत तमाम हो) और ताकि वह लोग ज़बानी भी इक़रार कर लें कि तुमने (क़ुरान उनके सामने) पढ़ दिया और ताकि जो लोग जानते है उनके लिए (क़ुरान का) खूब वाजेए करके बयान कर दें
106اتَّبِعْ مَا أُوحِيَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ
जो कुछ तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से 'वही' की जाए बस उसी पर चलो अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुशरिको से किनारा कश रहो
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
104आयत

अनुवाद — अल-अनआम 104

सूरा अल-अनआम आयत 104 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम्हारे पास तो सुझाने वाली चीज़े आ ही चुकीं फिर…

सूरा आयत 104/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 102–106. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए