अल-अनआम · 105/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَكَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ وَلِيَقُولُوا دَرَسْتَ وَلِنُبَيِّنَهُ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ ۝١٠٥
Wa kazaalika nusarriful Aayaati wa liyaqooloo darasta wa linubaiyinahoo liqawminy ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और हम (अपनी) आयतें यूं उलट फेरकर बयान करते है (ताकि हुज्जत तमाम हो) और ताकि वह लोग ज़बानी भी इक़रार कर लें कि तुमने (क़ुरान उनके सामने) पढ़ दिया और ताकि जो लोग जानते है उनके लिए (क़ुरान का) खूब वाजेए करके बयान कर दें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُصَرِّفُ: हम विभिन्न प्रकार से प्रस्तुत करते हैं, खोलकर बयान करते हैं।
  • الْآيَاتِ: निशानियाँ, प्रमाण और दलीलें।
  • دَرَسْتَ: तूने (पहले की किताबें) पढ़ी हैं, यानी तूने यह कुरान किसी से सीखकर लाया है।
  • لِنُبَيِّنَهُ: ताकि हम इसे (कुरान) स्पष्ट कर दें।

विस्तृत तफसीर:

और जिस प्रकार हमने इस कुरान में मक्का के मुशरिकों के सामने तौहीद (एकेश्वरवाद), रिसालत (पैग़म्बरी) और आख़िरत (प्रलय के दिन) के स्पष्ट प्रमाण पेश किए हैं, उसी प्रकार हम अपनी आयतों को हर मामले में विभिन्न शैलियों और तरीक़ों से बयान करते हैं — कभी वादे के रूप में, कभी डराने के रूप में, कभी नसीहत के रूप में — ताकि सत्य हर पहलू से उजागर हो जाए।

जब ये स्पष्ट आयतें उनके सामने आती हैं, तो ये ज़िद्दी और हठी लोग, सत्य को मानने के बजाय, झूठा आरोप लगाते हैं और कहते हैं: "तूने (ऐ मुहम्मद!) पहले की किताबें पढ़ी हैं और उन्हीं से यह कुरान लेकर आया है।" यह उनकी ओर से महज़ बहाना है, क्योंकि वे जानते हैं कि आपने कभी किसी किताब को नहीं पढ़ा और न ही किसी से सीखा — आप उम्मी (अनपढ़) थे। फिर भी वे सत्य को झुठलाने के लिए ऐसे ही झूठे आरोप गढ़ते हैं।

लेकिन हम इन आयतों को इसलिए विभिन्न रूपों में बयान करते हैं ताकि हम उन लोगों के लिए सत्य को पूरी तरह स्पष्ट कर दें जो जानने की समझ रखते हैं — यानी वे लोग जो सत्य और असत्य में फर्क कर सकते हैं, और जिनके दिल सच्चाई को कबूल करने के लिए तैयार हैं। यही वे लोग हैं जो ईमान लाते हैं, आप पर और इस कुरान पर विश्वास करते हैं, और इसके निर्देशों पर अमल करते हैं। वे ही सच्चे मोमिन हैं, और उन्हीं के लिए यह कुरान हिदायत और रहमत बनता है।

इस आयत में एक बड़ी शिक्षा है कि सत्य को पेश करने का तरीक़ा बदलते रहना चाहिए — कभी तर्क से, कभी नसीहत से, कभी डर से, कभी उम्मीद से — ताकि हर दिल तक पैग़ाम पहुँचे। और जो लोग सच्चाई की तलाश में हैं, उनके लिए यह कुरान एक रोशनी है जो उन्हें अंधेरों से निकालकर सीधे रास्ते पर लाती है।

और यह भी याद रखें कि जब आप सत्य को पेश करते हैं, तो विरोधियों की ओर से ताने और आरोप आएँगे — यह कोई नई बात नहीं है। हर नबी के साथ ऐसा हुआ। लेकिन आपका काम सिर्फ सत्य को स्पष्ट रूप से पहुँचाना है, और सत्य को कबूल करना या न करना उनका अपना फैसला है। जो लोग सच्चाई को जानकर उसे अपनाते हैं, वही सफल हैं — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

🎧 सुनें

📜 आयत 103-107 — अल-अनआम

103لَّا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ ۖ وَهُوَ اللَّطِيفُ الْخَبِيرُ
उसको ऑंखें देख नहीं सकती (न दुनिया में न आख़िरत में) और वह (लोगों की) नज़रों को खूब देखता है और वह बड़ा बारीक बीन (देख़ने वाला) ख़बरदार है
104قَدْ جَاءَكُم بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ عَمِيَ فَعَلَيْهَا ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
तुम्हारे पास तो सुझाने वाली चीज़े आ ही चुकीं फिर जो देखे (समझे) तो अपने दम के लिए और जो अन्धा बने तो (उसका ज़रर (नुकसान) भी) ख़ुद उस पर है और (ऐ रसूल उन से कह दो) कि मै तुम लोगों का कुछ निगेहबान तो हूँ नहीं
105وَكَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ وَلِيَقُولُوا دَرَسْتَ وَلِنُبَيِّنَهُ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
और हम (अपनी) आयतें यूं उलट फेरकर बयान करते है (ताकि हुज्जत तमाम हो) और ताकि वह लोग ज़बानी भी इक़रार कर लें कि तुमने (क़ुरान उनके सामने) पढ़ दिया और ताकि जो लोग जानते है उनके लिए (क़ुरान का) खूब वाजेए करके बयान कर दें
106اتَّبِعْ مَا أُوحِيَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ وَأَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِكِينَ
जो कुछ तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से 'वही' की जाए बस उसी पर चलो अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुशरिको से किनारा कश रहो
107وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا أَشْرَكُوا ۗ وَمَا جَعَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِوَكِيلٍ
और अगर ख़ुदा चाहता तो ये लोग शिर्क ही न करते और हमने तुमको उन लोगों का निगेहबान तो बनाया नहीं है और न तुम उनके ज़िम्मेदार हो
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
105आयत

अनुवाद — अल-अनआम 105

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सूरा आयत 105/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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