अल-अनआम · 103/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
لَّا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ ۖ وَهُوَ اللَّطِيفُ الْخَبِيرُ ۝١٠٣
Laa tudrikuhul absaaru wa Huwa yudrikul absaara wa huwal Lateeful Khabeer
📖 हिंदी अर्थ
उसको ऑंखें देख नहीं सकती (न दुनिया में न आख़िरत में) और वह (लोगों की) नज़रों को खूब देखता है और वह बड़ा बारीक बीन (देख़ने वाला) ख़बरदार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ: आँखें उसे घेर नहीं सकतीं, न ही उसकी पूरी सच्चाई को समझ सकती हैं।
  • وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ: वह आँखों को घेरता है, उनकी हर बारीकी और उनके द्वारा देखी गई हर चीज़ को जानता है।
  • اللَّطِيفُ: अपने बंदों पर अत्यंत दयालु और मेहरबान, जो सबसे सूक्ष्म चीज़ों को भी जानता है।
  • الْخَبِيرُ: हर चीज़ की अंदरूनी और छिपी हुई बातों से पूरी तरह अवगत।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की पाक ज़ात की महानता और उसकी बेमिसाल सिफ़ात को बयान करती है। अल्लाह तआला ऐसा है कि उसे दुनिया में किसी की आँखें नहीं देख सकतीं, और न ही कोई आँख उसे अपनी नज़र में समेट सकती है। उसकी ज़ात इंसानी इदराक (समझ) से बिल्कुल परे है। लेकिन आख़िरत में अल्लाह अपने नेक बंदों पर अपनी रहमत करेगा और वे उसे देखेंगे, हालाँकि वह भी उसकी पूरी हक़ीक़त को नहीं घेर पाएँगे। दूसरी तरफ़, अल्लाह तआला हर आँख को जानता है, उसकी हर हरकत, हर नज़र और उसके द्वारा देखी गई हर चीज़ से वह पूरी तरह वाक़िफ़ है। उसकी नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है, चाहे वह कितनी ही सूक्ष्म या छिपी हुई क्यों न हो। वह अपने बंदों के साथ अत्यंत लतीफ़ (मेहरबान और नर्मी बरतने वाला) है, उनकी कमज़ोरियों को जानता है और उन पर रहम करता है। वह ख़बीर है, यानी हर चीज़ की अंदरूनी हक़ीक़त और उसके भेदों से अवगत है, चाहे वह ज़ाहिर हो या बातिन (छिपी हुई)।

फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से हमें अल्लाह की ज़ात की बेमिसाल अज़मत का एहसास होता है, जो हमारी समझ और हमारी आँखों की पहुँच से बहुत ऊपर है। यह हमें अल्लाह के सामने अदब और इन्किसारी (विनम्रता) सिखाता है।
  2. अल्लाह का हर चीज़ पर पूरा इहाता (घेरा) है, और वह हमारी हर नज़र और हर अमल को देखता और जानता है। इससे हमें अपने अंदर अल्लाह की निगरानी का एहसास पैदा करना चाहिए और गुनाहों से बचना चाहिए।
  3. अल्लाह का लतीफ़ और ख़बीर होना हमारे लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है, क्योंकि वह हमारी कमज़ोरियों और हालात को जानता है और अपने बंदों पर रहम करता है। यह हमें अल्लाह से मुहब्बत और उम्मीद का जज़्बा देता है।
  4. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अल्लाह की ज़ात के बारे में अपनी अक़्ल से ग़ौर करने की कोशिश न करें, बल्कि उसकी सिफ़ात और उसकी निशानियों पर ग़ौर करें, क्योंकि उसकी ज़ात हमारी समझ से परे है।


📜 आयत 101-105 — अल-अनआम

101بَدِيعُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ أَنَّىٰ يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ وَلَمْ تَكُن لَّهُ صَاحِبَةٌ ۖ وَخَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
सारे आसमान और ज़मीन का मवविद (बनाने वाला) है उसके कोई लड़का क्योंकर हो सकता है जब उसकी कोई बीबी ही नहीं है और उसी ने हर चीज़ को पैदा किया और वही हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
102ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ فَاعْبُدُوهُ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
(लोगों) वही अल्लाह तुम्हारा परवरदिगार है उसके सिवा कोई माबूद नहीं वही हर चीज़ का पैदा करने वाला है तो उसी की इबादत करो और वही हर चीज़ का निगेह बान है
103لَّا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ ۖ وَهُوَ اللَّطِيفُ الْخَبِيرُ
उसको ऑंखें देख नहीं सकती (न दुनिया में न आख़िरत में) और वह (लोगों की) नज़रों को खूब देखता है और वह बड़ा बारीक बीन (देख़ने वाला) ख़बरदार है
104قَدْ جَاءَكُم بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَنْ عَمِيَ فَعَلَيْهَا ۚ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ
तुम्हारे पास तो सुझाने वाली चीज़े आ ही चुकीं फिर जो देखे (समझे) तो अपने दम के लिए और जो अन्धा बने तो (उसका ज़रर (नुकसान) भी) ख़ुद उस पर है और (ऐ रसूल उन से कह दो) कि मै तुम लोगों का कुछ निगेहबान तो हूँ नहीं
105وَكَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ وَلِيَقُولُوا دَرَسْتَ وَلِنُبَيِّنَهُ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
और हम (अपनी) आयतें यूं उलट फेरकर बयान करते है (ताकि हुज्जत तमाम हो) और ताकि वह लोग ज़बानी भी इक़रार कर लें कि तुमने (क़ुरान उनके सामने) पढ़ दिया और ताकि जो लोग जानते है उनके लिए (क़ुरान का) खूब वाजेए करके बयान कर दें
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
103आयत

अनुवाद — अल-अनआम 103

सूरा अल-अनआम आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसको ऑंखें देख नहीं सकती (न दुनिया में न आख़िरत…

सूरा आयत 103/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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