अल-अनआम · 150/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ هَلُمَّ شُهَدَاءَكُمُ الَّذِينَ يَشْهَدُونَ أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَ هَٰذَا ۖ فَإِن شَهِدُوا فَلَا تَشْهَدْ مَعَهُمْ ۚ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ وَهُم بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ ۝١٥٠
Qul halumma shuhadaaa`akumul lazeena yash hadoona annal laaha harrama haazaa fa in shahidoo falaa tashhad ma`ahum; wa laa tattabi` ahwaaa`al lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wallazeena laa yu`minoona bil Aakhirati wa hum bi Rabbihim ya`diloon
📖 हिंदी अर्थ
फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाज़िर करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खुदा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर न चलना
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هَلُمَّ: लाओ, पेश करो, बुलाओ।
  • شُهَدَاءَكُمُ: तुम्हारे गवाह।
  • يَعْدِلُونَ: (यहाँ) शिर्क करते हैं, बराबर ठहराते हैं (अल्लाह के साथ दूसरों को)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए जो अल्लाह के हलाल किए हुए को हराम ठहराते हैं और दावा करते हैं कि अल्लाह ने ही यह सब हराम किया है: "लाओ अपने गवाहों को जो गवाही दें कि अल्लाह ने वास्तव में यह चीज़ें हराम की हैं।" अगर वे झूठी गवाही देने के लिए आगे आएँ, तो ऐ नबी! आप उनकी गवाही की तस्दीक़ न करें और न ही उनके साथ खड़े हों, क्योंकि यह गवाही झूठ और बहतान पर आधारित है।

फिर अल्लाह तआला आपको नसीहत करता है कि आप उन लोगों की मनमानी और ख्वाहिशात की पैरवी न करें जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया — उन्होंने अल्लाह के हलाल को हराम और हराम को हलाल ठहराकर अपनी मनमानी की। और न ही आप उन लोगों की पैरवी करें जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते और न ही उसके लिए कोई अमल करते हैं, और जो अपने रब के साथ दूसरों को साझी ठहराते हैं — वे अल्लाह के साथ मूर्तियों और देवताओं को बराबर करते हैं। जब उनका हाल यह है, तो उनकी पैरवी कैसे की जा सकती है? उनकी बातों और दावों का कोई भरोसा नहीं।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से सीख मिलती है कि धार्मिक मामलों में सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म माना जाए, न कि अपनी या दूसरों की मनमानी का। जो चीज़ अल्लाह ने हलाल की है उसे हराम कहना और जो हराम की है उसे हलाल कहना बड़ा गुनाह है।
  2. झूठी गवाही देना और उसका साथ देना सख्त मना है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह सच की गवाही दे और झूठ का साथ कभी न दे।
  3. इंसान को अपनी ख्वाहिशों और अहवा को दीन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। असली कामयाबी उसी में है कि इंसान अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाए।
  4. आख़िरत पर ईमान और अल्लाह के साथ किसी को साझी न ठहराना — यही वे बुनियादी उसूल हैं जिन पर एक मुसलमान की ज़िंदगी क़ायम होती है। जो इनसे महरूम है, उसकी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि दीन के मामले में सिर्फ़ इल्म और सच्चाई की बुनियाद पर चलना चाहिए, न कि अंधी तक़लीद या बुज़ुर्गों की आदतों की पैरवी पर।
🎧 सुनें

📜 आयत 148-152 — अल-अनआम

148سَيَقُولُ الَّذِينَ أَشْرَكُوا لَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا أَشْرَكْنَا وَلَا آبَاؤُنَا وَلَا حَرَّمْنَا مِن شَيْءٍ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ حَتَّىٰ ذَاقُوا بَأْسَنَا ۗ قُلْ هَلْ عِندَكُم مِّنْ عِلْمٍ فَتُخْرِجُوهُ لَنَا ۖ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَخْرُصُونَ
अनक़रीब मुशरेकीन कहेंगें कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम लोग शिर्क करते और न हमारे बाप दादा और न हम कोई चीज़ अपने ऊपर हराम करते उसी तरह (बातें बना बना के) जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं (पैग़म्बरों को) झुठलाते रहे यहाँ तक कि उन लोगों ने हमारे अज़ाब (के मज़े)े को चख़ा (ऐ रसूल) तुम कहो कि तुम्हारे पास कोई दलील है (अगर है) तो हमारे (दिखाने के) वास्ते उसको निकालो (दलील तो क्या) पेश करोगे तुम लोग तो सिर्फ अपने ख्याल ख़ाम की पैरवी करते हो और सिर्फ अटकल पच्चू बातें करते हो
149قُلْ فَلِلَّهِ الْحُجَّةُ الْبَالِغَةُ ۖ فَلَوْ شَاءَ لَهَدَاكُمْ أَجْمَعِينَ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि (अब तुम्हारे पास कोई दलील नहीं है) ख़ुदा तक पहुंचाने वाली दलील ख़ुदा ही के लिए ख़ास है
150قُلْ هَلُمَّ شُهَدَاءَكُمُ الَّذِينَ يَشْهَدُونَ أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَ هَٰذَا ۖ فَإِن شَهِدُوا فَلَا تَشْهَدْ مَعَهُمْ ۚ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ وَهُم بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ
फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाज़िर करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खुदा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर न चलना
151۞ قُلْ تَعَالَوْا أَتْلُ مَا حَرَّمَ رَبُّكُمْ عَلَيْكُمْ ۖ أَلَّا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا ۖ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا ۖ وَلَا تَقْتُلُوا أَوْلَادَكُم مِّنْ إِمْلَاقٍ ۖ نَّحْنُ نَرْزُقُكُمْ وَإِيَّاهُمْ ۖ وَلَا تَقْرَبُوا الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ ۖ وَلَا تَقْتُلُوا النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُم بِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि (बेबस) आओ जो चीज़ें ख़ुदा ने तुम पर हराम की हैं वह मैं तुम्हें पढ़ कर सुनाऊँ (वह) यह कि किसी चीज़ को ख़ुदा का शरीक़ न बनाओ और माँ बाप के साथ नेक सुलूक़ करो और मुफ़लिसी के ख़ौफ से अपनी औलाद को मार न डालना (क्योंकि) उनको और तुमको रिज़क देने वाले तो हम हैं और बदकारियों के क़रीब भी न जाओ ख्वाह (चाहे) वह ज़ाहिर हो या पोशीदा और किसी जान वाले को जिस के क़त्ल को ख़ुदा ने हराम किया है न मार डालना मगर (किसी) हक़ के ऐवज़ में वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हें हुक्म दिया है ताकि तुम लोग समझो और यतीम के माल के करीब भी न जाओ
152وَلَا تَقْرَبُوا مَالَ الْيَتِيمِ إِلَّا بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ حَتَّىٰ يَبْلُغَ أَشُدَّهُ ۖ وَأَوْفُوا الْكَيْلَ وَالْمِيزَانَ بِالْقِسْطِ ۖ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۖ وَإِذَا قُلْتُمْ فَاعْدِلُوا وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبَىٰ ۖ وَبِعَهْدِ اللَّهِ أَوْفُوا ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُم بِهِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
लेकिन इस तरीके पर कि (उसके हक़ में) बेहतर हो यहाँ तक कि वह अपनी जवानी की हद को पहुंच जाए और इन्साफ के साथ नाप और तौल पूरी किया करो हम किसी शख्स को उसकी ताक़त से बढ़कर तकलीफ नहीं देते और (चाहे कुछ हो मगर) जब बात कहो तो इन्साफ़ से अगरचे वह (जिसके तुम ख़िलाफ न हो) तुम्हारा अज़ीज़ ही (क्यों न) हो और ख़ुदा के एहद व पैग़ाम को पूरा करो यह वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हे हुक्म दिया है कि तुम इबरत हासिल करो और ये भी (समझ लो) कि यही मेरा सीधा रास्ता है
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अनुवाद — अल-अनआम 150

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Tuesday, August 18, 2026

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