Qul halumma shuhadaaa`akumul lazeena yash hadoona annal laaha harrama haazaa fa in shahidoo falaa tashhad ma`ahum; wa laa tattabi` ahwaaa`al lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wallazeena laa yu`minoona bil Aakhirati wa hum bi Rabbihim ya`diloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाज़िर करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खुदा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर न चलना
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
کہو کہ اپنے گواہوں کو لاؤ جو بتائیں کہ خدا نے یہ چیزیں حرام کی ہیں پھر اگر وہ (آ کر) گواہی دیں تو تم ان کے ساتھ گواہی نہ دینا اور نہ ان لوگوں کی خواہشوں کی پیروی کرنا جو ہماری آیتوں کو جھٹلاتے ہیں اور آخرت پر ایمان نہیں لاتے اور (بتوں کو) اپنے پروردگار کے برابر ٹھہراتے ہیں
फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाज़िर करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खुदा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर न चलना
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
هَلُمَّ: लाओ, पेश करो, बुलाओ।
شُهَدَاءَكُمُ: तुम्हारे गवाह।
يَعْدِلُونَ: (यहाँ) शिर्क करते हैं, बराबर ठहराते हैं (अल्लाह के साथ दूसरों को)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए जो अल्लाह के हलाल किए हुए को हराम ठहराते हैं और दावा करते हैं कि अल्लाह ने ही यह सब हराम किया है: "लाओ अपने गवाहों को जो गवाही दें कि अल्लाह ने वास्तव में यह चीज़ें हराम की हैं।" अगर वे झूठी गवाही देने के लिए आगे आएँ, तो ऐ नबी! आप उनकी गवाही की तस्दीक़ न करें और न ही उनके साथ खड़े हों, क्योंकि यह गवाही झूठ और बहतान पर आधारित है।
फिर अल्लाह तआला आपको नसीहत करता है कि आप उन लोगों की मनमानी और ख्वाहिशात की पैरवी न करें जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया — उन्होंने अल्लाह के हलाल को हराम और हराम को हलाल ठहराकर अपनी मनमानी की। और न ही आप उन लोगों की पैरवी करें जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते और न ही उसके लिए कोई अमल करते हैं, और जो अपने रब के साथ दूसरों को साझी ठहराते हैं — वे अल्लाह के साथ मूर्तियों और देवताओं को बराबर करते हैं। जब उनका हाल यह है, तो उनकी पैरवी कैसे की जा सकती है? उनकी बातों और दावों का कोई भरोसा नहीं।
फ़ायदे (सबक):
इस आयत से सीख मिलती है कि धार्मिक मामलों में सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म माना जाए, न कि अपनी या दूसरों की मनमानी का। जो चीज़ अल्लाह ने हलाल की है उसे हराम कहना और जो हराम की है उसे हलाल कहना बड़ा गुनाह है।
झूठी गवाही देना और उसका साथ देना सख्त मना है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह सच की गवाही दे और झूठ का साथ कभी न दे।
इंसान को अपनी ख्वाहिशों और अहवा को दीन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। असली कामयाबी उसी में है कि इंसान अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाए।
आख़िरत पर ईमान और अल्लाह के साथ किसी को साझी न ठहराना — यही वे बुनियादी उसूल हैं जिन पर एक मुसलमान की ज़िंदगी क़ायम होती है। जो इनसे महरूम है, उसकी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
यह आयत हमें सिखाती है कि दीन के मामले में सिर्फ़ इल्म और सच्चाई की बुनियाद पर चलना चाहिए, न कि अंधी तक़लीद या बुज़ुर्गों की आदतों की पैरवी पर।
अनक़रीब मुशरेकीन कहेंगें कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम लोग शिर्क करते और न हमारे बाप दादा और न हम कोई चीज़ अपने ऊपर हराम करते उसी तरह (बातें बना बना के) जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं (पैग़म्बरों को) झुठलाते रहे यहाँ तक कि उन लोगों ने हमारे अज़ाब (के मज़े)े को चख़ा (ऐ रसूल) तुम कहो कि तुम्हारे पास कोई दलील है (अगर है) तो हमारे (दिखाने के) वास्ते उसको निकालो (दलील तो क्या) पेश करोगे तुम लोग तो सिर्फ अपने ख्याल ख़ाम की पैरवी करते हो और सिर्फ अटकल पच्चू बातें करते हो
फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाज़िर करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खुदा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर न चलना
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि (बेबस) आओ जो चीज़ें ख़ुदा ने तुम पर हराम की हैं वह मैं तुम्हें पढ़ कर सुनाऊँ (वह) यह कि किसी चीज़ को ख़ुदा का शरीक़ न बनाओ और माँ बाप के साथ नेक सुलूक़ करो और मुफ़लिसी के ख़ौफ से अपनी औलाद को मार न डालना (क्योंकि) उनको और तुमको रिज़क देने वाले तो हम हैं और बदकारियों के क़रीब भी न जाओ ख्वाह (चाहे) वह ज़ाहिर हो या पोशीदा और किसी जान वाले को जिस के क़त्ल को ख़ुदा ने हराम किया है न मार डालना मगर (किसी) हक़ के ऐवज़ में वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हें हुक्म दिया है ताकि तुम लोग समझो और यतीम के माल के करीब भी न जाओ
लेकिन इस तरीके पर कि (उसके हक़ में) बेहतर हो यहाँ तक कि वह अपनी जवानी की हद को पहुंच जाए और इन्साफ के साथ नाप और तौल पूरी किया करो हम किसी शख्स को उसकी ताक़त से बढ़कर तकलीफ नहीं देते और (चाहे कुछ हो मगर) जब बात कहो तो इन्साफ़ से अगरचे वह (जिसके तुम ख़िलाफ न हो) तुम्हारा अज़ीज़ ही (क्यों न) हो और ख़ुदा के एहद व पैग़ाम को पूरा करो यह वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हे हुक्म दिया है कि तुम इबरत हासिल करो और ये भी (समझ लो) कि यही मेरा सीधा रास्ता है
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