अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الحُجَّةُ: प्रमाण, तर्क, साक्ष्य
- البَالِغَةُ: पूर्ण, परिपक्व, जो स्पष्ट और अटल हो
- لَهَدَاكُمْ: वह तुम्हें मार्गदर्शन करता (सीधे रास्ते पर चलाता)
व्याख्या:
हे पैगंबर! आप इन मुशरिकिन (बहुदेववादियों) से कह दीजिए कि जो तर्क और साक्ष्य तुम पेश कर रहे हो, वे बिल्कुल कमज़ोर और निराधार हैं। सच्चा और पूर्ण प्रमाण तो केवल अल्लाह के पास है, जो स्पष्ट, अटल और सभी संदेहों को समाप्त करने वाला है। उसका प्रमाण उसकी किताब (क़ुरआन) और उसके रसूल (पैगंबर) के माध्यम से स्थापित है। उसके सामने तुम्हारे सभी बहाने और शुब्हात (संदेह) बेकार हो जाते हैं।
अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अपनी दलील पूरी कर दी है—उन्हें समझने की शक्ति दी, रसूल भेजे, किताबें उतारीं, और सत्य को स्पष्ट कर दिया। अब यदि अल्लाह चाहता, तो वह तुम सबको ज़बरदस्ती ईमान और सीधे रास्ते पर ले आता, क्योंकि उसकी इच्छा के आगे कुछ भी नहीं टिक सकता। लेकिन उसकी बुद्धि और न्याय की मांग है कि वह मनुष्य को स्वतंत्र इच्छा दे, ताकि वह अपने चुनाव से सत्य को अपनाए या अस्वीकार करे। अल्लाह ने चाहा कि कुछ लोग अपनी इच्छा से ईमान लाएँ और कुछ अपने दुराग्रह के कारण कुफ्र पर रहें। यह उसकी इच्छा और उसकी योजना का हिस्सा है। यदि वह चाहता, तो सबको ईमान पर एकत्र कर देता, परंतु उसने अपनी बुद्धि के अनुसार मनुष्य को परीक्षा में डाला है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह का प्रमाण सबसे पूर्ण और अटल है; उसके सामने किसी का कोई बहाना या तर्क नहीं चल सकता। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन में सत्य को स्वीकार करने में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह की दलील स्पष्ट है।
- अल्लाह की इच्छा और उसकी बुद्धि पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। वह जो करता है, उसमें गहरी भलाई होती है, भले ही हमें वह समझ न आए।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ईमान और हिदायत अल्लाह के हाथ में है। हमें अपनी कोशिश करनी चाहिए, लेकिन परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। यह हमें विनम्रता और अल्लाह पर भरोसा सिखाता है।
- अल्लाह ने हमें स्वतंत्र इच्छा दी है, यह उसकी बड़ी रहमत है। हमें इसका सही उपयोग करते हुए सत्य और नेकी का रास्ता चुनना चाहिए, क्योंकि यही हमारी सफलता का मार्ग है।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की हिदायत और गुमराही उसकी इच्छा के अधीन है, लेकिन वह अपने बंदों पर ज़ुल्म नहीं करता। जो सत्य को ढूंढता है, अल्लाह उसे रास्ता दिखाता है, और जो उसे ठुकराता है, उसे उसके किए की सज़ा मिलती है। यह हमें न्याय और ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है।
📜 आयत 147-151 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 149
सूरा अल-अनआम आयत 149 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अब तुम्हारे पास कोई दलील…सूरा आयत 149/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 147–151. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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