अल-अनआम · 149/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ فَلِلَّهِ الْحُجَّةُ الْبَالِغَةُ ۖ فَلَوْ شَاءَ لَهَدَاكُمْ أَجْمَعِينَ ۝١٤٩
Qul falillaahil hujjatul baalighatu falaw shaaa`a lahadaakum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि (अब तुम्हारे पास कोई दलील नहीं है) ख़ुदा तक पहुंचाने वाली दलील ख़ुदा ही के लिए ख़ास है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الحُجَّةُ: प्रमाण, तर्क, साक्ष्य
  • البَالِغَةُ: पूर्ण, परिपक्व, जो स्पष्ट और अटल हो
  • لَهَدَاكُمْ: वह तुम्हें मार्गदर्शन करता (सीधे रास्ते पर चलाता)

व्याख्या:

हे पैगंबर! आप इन मुशरिकिन (बहुदेववादियों) से कह दीजिए कि जो तर्क और साक्ष्य तुम पेश कर रहे हो, वे बिल्कुल कमज़ोर और निराधार हैं। सच्चा और पूर्ण प्रमाण तो केवल अल्लाह के पास है, जो स्पष्ट, अटल और सभी संदेहों को समाप्त करने वाला है। उसका प्रमाण उसकी किताब (क़ुरआन) और उसके रसूल (पैगंबर) के माध्यम से स्थापित है। उसके सामने तुम्हारे सभी बहाने और शुब्हात (संदेह) बेकार हो जाते हैं।

अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अपनी दलील पूरी कर दी है—उन्हें समझने की शक्ति दी, रसूल भेजे, किताबें उतारीं, और सत्य को स्पष्ट कर दिया। अब यदि अल्लाह चाहता, तो वह तुम सबको ज़बरदस्ती ईमान और सीधे रास्ते पर ले आता, क्योंकि उसकी इच्छा के आगे कुछ भी नहीं टिक सकता। लेकिन उसकी बुद्धि और न्याय की मांग है कि वह मनुष्य को स्वतंत्र इच्छा दे, ताकि वह अपने चुनाव से सत्य को अपनाए या अस्वीकार करे। अल्लाह ने चाहा कि कुछ लोग अपनी इच्छा से ईमान लाएँ और कुछ अपने दुराग्रह के कारण कुफ्र पर रहें। यह उसकी इच्छा और उसकी योजना का हिस्सा है। यदि वह चाहता, तो सबको ईमान पर एकत्र कर देता, परंतु उसने अपनी बुद्धि के अनुसार मनुष्य को परीक्षा में डाला है।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह का प्रमाण सबसे पूर्ण और अटल है; उसके सामने किसी का कोई बहाना या तर्क नहीं चल सकता। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन में सत्य को स्वीकार करने में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह की दलील स्पष्ट है।
  2. अल्लाह की इच्छा और उसकी बुद्धि पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। वह जो करता है, उसमें गहरी भलाई होती है, भले ही हमें वह समझ न आए।
  3. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि ईमान और हिदायत अल्लाह के हाथ में है। हमें अपनी कोशिश करनी चाहिए, लेकिन परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। यह हमें विनम्रता और अल्लाह पर भरोसा सिखाता है।
  4. अल्लाह ने हमें स्वतंत्र इच्छा दी है, यह उसकी बड़ी रहमत है। हमें इसका सही उपयोग करते हुए सत्य और नेकी का रास्ता चुनना चाहिए, क्योंकि यही हमारी सफलता का मार्ग है।
  5. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की हिदायत और गुमराही उसकी इच्छा के अधीन है, लेकिन वह अपने बंदों पर ज़ुल्म नहीं करता। जो सत्य को ढूंढता है, अल्लाह उसे रास्ता दिखाता है, और जो उसे ठुकराता है, उसे उसके किए की सज़ा मिलती है। यह हमें न्याय और ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 147-151 — अल-अनआम

147فَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل رَّبُّكُمْ ذُو رَحْمَةٍ وَاسِعَةٍ وَلَا يُرَدُّ بَأْسُهُ عَنِ الْقَوْمِ الْمُجْرِمِينَ
(ऐ रसूल) पर अगर वह तुम्हें झुठलाएं तो तुम (जवाब) में कहो कि (अगरचे) तुम्हारा परवरदिगार बड़ी वसीह रहमत वाला है मगर उसका अज़ाब गुनाहगार लोगों से टलता भी नहीं
148سَيَقُولُ الَّذِينَ أَشْرَكُوا لَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا أَشْرَكْنَا وَلَا آبَاؤُنَا وَلَا حَرَّمْنَا مِن شَيْءٍ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ حَتَّىٰ ذَاقُوا بَأْسَنَا ۗ قُلْ هَلْ عِندَكُم مِّنْ عِلْمٍ فَتُخْرِجُوهُ لَنَا ۖ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَإِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَخْرُصُونَ
अनक़रीब मुशरेकीन कहेंगें कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम लोग शिर्क करते और न हमारे बाप दादा और न हम कोई चीज़ अपने ऊपर हराम करते उसी तरह (बातें बना बना के) जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं (पैग़म्बरों को) झुठलाते रहे यहाँ तक कि उन लोगों ने हमारे अज़ाब (के मज़े)े को चख़ा (ऐ रसूल) तुम कहो कि तुम्हारे पास कोई दलील है (अगर है) तो हमारे (दिखाने के) वास्ते उसको निकालो (दलील तो क्या) पेश करोगे तुम लोग तो सिर्फ अपने ख्याल ख़ाम की पैरवी करते हो और सिर्फ अटकल पच्चू बातें करते हो
149قُلْ فَلِلَّهِ الْحُجَّةُ الْبَالِغَةُ ۖ فَلَوْ شَاءَ لَهَدَاكُمْ أَجْمَعِينَ
(ऐ रसूल) तुम कहो कि (अब तुम्हारे पास कोई दलील नहीं है) ख़ुदा तक पहुंचाने वाली दलील ख़ुदा ही के लिए ख़ास है
150قُلْ هَلُمَّ شُهَدَاءَكُمُ الَّذِينَ يَشْهَدُونَ أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَ هَٰذَا ۖ فَإِن شَهِدُوا فَلَا تَشْهَدْ مَعَهُمْ ۚ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ وَهُم بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ
फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाज़िर करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खुदा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर न चलना
151۞ قُلْ تَعَالَوْا أَتْلُ مَا حَرَّمَ رَبُّكُمْ عَلَيْكُمْ ۖ أَلَّا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا ۖ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا ۖ وَلَا تَقْتُلُوا أَوْلَادَكُم مِّنْ إِمْلَاقٍ ۖ نَّحْنُ نَرْزُقُكُمْ وَإِيَّاهُمْ ۖ وَلَا تَقْرَبُوا الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ ۖ وَلَا تَقْتُلُوا النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ ۚ ذَٰلِكُمْ وَصَّاكُم بِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि (बेबस) आओ जो चीज़ें ख़ुदा ने तुम पर हराम की हैं वह मैं तुम्हें पढ़ कर सुनाऊँ (वह) यह कि किसी चीज़ को ख़ुदा का शरीक़ न बनाओ और माँ बाप के साथ नेक सुलूक़ करो और मुफ़लिसी के ख़ौफ से अपनी औलाद को मार न डालना (क्योंकि) उनको और तुमको रिज़क देने वाले तो हम हैं और बदकारियों के क़रीब भी न जाओ ख्वाह (चाहे) वह ज़ाहिर हो या पोशीदा और किसी जान वाले को जिस के क़त्ल को ख़ुदा ने हराम किया है न मार डालना मगर (किसी) हक़ के ऐवज़ में वह बातें हैं जिनका ख़ुदा ने तुम्हें हुक्म दिया है ताकि तुम लोग समझो और यतीम के माल के करीब भी न जाओ
अल-अनआमकुरान सूची
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149आयत

अनुवाद — अल-अनआम 149

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सूरा आयत 149/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 147–151. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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