अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ: उन्होंने अल्लाह की उसकी सही मर्यादा के अनुसार क़द्र (प्रतिष्ठा/सम्मान) नहीं की।
- قَرَاطِيسَ: कागज़ों/पन्नों (यहाँ तोड़े-मरोड़े और अलग-अलग किए गए पन्ने मुराद हैं)।
- تُبْدُونَهَا: तुम उसे (जो तुम्हारे मन-मुताबिक हो) दिखाते हो।
- وَتُخْفُونَ كَثِيرًا: और बहुत कुछ छिपाते हो।
- خَوْضِهِمْ: उनके बेकार/झूठे विवाद और बातों में पड़ने में।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की निंदा कर रहा है जिन्होंने अल्लाह की सच्ची क़द्र नहीं की, यानी उसे वह सम्मान नहीं दिया जो उसके लिए ज़रूरी है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अल्लाह ने किसी इंसान पर कुछ भी नाज़िल (उतारा) नहीं। यह बात उन्होंने अल्लाह की महानता और उसकी रहमत को समझे बिना कही।
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ से कहता है कि इनसे पूछो: "अगर तुम्हारा दावा सच है कि अल्लाह ने किसी इंसान पर कुछ नाज़िल नहीं किया, तो वह किताब (तौरात) किसने नाज़िल की जो मूसा (अलैहिस्सलाम) लाए थे? वह किताब जो लोगों के लिए नूर (रोशनी) और हिदायत (मार्गदर्शन) थी?"
फिर अल्लाह तआला यहूदियों को संबोधित करता है और उन्हें डांटता है कि तुम लोगों ने उस किताब (तौरात) को अलग-अलग कागज़ों में बाँट दिया। जो बात तुम्हारे मन-मुताबिक थी, उसे दिखा दिया और जो तुम्हारे ख़िलाफ़ थी, उसे छिपा दिया। उन्होंने मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत की निशानियाँ और सच्चाई को छिपाया, और रज्म (पथराव) की आयत को भी छिपाया।
फिर अल्लाह तआला कहता है: "और तुम्हें (अरब के लोगों को) वह चीज़ें सिखाई गईं जो तुम नहीं जानते थे और न तुम्हारे बाप-दादा जानते थे।" यानी क़ुरआन के ज़रिए अल्लाह ने तुम्हें पिछली उम्मतों के हालात, भविष्य की ख़बरें और दीन की वो बातें सिखाईं जो तुम्हारी समझ से बाहर थीं।
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि इनसे कह दो: "अल्लाह ही ने इसे नाज़िल किया है।" फिर उन्हें उनके हाल पर छोड़ देने का हुक्म देता है कि वे अपनी बेकार बहसों और खेल-कूद में पड़े रहें, यह उनके लिए धमकी है कि अल्लाह उन्हें उनके किए पर पकड़ेगा।
दावत और नसीहत का पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़द्र करना यानी उसे सच्चे दिल से मानना, उसकी नाज़िल की हुई हर किताब और हर नबी पर ईमान लाना है। जो लोग अल्लाह की नाज़िल की हुई चीज़ों में से कुछ पर ईमान लाएँ और कुछ को झुठलाएँ, वे दरअसल अल्लाह की सही क़द्र नहीं करते। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को पूरी तरह मानें, उसमें कोई कमी न करें और न ही उसे छिपाएँ। यही अल्लाह की सच्ची क़द्र है। याद रखें, अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें क़ुरआन जैसी किताब दी है जो हर ज़माने के लिए हिदायत है — इसे पकड़ें और इस पर अमल करें, यही हमारी कामयाबी है।
📜 आयत 89-93 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 91
सूरा अल-अनआम आयत 91 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बस और उन लोगों (यहूद) ने ख़ुदा की जैसी…सूरा आयत 91/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 89–93. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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