Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاخْتَارَ: चुना, चयन किया
- لِّمِيقَاتِنَا: हमारे नियत समय के लिए (जो अल्लाह ने निर्धारित किया था)
- الرَّجْفَةُ: भयानक भूकंप/ज़लज़ला, काँपना
- السُّفَهَاء: बुद्धिहीन, नासमझ, कम अक्ल वाले लोग
- فِتْنَتُكَ: तेरी परीक्षा, तेरी ओर से आज़माइश
- وَلِيُّنَا: हमारा संरक्षक, हमारा कार्यसंभालने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम में से सत्तर नेक और बेहतरीन लोगों को चुना और उन्हें लेकर अल्लाह के नियत समय और वादे के मुताबिक कोह-ए-तूर (पहाड़) की ओर रवाना हुए। यह इसलिए था कि वे बनी इसराईल की ओर से अल्लाह से माफ़ी माँगें, क्योंकि उनके कुछ नासमझ लोगों ने बछड़े की पूजा करके बहुत बड़ा गुनाह किया था। लेकिन जब वे सत्तर लोग उस मुक़द्दस जगह पर पहुँचे, तो उन्होंने हज़रत मूसा से कहा: "हम तब तक ईमान नहीं लाएँगे जब तक हम अल्लाह को खुली आँखों से न देख लें!" यह उनकी ज़्यादती और गुस्ताख़ी थी। इसी वजह से अल्लाह का क़हर नाज़िल हुआ और एक भयानक भूकंप/ज़लज़ले ने उन्हें आ लिया, जिससे वे सबके सब मर गए।
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने यह मंज़र देखा, तो उनका दिल दया और ग़म से भर गया। वे अल्लाह की तरफ़ रुजू करके गिड़गिड़ाते हुए कहने लगे: "ऐ मेरे रब! अगर तू चाहता तो इन सबको पहले ही हलाक कर देता और मुझे भी उनके साथ। लेकिन अब मैं बनी इसराईल के पास क्या लेकर जाऊँगा? वे कहेंगे कि तूने हमारे सत्तर नेक आदमियों को ले जाकर हलाक कर दिया। क्या तू हमें उन नासमझ लोगों के किए हुए काम की सज़ा में हलाक करेगा, जिन्होंने बछड़े की पूजा की? यह तो केवल तेरी परीक्षा और आज़माइश है, जिसके ज़रिए तू जिसे चाहे गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहे हिदायत देता है। तू ही हमारा संरक्षक और कार्यसंभालने वाला है। हमारे गुनाह माफ़ कर दे और हम पर रहम फरमा। तू सबसे बेहतर माफ़ करने वाला है।"
यह दुआ और पुकार देखिए कि एक नबी अपनी उम्मत के लिए किस तरह दिल टूटकर अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाता है। यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें भी अपनी गलतियों पर अल्लाह से माफ़ी माँगनी चाहिए और उसी से रहम की उम्मीद रखनी चाहिए। अल्लाह तआला बहुत मेहरबान है, वह अपने बंदों की दुआएँ सुनता है और उनकी गलतियों को माफ़ कर देता है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों, क्योंकि वह सबसे बड़ा माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है।
📜 आयत 153-157 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 155
सूरा अल-आराफ आयत 155 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मूसा ने अपनी क़ौम से हमारा वायदा पूरा करने…सूरा आयत 155/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 153–157. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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