Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَكَتَ: सुकून मिलना, शांत हो जाना, समाप्त हो जाना।
- الْأَلْوَاحَ: वे पट्टियाँ (तख्तियाँ) जिन पर तौरात लिखी गई थी।
- نُسْخَتِهَا: उसकी प्रति, यानी उन पट्टियों में जो कुछ लिखा गया था।
- هُدًى: मार्गदर्शन, सत्य का रास्ता।
- رَحْمَةٌ: दया, कृपा।
- يَرْهَبُونَ: डरते हैं, भय रखते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का क्रोध शांत हुआ और उनका गुस्सा खत्म हुआ—जो उन्हें अपनी क़ौम के सोने के बछड़े की पूजा करने पर आया था—तो उन्होंने उन पट्टियों को उठा लिया जिन्हें उन्होंने गुस्से में आकर ज़मीन पर फेंक दिया था। उन पट्टियों में जो कुछ लिखा गया था, वह लोगों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत था—जो उन्हें अंधकार और गुमराही से निकालकर सत्य और सीधे रास्ते पर लाता था—और उन लोगों के लिए रहमत (दया) था जो अपने रब से डरते हैं, उसके अज़ाब (यातना) से भयभीत रहते हैं, और उसके आदेशों का पालन करते हैं। यह हिदायत और रहमत उन्हीं के लिए है जो अपने रब का खौफ रखते हैं और उसकी नाराज़गी से बचते हैं।
फ़ायदे (सबक):
- गुस्सा इंसान के फैसलों को खराब कर देता है, लेकिन जब गुस्सा शांत होता है तो इंसान सही रास्ता अपना सकता है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने गुस्से में पट्टियाँ फेंक दीं, लेकिन शांत होने पर उन्हें उठाकर उनसे लाभ उठाया। यह हमें सिखाता है कि गुस्से में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।
- कुरआन और अल्लाह की हिदायत उन्हीं के लिए फायदेमंद है जो अल्लाह से डरते हैं और उसके अज़ाब से बचना चाहते हैं। जिसके दिल में अल्लाह का खौफ नहीं, वह हिदायत से महरूम रहता है।
- अल्लाह की किताब में हर उस इंसान के लिए रहमत और मार्गदर्शन है जो उसे पढ़ता है, समझता है और उस पर अमल करता है। यह किताब केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने के लिए उतारी गई है।
- अल्लाह का डर (तक़वा) ही वह कुंजी है जो इंसान के लिए हिदायत और रहमत के दरवाजे खोलती है। जो जितना अल्लाह से डरता है, उसे उतनी ही ज़्यादा हिदायत और रहमत मिलती है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की किताब की अहमियत कितनी बड़ी है—यहाँ तक कि नबी भी उसे संभालकर रखते हैं और उसकी ताज़ीम करते हैं। हमें भी कुरआन की ताज़ीम करनी चाहिए और उसे अपनी ज़िंदगी में लागू करना चाहिए।
📜 आयत 152-156 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 154
सूरा अल-आराफ आयत 154 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब मूसा का गुस्सा ठण्डा हुआ तो (तौरैत) की…सूरा आयत 154/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 152–156. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


