अल-आराफ · 154/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَلَمَّا سَكَتَ عَن مُّوسَى الْغَضَبُ أَخَذَ الْأَلْوَاحَ ۖ وَفِي نُسْخَتِهَا هُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلَّذِينَ هُمْ لِرَبِّهِمْ يَرْهَبُونَ ۝١٥٤
Wa lammaa sakata `am Moosal ghadabu akhazal al waaha wa fee nnuskhatihaa hudanw wa rahmatul lillazeena hum li Rabbihim yarhaboon
📖 हिंदी अर्थ
और जब मूसा का गुस्सा ठण्डा हुआ तो (तौरैत) की तख्तियों को (ज़मीन से) उठा लिया और तौरैत के नुस्खे में जो लोग अपने परवरदिगार से डरते है उनके लिए हिदायत और रहमत है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَكَتَ: सुकून मिलना, शांत हो जाना, समाप्त हो जाना।
  • الْأَلْوَاحَ: वे पट्टियाँ (तख्तियाँ) जिन पर तौरात लिखी गई थी।
  • نُسْخَتِهَا: उसकी प्रति, यानी उन पट्टियों में जो कुछ लिखा गया था।
  • هُدًى: मार्गदर्शन, सत्य का रास्ता।
  • رَحْمَةٌ: दया, कृपा।
  • يَرْهَبُونَ: डरते हैं, भय रखते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का क्रोध शांत हुआ और उनका गुस्सा खत्म हुआ—जो उन्हें अपनी क़ौम के सोने के बछड़े की पूजा करने पर आया था—तो उन्होंने उन पट्टियों को उठा लिया जिन्हें उन्होंने गुस्से में आकर ज़मीन पर फेंक दिया था। उन पट्टियों में जो कुछ लिखा गया था, वह लोगों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत था—जो उन्हें अंधकार और गुमराही से निकालकर सत्य और सीधे रास्ते पर लाता था—और उन लोगों के लिए रहमत (दया) था जो अपने रब से डरते हैं, उसके अज़ाब (यातना) से भयभीत रहते हैं, और उसके आदेशों का पालन करते हैं। यह हिदायत और रहमत उन्हीं के लिए है जो अपने रब का खौफ रखते हैं और उसकी नाराज़गी से बचते हैं।

फ़ायदे (सबक):

  1. गुस्सा इंसान के फैसलों को खराब कर देता है, लेकिन जब गुस्सा शांत होता है तो इंसान सही रास्ता अपना सकता है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने गुस्से में पट्टियाँ फेंक दीं, लेकिन शांत होने पर उन्हें उठाकर उनसे लाभ उठाया। यह हमें सिखाता है कि गुस्से में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।
  2. कुरआन और अल्लाह की हिदायत उन्हीं के लिए फायदेमंद है जो अल्लाह से डरते हैं और उसके अज़ाब से बचना चाहते हैं। जिसके दिल में अल्लाह का खौफ नहीं, वह हिदायत से महरूम रहता है।
  3. अल्लाह की किताब में हर उस इंसान के लिए रहमत और मार्गदर्शन है जो उसे पढ़ता है, समझता है और उस पर अमल करता है। यह किताब केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने के लिए उतारी गई है।
  4. अल्लाह का डर (तक़वा) ही वह कुंजी है जो इंसान के लिए हिदायत और रहमत के दरवाजे खोलती है। जो जितना अल्लाह से डरता है, उसे उतनी ही ज़्यादा हिदायत और रहमत मिलती है।
  5. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की किताब की अहमियत कितनी बड़ी है—यहाँ तक कि नबी भी उसे संभालकर रखते हैं और उसकी ताज़ीम करते हैं। हमें भी कुरआन की ताज़ीम करनी चाहिए और उसे अपनी ज़िंदगी में लागू करना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 152-156 — अल-आराफ

152إِنَّ الَّذِينَ اتَّخَذُوا الْعِجْلَ سَيَنَالُهُمْ غَضَبٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَذِلَّةٌ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُفْتَرِينَ
बेशक जिन लोगों ने बछड़े को (अपना माबूद) बना लिया उन पर अनक़रीब ही उनके परवरदिगार की तरफ से अज़ाब नाज़िल होगा और दुनियावी ज़िन्दगी में ज़िल्लत (उसके अलावा) और हम बोहतान बॉधने वालों की ऐसी ही सज़ा करते हैं
153وَالَّذِينَ عَمِلُوا السَّيِّئَاتِ ثُمَّ تَابُوا مِن بَعْدِهَا وَآمَنُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
और जिन लोगों ने बुरे काम किए फिर उसके बाद तौबा कर ली और ईमान लाए तो बेशक तुम्हारा परवरदिगार तौबा के बाद ज़रूर बख्शने वाला मेहरबान है
154وَلَمَّا سَكَتَ عَن مُّوسَى الْغَضَبُ أَخَذَ الْأَلْوَاحَ ۖ وَفِي نُسْخَتِهَا هُدًى وَرَحْمَةٌ لِّلَّذِينَ هُمْ لِرَبِّهِمْ يَرْهَبُونَ
और जब मूसा का गुस्सा ठण्डा हुआ तो (तौरैत) की तख्तियों को (ज़मीन से) उठा लिया और तौरैत के नुस्खे में जो लोग अपने परवरदिगार से डरते है उनके लिए हिदायत और रहमत है
155وَاخْتَارَ مُوسَىٰ قَوْمَهُ سَبْعِينَ رَجُلًا لِّمِيقَاتِنَا ۖ فَلَمَّا أَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ قَالَ رَبِّ لَوْ شِئْتَ أَهْلَكْتَهُم مِّن قَبْلُ وَإِيَّايَ ۖ أَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ السُّفَهَاءُ مِنَّا ۖ إِنْ هِيَ إِلَّا فِتْنَتُكَ تُضِلُّ بِهَا مَن تَشَاءُ وَتَهْدِي مَن تَشَاءُ ۖ أَنتَ وَلِيُّنَا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا ۖ وَأَنتَ خَيْرُ الْغَافِرِينَ
और मूसा ने अपनी क़ौम से हमारा वायदा पूरा करने को (कोहतूर पर ले जाने के वास्ते) सत्तर आदमियों को चुना फिर जब उनको ज़लज़ले ने आ पकड़ा तो हज़रत मूसा ने अर्ज़ किया परवरदिगार अगर तू चाहता तो मुझको और उन सबको पहले ही हलाक़ कर डालता क्या हम में से चन्द बेवकूफों की करनी की सज़ा में हमको हलाक़ करता है ये तो सिर्फ तेरी आज़माइश थी तू जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसको चाहे हिदायत दे तू ही हमारा मालिक है तू ही हमारे कुसूर को माफ कर और हम पर रहम कर और तू तो तमाम बख्शने वालों से कहीें बेहतर है
156۞ وَاكْتُبْ لَنَا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ إِنَّا هُدْنَا إِلَيْكَ ۚ قَالَ عَذَابِي أُصِيبُ بِهِ مَنْ أَشَاءُ ۖ وَرَحْمَتِي وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍ ۚ فَسَأَكْتُبُهَا لِلَّذِينَ يَتَّقُونَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَالَّذِينَ هُم بِآيَاتِنَا يُؤْمِنُونَ
और तू ही इस दुनिया (फ़ानी) और आख़िरत में हमारे वास्ते भलाई के लिए लिख ले हम तेरी ही तरफ रूझू करते हैं ख़ुदा ने फरमाया जिसको मैं चाहता हूँ (मुस्तहक़ समझकर) अपना अज़ाब पहुँचा देता हूँ और मेरी रहमत हर चीज़ पर छाई हैं मै तो उसे बहुत जल्द ख़ास उन लोगों के लिए लिख दूँगा (जो बुरी बातों से) बचते रहेंगे और ज़कात दिया करेंगे और जो हमारी बातों पर ईमान रखा करेंगें
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
154आयत

अनुवाद — अल-आराफ 154

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Tuesday, August 18, 2026

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